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राजस्थान में सूखा घोषित करे सरकार, राहत कार्य तुरंत शुरू हो अशोक गहलोत | Drought situation serious in western Rajasthan: Congress (Photo: IANS)

राजस्थान में सूखा घोषित करे सरकार, राहत कार्य तुरंत शुरू हो अशोक गहलोत जयपुर, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने गुरुवार को पश्चिमी राजस्थान में सूखे की गंभीर स्थिति पर चिंत…

दैनिक भास्कर हिन्दी के अनुसार8 अक्टूबर 2026 को 11:04 pm बजे
राजस्थान में सूखा घोषित करे सरकार, राहत कार्य तुरंत शुरू हो अशोक गहलोत | Drought situation serious in western Rajasthan: Congress (Photo: IANS)

सौजन्य से:- दैनिक भास्कर हिन्दी

राजस्थान में सूखा घोषित करे सरकार, राहत कार्य तुरंत शुरू हो अशोक गहलोत

जयपुर, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने गुरुवार को पश्चिमी राजस्थान में सूखे की गंभीर स्थिति पर चिंता जताई और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया कि वे सूखा प्रभावित क्षेत्रों की घोषणा करें और तुरंत राहत कार्य शुरू करें।

अशोक गहलोत ने कहा कि जिसे उन्होंने 'खोखले वादे' कहा, उनके बजाय पशुओं के लिए चारे और पीने के पानी की व्यवस्था बिना देरी के की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी राजस्थान में पशु भूख और प्यास से जूझ रहे हैं, जबकि राज्य सरकार केवल घोषणाएं करने तक ही सीमित रही है। उन्होंने कहा कि राज्य भर के अखबारों में सूखे की गंभीर स्थिति के बारे में खबरें छप रही थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत के कोई असरदार उपाय नहीं दिख रहे थे।

बाड़मेर में चारे के डिपो खोलने के बारे में 30 सितंबर को मुख्यमंत्री की घोषणा का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि आठ दिन बीत जाने के बाद भी बाड़मेर और जैसलमेर के प्रभावित इलाकों में न तो चारे के डिपो खोले गए और न ही पशु शिविर शुरू किए गए।

उन्होंने कहा कि गदरा रोड के स्थानीय प्रशासन ने मीडिया को बताया था कि 23 पटवार सर्किलों में चारा शिविर शुरू करने के प्रस्ताव भेजे गए थे, लेकिन उन्हें अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। गहलोत ने कहा कि प्रशासन देरी की वजह 'आदर्श आचार संहिता' को बता रहा है।

सरकार से सवाल करते हुए उन्होंने पूछा कि जब सूखे के हालात पहले से ही साफ थे, तो आचार संहिता लागू होने से पहले जरूरी तैयारियां क्यों नहीं की गईं?

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या राहत कार्य शुरू करने के लिए राज्य चुनाव आयोग से मंजूरी ली गई थी।

मवेशियों की मौत की खबरों पर चिंता जाहिर करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बाड़मेर के गदरा रोड इलाके के 20 से ज्यादा गांवों में मवेशियों की मौत की सूचना मिली है।

उन्होंने कहा कि हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि खबरों के मुताबिक, कुछ इलाकों में मवेशियों को प्लास्टिक और कचरा खाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती इलाकों के ग्रामीणों के अनुसार, चारे की कीमतें तीन गुना तक बढ़ गई हैं और जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आई हैं।

गहलोत ने आगे कहा कि सरकार गौशालाओं को बड़े जानवरों के लिए प्रति दिन सिर्फ 50 रुपये दे रही है, जबकि गौशाला संचालकों का कहना है कि प्रति जानवर रोजाना खर्च 100 से 150 रुपए के बीच आता है।

सरकारी आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 9 सितंबर तक लगभग 383 करोड़ रुपए के ग्रांट बिल पेंडिंग थे। उन्होंने यह भी कहा कि जैसलमेर के भाजपा विधायक ने भी सरकार से तुरंत सूखा घोषित करने की मांग की थी, लेकिन अभी तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।

गहलोत ने कहा कि भाजपा सरकार अक्सर गायों के कल्याण की बात करती है, उसे जमीनी हालात से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से तुरंत सूखा घोषित करने, चारे के डिपो और पशु शिविर खोलने, और प्रभावित गांवों में टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई का इंतज़ाम करने की अपील की।

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Created On : 8 Oct 2026 9:55 PM IST

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