Muharram 2026 : हजरत इमाम हुसैन की निशानी जयपुर में, 400 साल से परिवार कर रहा देखभाल
Muharram 2026 : हजरत इमाम हुसैन की निशानी जयपुर में, 400 साल से परिवार कर रहा देखभाल जयपुर की सलीम मंजिल में करीब 200 साल से हकीम सलीमुद्दीन खान का परिवार कर रहा है इमाम हुसैन की टोपी की देखभाल. Published : June 25, 2026…

सौजन्य से:- ETV Bharat
Muharram 2026 : हजरत इमाम हुसैन की निशानी जयपुर में, 400 साल से परिवार कर रहा देखभाल
जयपुर की सलीम मंजिल में करीब 200 साल से हकीम सलीमुद्दीन खान का परिवार कर रहा है इमाम हुसैन की टोपी की देखभाल.
Published : June 25, 2026 at 9:02 PM IST
जयपुर: कर्बला की ऐतिहासिक जंग में शहादत देने वाले पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे (दोहिते) हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में दुनिया भर में मोहर्रम अकीदत और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. मोहर्रम के अवसर पर शुक्रवार को राजधानी जयपुर सहित देश भर में मुस्लिम धर्मावलंबी हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए ढोल-ताशों की मातमी धुनों क बीच ताजिये निकलेंगे.
राजधानी जयपुर में कल सुबह से ही जुलूस के रूप में ताजिये निकलेंगे और छोटी-बड़ी चौपड़ होते हुए रामगढ़ मोड़ कर्बला मैदान में पहुंचेंगे, जहां उन्हें सुपुर्द ए खाक किया जाएगा. दुनिया भर में इमाम हुसैन के चाहने वाले हैं. हर कोई उन्हें याद करता है, लेकिन राजधानी जयपुर को इसलिए भी याद किया जाता है कि हजरत इमाम हुसैन की एक निशानी सैकड़ों सालों से महफूज रखी हुई है.
हम बात कर रहे हैं हजरत इमाम हुसैन की कुलह मुबारक (टोपी) की जो करीब 1400 साल से महफूज है. हालांकि, राजधानी जयपुर में करीब 200 साल पहले कुलह मुबारक को लाया गया था. तब से ही हर साल मोहर्रम से एक दिन पहले इसे लोगों की जियारत (दर्शनों) के लिए रखा जाता है.
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जयपुर की सलीम मंजिल में रखी है टोपी : हजरत इमाम हुसैन की ऐतिहासिक टोपी जयपुर रियासत में ताजीमी ठिकानेदार रहे हकीम सलीमुद्दीन खान की हल्दियों के रास्ते में स्थित सलीम मंजिल हवेली में रखी हुई है. सलीम मंजिल में रहने वाले हुसामुद्दीन का कहना है कि हजरत इमाम हुसैन की टोपी करीब 400 साल से हमारे पास है. हमारे जो पूर्वज उज्बेकिस्तान के ताशकंद में रहते थे, जो मुगल दौर में हिंदुस्तान आए थे.
बतौर इनाम मिली थी इमाम हुसैन की टोपी : हुसामुद्दीन का कहना है हजरत इमाम हुसैन की टोपी उनके पूर्वजों को 400 साल पहले ईरान के बादशाह ने बतौर इनाम में दी थी. क्योंकि ईरान के बादशाह एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. हमारे पूर्वजों ने उनका इलाज किया था और वो ठीक हो गए थे. तब उन्होंने प्रसन्न होकर हजरत इमाम हुसैन की टोपी हमारे पूर्वजों को दी थी.
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जब हमारे पूर्वज हिंदुस्तान आए तब इस टोपी को साथ लेकर आए थे. उसके बाद जब हमारे पूर्वजों को जयपुर रियासत की ओर से ताजीमी ठिकानेदार बनाया गया था, तब से ही हल्दियों के रास्ते में स्थित हमारी हवेली में यह टोपी पिछले 200 साल से पूरी तरह सुरक्षित है. उन्होंने कहा की टोपी के अलावा एक झाड़ू भी है जो इमाम हुसैन के दौर की है. हमने पूरी तरह से महफूज करके रखी है. और भी कई चीजे हैं, जिन्हें ईरान के बादशाह ने गिफ्ट के तौर पर दिया था.
हर साल रखा जाता है जियारत के लिए : सलीम मंजिल हवेली से जुड़े मोइनुद्दीन का कहना है कि यह मुस्लिमों के लिए बहुत ही मुकद्दस चीज है. हर साल मोहर्रम से एक दिन पहले लोगों की जियारत के लिए इसे खोला जाता है. काफी लोग दूर-दराज से इसकी जियारत के लिए हमारी हवेली में आते हैं और अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं. मोइनुद्दीन ने कहा कि इसके रखरखाव हम दोनों भाई कर रहे हैं. इसको एक सुरक्षित जगह पर रखा जाता है और फिर मोहर्रम की 9 और 10 तारीख को ही खोला जाता है. इस पर कोई लेप वगैरह नहीं लगाया जाता है. करीब 200 साल से ही इसको एक कांच के आयताकार बक्से में रखा हुआ है.
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