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अजमेर में मोहर्रम का अशूरा, हाईदोस की परंपरा निभाई

अजमेर में मोहर्रम का अशूरा, हाईदोस की परंपरा निभाई आशूरा और जुमे की नमाज के मद्देनजर दरगाह समेत मुस्लिम इलाकों में पुलिस के सुरक्षा बंदोबस्त कड़े रहे. Published : June 26, 2026 at 5:00 PM IST अजमेर: शहर में आशूरा के दिन…

ETV Bharat के अनुसार26 जून 2026 को 12:25 pm बजे
अजमेर में मोहर्रम का अशूरा, हाईदोस की परंपरा निभाई

सौजन्य से:- ETV Bharat

अजमेर में मोहर्रम का अशूरा, हाईदोस की परंपरा निभाई

आशूरा और जुमे की नमाज के मद्देनजर दरगाह समेत मुस्लिम इलाकों में पुलिस के सुरक्षा बंदोबस्त कड़े रहे.

Published : June 26, 2026 at 5:00 PM IST

अजमेर: शहर में आशूरा के दिन हजरत इमाम हुसैन और शोहदाये कर्बला की याद में ताजिये निकाले गए. अढाई दिन के झोपड़ा से ताजिये रवाना किए गए. हताई चौक के इमाम बारगाह में तलवारों से हाईदोस खेली गई. हाईदोस के समय पुलिस की कड़ी सुरक्षा रही. प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी तथा अंदर कोट पंचायत के पदाधिकारी मौजूद थे. मोहर्रम की दस तारीख यानी आशूरा और जुमे की नमाज के मद्देनजर अजमेर में दरगाह समेत मुस्लिम इलाकों में पुलिस के सुरक्षा बंदोबस्त कड़े रहे.

दी सोसाइटी अंदर कोटियान पंचायत के पदाधिकारी फिरोज खान एवं अकरम खान ने बताया कि हाईदोस की परंपरा अंदर कोटियान पंचायत के सदस्यों ने निभाई. हाईदोस की रस्म शुक्रवार दोपहर 21 तोपों की सलामी से हताई चौक से शुरू हुई, जो त्रिपोलिया गेट होते अंदरकोट, तालाब की पाल से गुजरते हुए आमा बावड़ी पहुंची. हाईदोस खेलते 3 दर्जन से ज्यादा अकीदतमंदों को चोटें आई. इन्हें मौके पर ही उपचार दिया गया. रास्ते में लंगर प्रसादी, ठंडा पानी, शरबत भी वितरित किए गए. तलवारबाजी के जरिए कर्बला के जंगी दृश्य को दर्शाया और लब्बैक या हुसैन के नारे बुलंद किए.

हाईदोस के खिलाड़ी साजिद खान व अनीस खान ने बताया कि 9 मोहर्रम की रात और 10 मोहर्रम की दोपहर को सैकड़ों लोगों ने ढाई हाथ तलवारों से हाईदोस खेली. प्रशासन ने कुल 100 तलवारें एवं एक तोप से हाईदोस की रस्म संपन्न कराई. हाईदोस की रस्म सैकड़ों साल पुरानी है. इसका गजट ऑफ इंडिया और गजट ऑफ राजस्थान में जिक्र है. घर घर प्रसादी और कुरान का पाठ किया गया. नमाज अदा की गई. श्रद्धालुओं ने पूरा दिन भूखा प्यास रहकर रोजा किया एवं दुआएं मांगी.

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