राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बॉर्डर के पास मस्जिद-मदरसों पर कार्रवाई की रोक लगाने से इनकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत-पाकिस्तान सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को एक समिति गठित करने का निर्देश दिया है जो प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई के संबंध में अपनी सिफारिश देगी.

सौजन्य से:- ABP News
राजस्थान: बॉर्डर के पास मस्जिद-मदरसों पर कार्रवाई रोकने से किया इनकार, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
Rajasthan High Court: भारत-पाकिस्तान सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित कई मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों के खिलाफ एक्शन पर रोक लगाने से मना कर दिया. कोर्ट ने सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला सुनाया है.
राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत-पाकिस्तान सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित कई मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने से सोमवार (13 जुलाई) को इनकार कर दिया. हालांकि अदालत ने राज्य सरकार को एक समिति गठित करने का निर्देश दिया, जो प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई के संबंध में अपनी सिफारिश देगी.
अदालत ने कहा, "यह मामला धार्मिक भेदभाव का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन का है." इसने यह भी स्पष्ट किया कि प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत महत्वपूर्ण है, लेकिन ऐसे मामलों में इसे इस तरह लागू नहीं किया जा सकता कि संवेदनशील सूचनाओं के खुलासे से राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो.
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जज ने खारिज की दरगाह समिति की याचिकाएं
जज समीर जैन ने पीर मोहम्मद शाह जिलानी दरगाह समिति एवं अन्य की ओर से दायर याचिकाएं खारिज कर दीं जिसमें जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर जिलों में स्थित मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को जारी नोटिसों को चुनौती दी गई थी.
नोटिसों में आरोप लगाया गया था कि इन संस्थानों ने वैधानिक अनुमति के बिना सरकारी अथवा कृषि भूमि पर स्थायी निर्माण किए हैं और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में अवैध रूप से भूमि पर कब्जा कर रखा है.
अधिकारियों ने सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
पीटीआई के अनुसारा अधिकारियों ने खुफिया सूचनाओं का हवाला देते हुए यह भी कहा था कि कुछ निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय हो सकते हैं. फिलहाल कोर्ट द्वारा इस कार्रवाई पर रोक लगाने से मना कर दिया गया है. कोर्ट ने अपने फैसले में राष्ट्रीय सुरक्षा और नियमों के पालन का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला धार्मिक भेदभाव से नहीं बल्कि सुरक्षा को देखते हुए लिया गया है.
वहीं मामले में सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि बॉर्डर के 50 किलोमीटर के संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना किसी वैध परमीशन के निर्माण किया गया है. खूफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान से तस्करी और घुसपैठ का खतरा है. इसलिए इन अवैध ढांचों को हटाना चाहिए. जिस पर कोर्ट ने सुरक्षा के मद्देनजर रोक लगाने से इनकार कर दिया.
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