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राजस्थान में बनती थीं नकली दवाएं: लखनऊ से पूरे यूपी में सप्लाई; फोन-पे से पेमेंट, बसों से होती थी डिलीवरी - Lucknow News

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Dainik Bhaskar के अनुसार20 जुलाई 2026 को 06:25 am बजे
राजस्थान में बनती थीं नकली दवाएं:  लखनऊ से पूरे यूपी में सप्लाई; फोन-पे से पेमेंट, बसों से होती थी डिलीवरी - Lucknow News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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राजस्थान में बनती थीं नकली दवाएं:लखनऊ से पूरे यूपी में सप्लाई; फोन-पे से पेमेंट, बसों से होती थी डिलीवरी

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लखनऊ में पकड़ी गई नकली दवाओं के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ एक बड़े अंतर्राज्यीय सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि राजस्थान में दवाएं तैयार होती थीं और लखनऊ के जरिए उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बिना बिल के सप्लाई की जाती थीं। जांच एजेंसियों को ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे यह सिर्फ नकली दवा नहीं बल्कि संगठित अपराध का मामला बनता नजर आ रहा है। बीते एक सप्ताह में तीन जगह पर अलग-अलग तरीके के नकली दवाईयों के मामले सामने आए। राजधानी लखनऊ में बैठकर प्रदेश भर में नकली दवाएं भेजी और बेची जा रही है। इन सब पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जानलेवा दावों के पीछे का रैकेट का सरगना कब पकड़ा जाएगा?

राजस्थान में फैक्ट्री, लखनऊ बना वितरण का सेंटर

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क का मुख्य संचालन राजस्थान से हो रहा था। विभाग के मुताबिक, मुख्य आरोपी भूपेंद्र शर्मा और उसके सहयोगी वहां से दवाएं तैयार कर उत्तर प्रदेश भेजते थे। लखनऊ इस नेटवर्क का प्रमुख वितरण केंद्र बना हुआ था, जहां से कई जिलों में सप्लाई की जाती थी।

नामी कंपनियों की हूबहू पैकिंग, लेकिन स्पेलिंग ने खोल दी पोल

जांच के दौरान Telma, Pantop-40, Flozen-AA, MOXYZIDE-CV 625 LB, Clavam-625, Zerodol-SP, Chymoral Forte, Augmentin समेत कई चर्चित ब्रांड की दवाएं मिलीं। पहली नजर में पैकिंग बिल्कुल असली जैसी दिखी, लेकिन लेबल पर Dose की जगह Doase, Approved की जगह Apporved, Equivalent की जगह Equivelent और Allergic की जगह Allagic जैसी गलतियों ने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया।

बिना बिल खरीद, कैश और ऑनलाइन पेमेंट से चलता था कारोबार

जांच में पता चला कि दवाएं बिना किसी वैध बिल के खरीदी और बेची जा रही थीं। भुगतान फोन-पे सहित डिजिटल माध्यमों से किया जाता था। आरोपियों के लिखित बयानों में राजस्थान के सप्लायरों को रकम भेजने और वहां से माल मंगाने की बात भी सामने आई है। रोडवेज और प्राइवेट बसों से यूपी के जिलों में पहुंचता था माल

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दवाओं की सप्लाई के लिए रोडवेज और निजी बसों का इस्तेमाल किया जाता था। लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, सीतापुर, गोंडा समेत कई जिलों तक बिना किसी दस्तावेज के दवाएं भेजी जाती थीं। इससे एजेंसियों को संदेह है कि नेटवर्क काफी समय से सक्रिय था।

लखनऊ से शुरू हुई जांच, अब कई जिलों तक पहुंची

अमीनाबाद में गोदाम पर छापेमारी के बाद बक्शी का तालाब, गोंडा और अन्य स्थानों पर कार्रवाई हुई। अब तक 27 संदिग्ध दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। करीब 21 लाख रुपये की दवाएं सील की गई हैं, जबकि गोंडा में एनडीपीएस श्रेणी की दवाएं भी बरामद हुई हैं।

संगठित अपराध की धाराओं में केस की तैयारी

एफएसडीए ने मुख्य आरोपी समेत आठ लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 (संगठित अपराध), 318(4), 319(2), 276, 277 और 278 के तहत एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की है। विभाग का मानना है कि यह सिर्फ नकली दवाओं की बिक्री नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाला संगठित आपराधिक नेटवर्क है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि इस नेटवर्क के जरिए कितनी नकली दवाएं बाजार में पहुंचीं, किन मेडिकल स्टोरों तक इनकी सप्लाई हुई और क्या अन्य राज्यों के लोग भी इस सिंडिकेट से जुड़े हैं। लैब रिपोर्ट आने के बाद कई और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

निकली दवाओं के सरगना पकड़े गए जाए: केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन

लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित तिवारी ने नकली दवाओं के खिलाफ चल रही छापेमारी अभियान का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, "हम पहले भी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की कार्रवाई की सराहना कर चुके हैं और मौजूदा समय में जिन दो-तीन स्थानों पर छापेमारी के दौरान नकली दवाएं और उनसे जुड़े लोग पकड़े गए हैं, वह सराहनीय कदम है। हमारी मांग है कि यह अभियान लगातार जारी रहे और नकली दवाओं के पूरे नेटवर्क तथा उसके सरगनाओं तक पहुंचकर सख्त कार्रवाई की जाए।"

उन्होंने कहा कि "हमें एफएसडीए की टीम से बड़ी उम्मीदें हैं। जब बाजार से नकली दवाओं का कारोबार पूरी तरह खत्म होगा, तभी असली दवाएं ग्राहकों तक पहुंचेंगी और ईमानदारी से कारोबार करने वाले दवा विक्रेताओं को भी राहत मिलेगी।" अमित तिवारी ने मांग की कि नकली दवाओं का निर्माण और बिक्री करने वालों के खिलाफ हत्या के प्रयास या हत्या जैसे गंभीर अपराधों के अनुरूप कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान किसी भी वैध और ईमानदार दवा कारोबारी को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

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