Ground Report : लखनऊ अग्निकांड के बाद जयपुर में बढ़ी चिंता, कोचिंग में पढ़ रहे छात्रों की सुरक्षा भगवान भरोसे, 16 सीज
Ground Report : लखनऊ अग्निकांड के बाद जयपुर में बढ़ी चिंता, कोचिंग में पढ़ रहे छात्रों की सुरक्षा भगवान भरोसे, 16 सीज लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद जयपुर भी अलर्ट मोड पर है. पढ़िए ईटीवी भारत की ग्राउंड रिपोर्ट... Publishe…

सौजन्य से:- ETV Bharat
Ground Report : लखनऊ अग्निकांड के बाद जयपुर में बढ़ी चिंता, कोचिंग में पढ़ रहे छात्रों की सुरक्षा भगवान भरोसे, 16 सीज
लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद जयपुर भी अलर्ट मोड पर है. पढ़िए ईटीवी भारत की ग्राउंड रिपोर्ट...
Published : June 23, 2026 at 5:30 PM IST
|Updated : June 23, 2026 at 5:49 PM IST
जयपुर : लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक गतिविधियों से भरी एक इमारत में लगी आग ने पूरे देश को झकझोर दिया. इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश छात्र बताए जा रहे हैं. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धुएं और आग से बचने के लिए कई छात्रों को खिड़कियों से कूदना पड़ा. हादसे ने एक बार फिर शिक्षा संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में फायर सेफ्टी के नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. अगर यही सवाल जयपुर से पूछा जाए तो तस्वीर चिंताजनक नजर आती है.
नगर निगम के हालिया सर्वे और अभियान में सामने आया कि शहर में 1250 से ज्यादा संस्थान बिना फायर एनओसी या अधूरी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के साथ संचालित हो रहे हैं. इनमें होटल, अस्पताल, मॉल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और कोचिंग सेंटर तक शामिल हैं. ऐसे में सवाल ये है कि क्या जयपुर भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? हालांकि, मंगलवार को निगम प्रशासन की ओर से फायर एनओसी के बिना संचालित कोचिंग सेंटर्स पर सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई. इस दौरान 16 संस्थानों को सीज कर दिया गया है.
निगम ने कार्रवाई करते हुए 16 कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी को सीज किया है. निगम की ये कार्रवाई गोपालपुरा, त्रिवेणी नगर, रिद्धी सिद्धी चौराहा, गुर्जर की थड़ी, महेश नगर, रामगढ़ मोड़ पर हुई है. इस कार्रवाई के दौरान निगम प्रशासन ने क्लास-24, करियर विल, अरावली क्लासेज, मेड गुरु, वीजीपी क्लासेज, एएसपी क्लासेज, राजस्थान जीईटी क्लासेज, गुरु नर्सिंग एकेडमी, नेक्स्ट गुरु, सैनी हाउस लाइब्रेरी, कार्तिक कॉम्पिटिशन एकेडमी, इंटरनेशनल क्लासेज, गुरुकुल लाइब्रेरी, डीएन क्लासेज, डीएन लाइब्रेरी व मां सरस्वती लाइब्रेरी को सीज किया है.
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कोचिंग हब बना, लेकिन सुरक्षा पीछे छूट गई : जयपुर का गोपालपुरा बायपास पिछले कुछ वर्षों में बड़े कोचिंग हब के रूप में उभरा है. हजारों छात्र रोजाना इन संस्थानों में पहुंचते हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कई कोचिंग सेंटर बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतों में संचालित हो रहे हैं, जहां एक ही भवन में नीचे शोरूम, रेस्टोरेंट या अन्य व्यवसाय और ऊपर कोचिंग कक्षाएं चल रही हैं. नगर निगम के विशेष निरीक्षण में 139 कोचिंग संस्थानों की जांच की गई, जिनमें से 45 के पास फायर एनओसी नहीं मिली. कई संस्थानों में फायर अलार्म, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास और सुरक्षित विद्युत व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थीं.
सैकड़ों छात्र, लेकिन आपातकालीन निकास नहीं : ग्राउंड स्तर पर स्थिति और भी गंभीर दिखाई दी. गोपालपुरा बायपास और आसपास के क्षेत्रों में कई कोचिंग सेंटर ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता है. कई इमारतों में सीढ़ियां इतनी संकरी हैं कि सामान्य समय में निकलना चुनौतीपूर्ण रहता है. कई कक्षाओं में एक साथ 150 से 300 तक छात्र बैठते हैं. पीक समय में पूरी इमारत में हजारों छात्रों की मौजूदगी रहती है. ऐसे में यदि आग या धुएं की स्थिति बन जाए तो छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना सबसे बड़ी चुनौती होगी.
बहुमंजिला शैक्षणिक भवन में भीड़ क्षमता के अनुसार एक से अधिक निकास मार्ग, फायर अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर और नियमित मॉक ड्रिल अनिवार्य होनी चाहिए, लेकिन वास्तविकता में अधिकांश संस्थानों में इन व्यवस्थाओं को ताक पर रखकर संचालित किया जा रहा है. ऐसे में पहले इन संस्थाओं को नोटिस दिया गया और अब सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है. : गौतम लाल, चीफ फायर ऑफिसर
ईटीवी भारत के रियलिटी चेक में सामने आई हकीकत :
- अरावली क्लासेस में फायर इक्विपमेंट फायर अलार्म सिस्टम नहीं लगे मिले. निगम से फायर एनओसी को लेकर नोटिस भी मिला था, लेकिन जवाब तक नहीं दिया गया.
- मेड गुरु कोचिंग संस्थान में अग्निशमन यंत्र तो थे, लेकिन वर्किंग ऑर्डर में नहीं थे और न ही फायर एनओसी थी. यहां डेमो क्लास चल रही थी, जिसमें सैकड़ों बच्चे पढ़ रहे थे और एग्जिट के नाम पर केवल एक गेट मौजूद था. कोचिंग संचालक ने फायर एनओसी लेने के लिए समय मांगा, जबकि भवन मालिक ने फायर इक्विपमेंट होने का हवाला दिया जो बंद पड़े थे.
- वीजीपी क्लासेस/ जेजे क्लासेस यहां क्लास ओवर हो चुकी थी, क्लास के दौरान ही बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन का काम भी चल रहा था. ऐसे में सीढ़ियों पर पैर फिसलन भी थी और दूसरा कोई एग्जिट डोर था नहीं. क्लासेस दूसरी और तीसरी मंजिल पर संचालित होती हैं, जहां से आपात स्थिति में केवल कांच के गिलास को खोल कर ही कूदा जा सकता है.
- राजस्थान जेट क्लासेस निकास मार्ग ही अवरुद्ध मिला. भवन में क्षमता से ज्यादा लोगों की आवाजाही थी, जिसे निगम प्रशासन की ओर से नोटिस भी दिया गया था. बाद में सीलिंग की कार्रवाई की गई.
- क्लास 24 कोचिंग सेंटर में विद्युत वायरिंग और इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के पास किसी भी तरह के सुरक्षा उपकरण नहीं लगाए गए थे, जो फायर हाइड्रेंट सिस्टम था वो भी आउट ऑफ ऑर्डर था.
- करियरविल कोचिंग संस्थान ने पहले तो फायर एनओसी होने का झूठा दावा किया. जब नगर निगम प्रशासन कार्रवाई करने पहुंचा तो झूठ पकड़ा गया और फिर संस्थान को सीज किया गया. हालांकि, कोचिंग संचालक ने तर्क दिया कि यहां छात्र अध्ययन नहीं करते और निगम भी तब जागता है, जब कोई दुर्घटना हो जाती है.
- एएसपी क्लासेस में अंदर वुडन वर्क हो रखा था और संस्थान में कहीं पर भी फायर इक्विपमेंट इंस्टॉल नहीं थे.
पूर्व सीएम ने उठाए सवालः उधर, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सरकार इंतज़ार कर रही है कि यूपी अग्निकांड की तरह घटना यहां पर हो? आखिर कोचिंग हब क्यों शुरू नहीं कर रहे? उनकी सरकार ने 240 संस्थानों के लिए कोचिंग हब बना दिया. 140 लोगों ने पैसे जमा करा दिए. इस सरकार की बेवकूफ़ी से 100 लोगों ने पैसे वापस ले लिए. वो तो आईआईटी का वहां ब्रांच खोलेंगे, मज़ाक बना रखी है. आईआईटी की अगर एक यूनिट खोलनी है उनके लिए नया भवन बना दीजिए.
लखनऊ हादसा बना चेतावनी : लखनऊ में जिस इमारत में आग लगी, वहां भी कोचिंग सेंटर के साथ अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं. शुरुआती रिपोर्टों में सामने आया कि धुआं तेजी से पूरे भवन में भर गया और लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका. कई छात्रों को जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग लगानी पड़ी. जयपुर के जिन कोचिंग सेंटर्स पर ईटीवी भारत पहुंचा वहां भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति दिखाई देती है. नीचे व्यावसायिक गतिविधि, ऊपर कोचिंग, सीमित निकास, भीड़भाड़ और पार्किंग की अव्यवस्था.
जयपुर में ऐसे कोचिंग संस्थानों को नोटिस दिया गया, लेकिन जिन्होंने इस नोटिस को कागज का टुकड़ा समझा, वहां पर अब कार्रवाई की जा रही है. कुछ ने नोटिस के बाद फौरी तौर पर कुछ इक्विपमेंट लगा लिए, लेकिन वो भी वर्किंग ऑर्डर में नहीं हैं. ऐसों पर भी सीलिंग की कार्रवाई हुई है. : राजेंद्र नगर, फायर ऑफिसर
छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता : कोचिंग उद्योग आज करोड़ों रुपए का कारोबार बन चुका है. हर साल हजारों छात्र अपने सपनों के साथ जयपुर आते हैं. अभिभावक फीस, हॉस्टल और अन्य खर्चों पर लाखों खर्च करते हैं, लेकिन शायद ही कभी ये पूछते हों कि जिस भवन में उनका बच्चा रोजाना कई घंटे बिताता है, वहां आग लगने की स्थिति में बचाव के क्या इंतजाम हैं?
एनओसी केवल एक कागज नहीं बल्कि जीवन सुरक्षा का प्रमाण है. यदि किसी भवन में अग्निशमन व्यवस्था, निकासी योजना और नियमित निरीक्षण नहीं है तो वो भवन संभावित खतरे की श्रेणी में आता है. : देवांग शर्मा, फायर ऑफिसर
लखनऊ हादसे के बाद सीलिंग की कार्रवाई : फायर सुरक्षा को लेकर हर बड़े हादसे के बाद अभियान शुरू होता है. निरीक्षण होते हैं, नोटिस जारी किए जाते हैं और कुछ दिनों तक सख्ती भी दिखाई देती है, लेकिन समय बीतने के साथ मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है. नगर निगम ने हाल ही में दर्जनों संस्थानों को नोटिस जारी किए और कुछ मामलों में सीज करने की कार्रवाई भी की है. हालांकि, सवाल ये है कि जब वर्षों से संस्थान बिना एनओसी और सुरक्षा इंतजामों के संचालित हो रहे थे, तब निगरानी व्यवस्था कहां थी?
प्रताप नगर कोचिंग हब भी ठंडे बस्ते में : जयपुर में राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने प्रताप नगर में देश का पहला कोचिंग हब भी विकसित किया था. करीब 65-67 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में 228 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत से विकसित इस परियोजना का उद्देश्य शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में संचालित कोचिंग संस्थानों को एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक परिसर में स्थानांतरित करना था. इस हब में लगभग 70 हजार छात्रों की क्षमता, पर्याप्त पार्किंग, केंद्रीय लाइब्रेरी, साइबर लैब, हॉस्टल, फूड कोर्ट और सुरक्षा निगरानी जैसी सुविधाएं प्रस्तावित की गई थीं, लेकिन विडंबना ये है कि जिस परियोजना को गोपालपुरा, प्रतापनगर, टोंक रोड और मानसरोवर क्षेत्र में बेतरतीब ढंग से चल रहे कोचिंग संस्थानों का विकल्प बनना था, वही परियोजना आज पूरी तरह उपयोग में नहीं आ सकी है. कोचिंग संचालकों ने वहां शिफ्ट होने में विशेष रुचि नहीं दिखाई है और जिन कोचिंग संचालकों को यूनिट आवंटित हुई उनका आवंटन निरस्त कर दिया गया.
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