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ना बिल्डिंग, ना टॉयलेट… राजस्थान के हजारों सरकारी स्कूलों का ये कैसा हाल? आंकड़ों ने खोली पोल

ना बिल्डिंग, ना टॉयलेट… राजस्थान के हजारों सरकारी स्कूलों का ये कैसा हाल? आंकड़ों ने खोली पोल राजस्थान में 611 स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। 2047 स्कूलों में शौचालय और 1049 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है।…

Hindustan के अनुसार22 अगस्त 2026 को 04:54 am बजे
ना बिल्डिंग, ना टॉयलेट… राजस्थान के हजारों सरकारी स्कूलों का ये कैसा हाल? आंकड़ों ने खोली पोल

सौजन्य से:- Hindustan

ना बिल्डिंग, ना टॉयलेट… राजस्थान के हजारों सरकारी स्कूलों का ये कैसा हाल? आंकड़ों ने खोली पोल

राजस्थान में 611 स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। 2047 स्कूलों में शौचालय और 1049 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है। जानें सरकारी आंकड़ों में स्कूलों की पूरी तस्वीर।

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्य सरकार के अनुसार, प्रदेश में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनके पास अपना बिल्डिंग नहीं है। इनमें 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। यह जानकारी शुक्रवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली के सवाल के जवाब में सरकार ने दी। यह आंकड़ा 2025-26 के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के आंकड़ों और समग्र शिक्षा अभियान के तहत उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।

जयपुर में 38 स्कूल बिना भवन के

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान की राजधानी जयपुर में ही 38 स्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा ऐसे स्कूल झालावाड़ के अकलेरा ब्लॉक में हैं, जहां 23 स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है।

इसके बाद:

- खानपुर, झालावाड़: 16 स्कूल

- झालरापाटन, झालावाड़: 11 स्कूल

- बाप, फलोदी: 11 स्कूल

- छोटीसर्वन, बांसवाड़ा: 10 स्कूल

ये प्रदेश के उन पांच क्षेत्रों में शामिल हैं जहां बिना भवन वाले स्कूलों की संख्या सबसे ज्यादा है।

10 बालिका स्कूल भी भवनविहीन

सरकार के मुताबिक, भवन के बिना चल रहे 611 स्कूलों में 10 बालिका स्कूल हैं। इनमें दो-दो स्कूल जयपुर और अलवर में हैं, जबकि बाड़मेर, चूरू, डूंगरपुर, करौली, कोटा और राजसमंद में एक-एक बालिका स्कूल बिना भवन के है।

2,047 स्कूलों में शौचालय नहीं

राजस्थान में अपने भवन वाले 64,484 सरकारी स्कूलों में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी सामने आई है।

इनमें:

- 2047 स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं है।

- 1049 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है।

शौचालय की सुविधा के मामले में बांसवाड़ा सबसे पीछे है। यहां ऐसे 188 स्कूल हैं। इसके बाद डूंगरपुर में 124 और उदयपुर में 98 स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं है।

पीने के पानी की सुविधा नहीं होने वाले स्कूलों की संख्या दौसा में सबसे ज्यादा 96 है। इसके बाद उदयपुर में 70, अलवर में 65, करौली में 60 और बांसवाड़ा में 58 स्कूल हैं।

स्कूलों की हालत पर भी सवाल

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) की एक टीम सरकारी स्कूलों का निरीक्षण कर रही है। शुक्रवार को जयपुर के पास बगरू में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने जा रही CJP टीम पर हमला किए जाने की बात सामने आई थी।

टीम के सह-संयोजक आशुतोष रांका के नेतृत्व में टीम उस स्कूल की स्थिति देखने जा रही थी। आरोप था कि स्कूल एक गौशाला से संचालित हो रहा था। पिछले साल स्कूल की इमारत को असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था और छात्रों को पास की एक अस्थायी जगह पर स्थानांतरित किया गया था।

14 अगस्त को रांका ने अलवर के एक स्कूल का भी दौरा किया था। वहां एक खाली कमरे की छत का हिस्सा गिरने के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।

सरकार ने 450 करोड़ रुपये से भवन बनाने का प्रावधान बताया

सरकार ने अपने जवाब में स्कूलों की मरम्मत और निर्माण के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी दी। इसके मुताबिक, बजट घोषणा के तहत स्कूलों की मरम्मत और नवीनीकरण पर 550 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

इसके अलावा बिना भवन वाले स्कूलों और जर्जर भवनों में चल रहे स्कूलों के लिए नए भवन बनाने के लिए 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने कहा कि राज्य के सरकारी स्कूलों में भवन और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

सरकार के अनुसार, प्राथमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के जर्जर स्कूल भवनों के नए निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के स्तर पर हर साल 2,500 करोड़ रुपये और पांच साल में 12,500 करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे।

इन फंडों के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT), समग्र शिक्षा, राज्य निधि, VB G-RAM-G, सांसद/विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास, SDRF और CSR समेत विभिन्न स्रोतों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष बोले- सरकार के पास योजना नहीं

नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने पिछले साल हुए एक ऑडिट का हवाला देते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 3,768 सरकारी स्कूल पूरी तरह जर्जर हैं और उन्हें इस्तेमाल के लिए असुरक्षित घोषित किया जा चुका है।

उनके मुताबिक, इन स्कूलों को बंद करने या दूसरी जगह शिफ्ट करने से छात्रों के नामांकन में कमी आई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्कूलों के 83,783 कमरे पूरी तरह जर्जर और इस्तेमाल के लिए असुरक्षित हैं।

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