32 साल बाद ऐतिहासिक यमुना जल समझौता: अमित शाह की मौजूदगी में राजस्थान-हरियाणा के CM ने किए हस्ताक्षर
यह समझौता केवल कागजी नहीं, बल्कि राजस्थान के चूरू, राजगढ़ और शेखावाटी के इलाकों के लिए भाग्य बदलने वाली लाइफलाइन साबित होगा। दिल्ली के बीकानेर हाउस में रविवार को दोनों राज्यों के आला अधिकारियों के बीच हुई दो घंटे की मैरा…

सौजन्य से:- Navbharat Times
यह समझौता केवल कागजी नहीं, बल्कि राजस्थान के चूरू, राजगढ़ और शेखावाटी के इलाकों के लिए भाग्य बदलने वाली लाइफलाइन साबित होगा। दिल्ली के बीकानेर हाउस में रविवार को दोनों राज्यों के आला अधिकारियों के बीच हुई दो घंटे की मैराथन बैठक में सहमति की आखिरी मुहर लग गई।
हथिनी कुंड से ग्रेविटी और पंपिंग के 'हाईब्रिड मोड' पर बहेगी यमुना
इस प्रोजेक्ट का सबसे रोमांचक पहलू इसका इंजीनियरिंग मॉडल है। हथिनी कुंड बैराज से राजस्थान के राजगढ़ (चूरू) के जलाशय के बीच जमीन के स्तर में लगभग 110 मीटर का अंतर है। राजगढ़ 110 मीटर नीचे है, जिसका मतलब है कि पानी प्राकृतिक रूप से 'ग्रेविटी' के प्रवाह से खुद-ब-खुद राजगढ़ तक पहुंचेगा। हालांकि, इसे पूरी तरह 'हाईब्रिड मोड' पर तैयार किया जा रहा है।पाइपलाइन के रास्ते में आधुनिक पंपिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे, ताकि किसी भी सीजन में अगर यमुना में पानी का स्तर कम हो, तो पंप के सहारे पानी को खींचकर राजस्थान लाया जा सके। इसके लिए हरियाणा के 5 जिलों यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार से होकर 3.6 डायमीटर की तीन विशाल पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी।
संयुक्त बोर्ड नहीं, अब 'SPV' कंपनी संभालेगी कमान
पहले इस मेगा प्रोजेक्ट को चलाने के लिए एक संयुक्त बोर्ड बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन नए एंगल के तहत अब दोनों राज्य एक स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी एक विशेष कंपनी बनाने पर सहमत हुए हैं। यही कंपनी इस पूरी पाइपलाइन परियोजना का संचालन और रखरखाव करेगी।- इस पूरी योजना का आर्थिक खर्च राजस्थान सरकार वहन करेगी।
- इसके लिए केंद्र सरकार से भी वित्तीय सहयोग लेने का प्रयास किया जाएगा।
- इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भविष्य में जब किशाऊ, लखवार और रेणुकाजी बांध बनेंगे, तब राजस्थान के हिस्से का पानी भी इन्हीं पाइपलाइनों के जरिए मरुधरा तक पहुंच सकेगा।
1994 का 'समझौता' ही रहेगा लागू, राजस्थान को मिलेगा 1917 क्यूसेक पानी
हरियाणा ने इस समझौते के बदले अपने कई क्षेत्रों जैसे दानोदा कलां, नयागांव, हिंदवान, पाट्टन, सेगा नरार और कैथल टाउन के आसपास से कुल मिलाकर सैकड़ों क्यूसेक पानी की मांग की है, जिसे राजस्थान पूरा करेगा। हरियाणा हाश्यावास के तीन रिजर्वायर में से भी जरूरत के मुताबिक पानी ले सकेगा।हरियाणा चाहता था कि बदली परिस्थितियों के अनुसार नया बंटवारा हो, लेकिन राजस्थान 'मदर एग्रीमेंट' (1994 के मूल समझौते) को ही लागू रखने पर अड़ा रहा और आखिरकार हरियाणा इस पर मान गया। इसके तहत राजस्थान को उसके हक का पूरा 1917 क्यूसेक पानी मिलेगा। आज एमओए पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद भूमि अवाप्ति और टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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