वो सोचता था JEE उसके जैसों के लिए नहीं, कोटा के पैसे नहीं थे, अब रिक्शे वाले का वही बेटा बनेगा इंजीनियर
ई-रिक्शा चलाते हैं पिता, परिवार की सालाना आय 1 लाख से भी कम इंद्रीजत राजस्थान के छोटे से गांव पठानवाला (श्रीगंगानगर जिला) के गरीब परिवार से आते हैं, जहां सुविधाओं के नाम पर भी ही कुछ न हो, लेकिन हौसलों की कोई कमी नहीं है…

सौजन्य से:- Navbharat Times
ई-रिक्शा चलाते हैं पिता, परिवार की सालाना आय 1 लाख से भी कम
इंद्रीजत राजस्थान के छोटे से गांव पठानवाला (श्रीगंगानगर जिला) के गरीब परिवार से आते हैं, जहां सुविधाओं के नाम पर भी ही कुछ न हो, लेकिन हौसलों की कोई कमी नहीं है। इंद्रजीत के पिता ई-रिक्शा चलाते हैं और शायद उनके पूरे परिवार की सालाना आय 1 लाख रुपये से भी कम है।एक ऐसे घर में जहां रोज का गुजारा ई-रिक्शा के पहियों पर टिका था, वहां के एक लड़के ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक जेईई एडवांस्ड 2026 को क्रैक करके पूरे गांव का नाम रोशन कर दिया। इं
9वीं क्लास तक IIT का नाम भी नहीं सुना था
पठानवाला उन गांवों में से है, जहां आज भी पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है, JEE और NEET तो बहुत दूर की कौड़ी होती जाती है। इंद्रजीत ने भी 10वीं क्लास में पहली बार 'IIT' नाम सुना था। वो कहते हैं-10वीं क्लास में देखा आईआईटी में पढ़ने का सपना
इंद्रजीत ने 10वीं क्लास में पहली बार कुछ सीनियर स्टूडेंट्स को आईआईटी के बारे में बात करते हुए सुना था। लेकिन वे एक साधारण स्थानीय स्कूल में पढ़ रहे थे। तब उन्हें लगा कि यह बड़े शहरों के उन अमीर बच्चों के लिए है जो लाखों रुपये की महंगी कोचिंग का खर्च उठा सकते हैं। लेकिन यही वो पल था जब उन्होंने इंजीनियर बनने का सपना देखा था।न महंगे कोचिंग की फीस, न कोई बड़ी सुविधाएं, फिर नहीं मानी हार
इंद्रजीत के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे किसी बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट या संस्थान में जा सके। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और ऑनलाइन पढ़ाई करने का रास्ता चुना। हालांकि गांव में बार-बार कटने वाली बिजली और वीक इंटरनेट उनके रास्ते का रोड़ा बनते रहे।कोटा जाने के पैसे नहीं थे, पिता एक सलाह ने बदली जिंदगी
कोटा को राजस्थान की कोचिंग नगरी कहा जाता है। देश के कई शहरों से बच्चे कोटा आकर जेईई-नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लेकिन आर्थिक तंगी के चलते इंद्रजीत का कोटा जाना संभव नहीं था। पैसों की कमी के चलते कोटा न जा पाना और घर पर पढ़ाई करने में दिक्कतें। उस वक्त पिता ने एक ऐसी सलाह दी जिससे इंद्रजीत की जिंदगी बदल गई।उन्होंने पास के एक गांव की लाइब्रेरी के बारे में बताया, जहां बैठने की अच्छी व्यवस्था और फ्री इंटरनेट की सुविधा थी। बस, फिर क्या था! वह लाइब्रेरी ही इंद्रजीत की तपस्या का केंद्र बन गई।
दूसरी बार में क्रैक किया IIT-JEE
इंद्रजीत ने 2025 में जेईई की परीक्षा दी थी, लेकिन मनमुताबिक स्कोर नहीं आया। फिर भी उनके कदम डगमगाए नहीं। उन्होंने दोगुनी मेहनत की। सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक का कड़ा रूटीन फॉलो किया।- सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई
- स्कूल के बाद लाइब्रेरी में घंटों बिताए।
- फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के पुराने कॉन्सेप्ट्स का रिवीजन किया।
- ऑनलाइन क्लासेस लीं।
- नोट्स और टेस्ट सीरीज से मदद मिली।
इंद्रजीत की मेहनत रंग लाई। पहले जेईई मेन और फिर जेईई एडवांस्ड में अच्छा स्कोर करके आईआईटी जाने का रास्ता तैयार कर लिया। जेईई एडवांस्ड 2026 की परीक्षा में OBC-NCL कैटेगरी में 1040वीं रैंक हासिल की। वे आगे आईआईटी रुड़की से बीटेक करना चाहते हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी (AI) की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं। उनकी कहानी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर खुद पर भरोसा और कड़ी मेहनत का जज्बा है तो आपको कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता।
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