होम›बिज़नेस›जयपुर: NGT का बड़ा आदेश, 63 फैक्ट्रियों पर मंडराया बंद होने का खतरा
बिज़नेस

जयपुर: NGT का बड़ा आदेश, 63 फैक्ट्रियों पर मंडराया बंद होने का खतरा

जयपुर: NGT का बड़ा आदेश, 63 फैक्ट्रियों पर मंडराया बंद होने का खतरा जयपुर के विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया (VKI) में करीब 70 साल पुरानी जमीन से जुड़ी एक सरकारी गड़बड़ी के कारण उद्यमियों और कर्मचारियों के सामने बड़ा संकट ख…

ABP News के अनुसार7 अक्टूबर 2026 को 05:04 am बजे
जयपुर: NGT का बड़ा आदेश, 63 फैक्ट्रियों पर मंडराया बंद होने का खतरा

सौजन्य से:- ABP News

जयपुर: NGT का बड़ा आदेश, 63 फैक्ट्रियों पर मंडराया बंद होने का खतरा

जयपुर के विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया (VKI) में करीब 70 साल पुरानी जमीन से जुड़ी एक सरकारी गड़बड़ी के कारण उद्यमियों और कर्मचारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है. मामला कोर्ट जा सकता है.

जयपुर के विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया (VKI) में 63 फैक्ट्रियों पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है. वजह है करीब 70 साल पुरानी जमीन से जुड़ी एक सरकारी गड़बड़ी, जिसका असर अब उन उद्यमियों और कर्मचारियों पर पड़ रहा है, जिन्होंने कभी इस जमीन की खरीद-फरोख्त या आवंटन में कोई भूमिका ही नहीं निभाई.

बीड़ पापड़ इलाके के खसरा नंबर 7/2 की करीब 2.90 हेक्टेयर जमीन को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT ने वन भूमि माना है. ट्रिब्यूनल ने 30 दिन के भीतर जमीन खाली कराने और वहां बने निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं. आदेश के बाद 63 औद्योगिक इकाइयों में हड़कंप मचा हुआ है.

हजारों कर्मचारियों और मजदूरों की बढ़ी चिंता

इन फैक्ट्रियों में करोड़ों रुपए का निवेश लगा है. कई उद्यमियों ने बैंक से कर्ज लेकर कारोबार खड़ा किया है. सबसे बड़ी चिंता सिर्फ फैक्ट्री मालिकों की नहीं है, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों और मजदूरों की है, जिनकी रोजी-रोटी इन्हीं फैक्ट्रियों से चलती है. अगर फैक्ट्रियां बंद होती हैं तो इन लोगों के सामने सीधे रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा.

उद्यमियों का कहना है कि करीब 70 साल पहले रीको ने सरकारी प्रक्रिया के तहत यहां जमीन आवंटित की थी. सरकारी रिकॉर्ड और रीको के आवंटन पर भरोसा करके उन्होंने फैक्ट्रियां लगाईं और सालों से टैक्स और दूसरे शुल्क भी जमा करते आ रहे हैं. अब अगर जमीन को वन भूमि बताया जा रहा है तो सवाल उठ रहा है कि इस गलती की जिम्मेदारी किसकी है?

'सरकारी विभाग की गलती, कीमत फैक्ट्री मालिक और कर्मचारी क्यों चुकाएं ?'

उद्योगपतियों का सीधा सवाल है कि जब जमीन सरकारी एजेंसी ने दी, नक्शे और रिकॉर्ड सरकारी विभागों ने तैयार किए और उसी भरोसे पर कारोबार खड़ा हुआ, तो आज उसकी कीमत फैक्ट्री मालिक और कर्मचारी क्यों चुकाएं ?

विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि जब तक पूरे मामले का कानूनी समाधान नहीं निकलता, तब तक किसी फैक्ट्री को सील करने, खाली कराने या तोड़ने की कार्रवाई नहीं की जाए. उद्यमियों ने वन विभाग को जरूरत के मुताबिक दूसरी जमीन देने का रास्ता भी सुझाया है.

सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी

रीको के प्रबंध निदेशक सुरेश कुमार ओला के मुताबिक मामले के समाधान के लिए जयपुर कलेक्टर और वन विभाग के अधिकारियों से लगातार बातचीत चल रही है. रीको कानूनी राय ले रहा है और NGT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील के साथ NGT में रिव्यू पिटीशन की तैयारी भी की जा रही है. हालांकि, उन्होंने कैमरे के सामने कोई भी बयान नहीं दिया है.

आंदोलन की चेतावनी

अब मामला सिर्फ जमीन का नहीं है. सवाल उन 63 फैक्ट्रियों में लगे करोड़ों रुपए, हजारों कर्मचारियों की नौकरी और उनके परिवारों की रोजी-रोटी का भी है. उद्यमियों की चिंता है कि अगर समय रहते रास्ता नहीं निकला तो वर्षों से चल रहे कारोबार पर ताला लग सकता है. एसोसिएशन ने साफ चेतावनी दी है कि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे आंदोलन और सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होंगे.

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें