राजस्थान: बच्चे के पासपोर्ट पर पिता का नाम जरूरी नहीं, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
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सौजन्य से:- Amar Ujala
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राजस्थान: बच्चे के पासपोर्ट पर पिता का नाम जरूरी नहीं, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
Mon, 28 Sep 2026 08:37 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Mon, 28 Sep 2026 08:37 PM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने तलाकशुदा माता-पिता के बच्चे के पासपोर्ट को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने कहा कि परिस्थितियों के आधार पर बच्चे के पासपोर्ट पर पिता का नाम अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने पासपोर्ट कार्यालय का आदेश रद्द करते हुए केवल मां के नाम से पासपोर्ट नवीनीकृत करने का निर्देश दिया।
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विस्तार
राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में व्यवस्था दी है कि माता-पिता के तलाक के बाद बच्चे के पासपोर्ट पर पिता का नाम दर्ज करना अनिवार्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि बच्चे की कस्टडी पूरी तरह से मां के पास है और पिता ने बच्चे से सभी रिश्ते खत्म कर लिए हैं, तो केवल मां के नाम के साथ पासपोर्ट जारी या नवीनीकृत किया जाएगा। न्यायमूर्ति मनीष शर्मा की पीठ ने नाबालिग बच्चे की ओर से मां द्वारा दायर याचिका को निस्तारित करते हुए यह निर्णय सुनाया।
उच्च न्यायालय ने पासपोर्ट कार्यालय के 13 मई, 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बच्चे के पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए पिता का नाम बताते हुए एक शपथ पत्र जमा करने के लिए कहा गया था। अदालत ने पासपोर्ट अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर बिना पिता का नाम लिखे, केवल मां के नाम के साथ बच्चे का पासपोर्ट नवीनीकृत करके जारी करे।
पासपोर्ट नवीनीकरण में उत्पन्न हुई बाधा
मामले में याचिकाकर्ता 14 वर्ष का एक नाबालिग बच्चा है। उसके माता-पिता का विवाह 6 जून 2010 को हुआ था तथा बच्चे का जन्म 24 दिसंबर 2011 को हुआ था। बाद में आपसी मतभेदों के चलते दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया। अदालत ने 14 अक्तूबर 2017 को तलाक की डिक्री जारी करते हुए बच्चे का संपूर्ण संरक्षण मां को सौंप दिया था। इसके पश्चात वर्ष 2019 में मां ने एकल अभिभावक के रूप में बच्चे का पहला पासपोर्ट बनवाया था, जिसकी वैधता 7 मई 2024 तक थी और उसमें केवल मां का नाम ही दर्ज किया गया था।
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पासपोर्ट की अवधि समाप्त होने से पूर्व मां ने 5 अप्रैल 2024 को इसके नवीनीकरण के लिए आवेदन जमा किया। हालांकि, पासपोर्ट कार्यालय ने 13 मई 2024 को एक नया आदेश जारी कर दिया और नवीनीकरण के लिए पिता का नाम बताते हुए शपथ पत्र जमा करने की बाध्यता तय कर दी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अर्चित बोहरा ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि पासपोर्ट नियमों के तहत वर्ष 2019 में ही विभाग बिना पिता का नाम दर्ज किए पासपोर्ट जारी कर चुका था, इसलिए नवीनीकरण के समय अचानक पिता का नाम मांगना तर्कसंगत नहीं है।
सरकार और प्रशासन की दलील खारिज
अदालत में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पैरवी करते हुए कहा गया कि पासपोर्ट मैनुअल के नियमों और विदेश मंत्रालय के 28 फरवरी, 2023 के स्पष्टीकरण के तहत विवाहित माता-पिता से जन्मे नाबालिग बच्चे के मामले में दोनों जैविक अभिभावकों के नाम दर्ज कराना अनिवार्य है, चाहे बाद में उनका तलाक ही क्यों न हो गया हो।
सरकारी पक्ष का कहना था कि पिता का नाम केवल तभी हटाया जा सकता है जब वह अज्ञात हो, जन्म के बाद उसका बच्चे से कोई संपर्क न रहा हो या उसने मां-बच्चे से सारे संबंध समाप्त कर लिए हों। इस मामले में पिता की पहचान पूरी तरह स्पष्ट है, अतः नियमों के तहत उसका नाम मांगना नियमानुकूल है।
मशीनी तरीके से नियमों का हवाला गलत
अदालत ने पासपोर्ट अधिकारियों की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों ने इस पूरे मामले में अत्यधिक तकनीकी और कठोर रुख अपनाया है। जब बच्चे की कस्टडी पूरी तरह से मां के पास है और पहले भी बिना पिता के नाम के पासपोर्ट जारी किया जा चुका है, तो 28 फरवरी, 2023 के स्पष्टीकरण को मशीनी तरीके से लागू करके पिता का नाम मांगना अनुचित है। अदालत ने रेखांकित किया कि अधिकारियों का यह रवैया पासपोर्ट नियमों में अपनाए जाने वाले लचीले और मामले के तथ्यों पर आधारित दृष्टिकोण के विपरीत है। अदालत ने पासपोर्ट कार्यालय के पुराने आदेश को निरस्त करते हुए एक महीने में पासपोर्ट जारी करने के निर्देश दिए।
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उच्च न्यायालय ने पासपोर्ट कार्यालय के 13 मई, 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बच्चे के पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए पिता का नाम बताते हुए एक शपथ पत्र जमा करने के लिए कहा गया था। अदालत ने पासपोर्ट अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर बिना पिता का नाम लिखे, केवल मां के नाम के साथ बच्चे का पासपोर्ट नवीनीकृत करके जारी करे।
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पासपोर्ट नवीनीकरण में उत्पन्न हुई बाधा
मामले में याचिकाकर्ता 14 वर्ष का एक नाबालिग बच्चा है। उसके माता-पिता का विवाह 6 जून 2010 को हुआ था तथा बच्चे का जन्म 24 दिसंबर 2011 को हुआ था। बाद में आपसी मतभेदों के चलते दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया। अदालत ने 14 अक्तूबर 2017 को तलाक की डिक्री जारी करते हुए बच्चे का संपूर्ण संरक्षण मां को सौंप दिया था। इसके पश्चात वर्ष 2019 में मां ने एकल अभिभावक के रूप में बच्चे का पहला पासपोर्ट बनवाया था, जिसकी वैधता 7 मई 2024 तक थी और उसमें केवल मां का नाम ही दर्ज किया गया था।
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पासपोर्ट की अवधि समाप्त होने से पूर्व मां ने 5 अप्रैल 2024 को इसके नवीनीकरण के लिए आवेदन जमा किया। हालांकि, पासपोर्ट कार्यालय ने 13 मई 2024 को एक नया आदेश जारी कर दिया और नवीनीकरण के लिए पिता का नाम बताते हुए शपथ पत्र जमा करने की बाध्यता तय कर दी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अर्चित बोहरा ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि पासपोर्ट नियमों के तहत वर्ष 2019 में ही विभाग बिना पिता का नाम दर्ज किए पासपोर्ट जारी कर चुका था, इसलिए नवीनीकरण के समय अचानक पिता का नाम मांगना तर्कसंगत नहीं है।
सरकार और प्रशासन की दलील खारिज
अदालत में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पैरवी करते हुए कहा गया कि पासपोर्ट मैनुअल के नियमों और विदेश मंत्रालय के 28 फरवरी, 2023 के स्पष्टीकरण के तहत विवाहित माता-पिता से जन्मे नाबालिग बच्चे के मामले में दोनों जैविक अभिभावकों के नाम दर्ज कराना अनिवार्य है, चाहे बाद में उनका तलाक ही क्यों न हो गया हो।
सरकारी पक्ष का कहना था कि पिता का नाम केवल तभी हटाया जा सकता है जब वह अज्ञात हो, जन्म के बाद उसका बच्चे से कोई संपर्क न रहा हो या उसने मां-बच्चे से सारे संबंध समाप्त कर लिए हों। इस मामले में पिता की पहचान पूरी तरह स्पष्ट है, अतः नियमों के तहत उसका नाम मांगना नियमानुकूल है।
मशीनी तरीके से नियमों का हवाला गलत
अदालत ने पासपोर्ट अधिकारियों की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों ने इस पूरे मामले में अत्यधिक तकनीकी और कठोर रुख अपनाया है। जब बच्चे की कस्टडी पूरी तरह से मां के पास है और पहले भी बिना पिता के नाम के पासपोर्ट जारी किया जा चुका है, तो 28 फरवरी, 2023 के स्पष्टीकरण को मशीनी तरीके से लागू करके पिता का नाम मांगना अनुचित है। अदालत ने रेखांकित किया कि अधिकारियों का यह रवैया पासपोर्ट नियमों में अपनाए जाने वाले लचीले और मामले के तथ्यों पर आधारित दृष्टिकोण के विपरीत है। अदालत ने पासपोर्ट कार्यालय के पुराने आदेश को निरस्त करते हुए एक महीने में पासपोर्ट जारी करने के निर्देश दिए।
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