राजस्थान में मानसून का दौर सुस्त: क्या है मौसम विभाग की चेतावनी और क्यों परेशान हैं किसान?
राजस्थान में इस बार मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ने से आमजन और किसान बेहद परेशान हैं। मौसम विभाग की ओर से बार-बार यलो अलर्ट जारी किए जाने के बावजूद बादलों की बेरुखी बनी हुई है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Rajasthan Weather Update: राजस्थान में मानसून का दौर ठंडा पड़ते ही वापस कई जिलों में गर्मी सताने लगी है। हालांकि मौसम विभाग की ओर से एक हफ्ते तक शुष्क मौसम की चेतावनी के बीच जारी हल्की बारिश का येलो अलर्ट भी असरदार नहीं रहा। आगे जानिए अब वापस कब सक्रीय होगा मानसून और झमाझम बारिश से शहर भीगेंगे।
जयपुर: राजस्थान में इस बार मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ने से आमजन और किसान बेहद परेशान हैं। मौसम विभाग की ओर से बार-बार यलो अलर्ट जारी किए जाने के बावजूद बादलों की बेरुखी बनी हुई है। जयपुर मौसम केन्द्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल मानसून पर अल-नीनो का प्रभाव साफ तौर पर हावी दिख रहा है। अब तक मानसून से जुड़े जो भी सिस्टम सक्रिय हुए हैं, वे अरब सागर या बंगाल की खाड़ी से पर्याप्त नमी लेकर नहीं आ पाए। वायुमंडल में नमी की इसी कमी के चलते सिस्टम बनते ही कमजोर पड़ रहे हैं और प्रदेश में अपेक्षित बारिश नहीं हो पा रही है।
हाड़ौती से रूठा मानसून, बारिश का इंतजार जारी
मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, कोटा और हाड़ौती संभाग में मानसून ने बीते 2 जुलाई को मध्य प्रदेश की ओर से झालावाड़ के रास्ते प्रवेश किया था। उस समय उम्मीद जताई जा रही थी कि क्षेत्र में अच्छी बारिश होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मानसून कोटा में मजबूत होने के बजाय भीलवाड़ा होते हुए उदयपुर संभाग की ओर खिसक गया। इस कारण हाड़ौती क्षेत्र में व्यापक और भारी बारिश की उम्मीदें पूरी तरह टूट गईं और कोटा शहर समेत आसपास के इलाके सूखे रह गए।
13 से 15 जुलाई: जानिए कहां-कहां होगी हल्की बारिश और बूंदाबांदी
मौसम विभाग ने आगामी पांच से छह दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बने रहने की संभावना जताई है। हालांकि, स्थानीय सिस्टम के प्रभाव से कुछ इलाकों में मामूली राहत मिल सकती है।
जयपुर, भरतपुर और शेखावाटी क्षेत्र: इन इलाकों में 13 से 15 जुलाई के बीच कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है।
बीकानेर संभाग और सीमावर्ती जिले: 14 और 15 जुलाई को बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू जिलों में कहीं-कहीं सिर्फ बूंदाबांदी या हल्की बौछारें पड़ने के आसार हैं।
इस दौरान इन क्षेत्रों में हल्के बादल जरूर छा सकते हैं, लेकिन किसानों और आमजन को जैसी जोरदार और व्यापक बारिश का इंतजार है, उसकी संभावना फिलहाल बेहद कम है।
खरीफ फसलों पर गहराया संकट, नहर और ट्यूबवेल का सहारा
मानसून की इस लंबी खींचतान और बेरुखी के कारण राजस्थान में खरीफ की फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से फसलों की ग्रोथ रुकने का खतरा पैदा हो गया है। हालात यह हैं कि किसान अब अपनी फसलों को सूखने से बचाने के लिए महंगे डीजल, ट्यूबवेल और नहरों के पानी का सहारा लेने को मजबूर हैं। कृषि विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि यदि आगामी कुछ दिनों में अच्छी और व्यापक मानसूनी बारिश नहीं होती है, तो खरीफ फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर इसका सीधा और बेहद प्रतिकूल असर पड़ेगा। फिलहाल, प्रदेश के अन्नदाता की निगाहें आसमान पर टिकी हैं कि कब मानसून का अगला दौर सक्रिय हो और खेतों को जीवनदान मिले।
प्रदेश के प्रमुख जिलों का न्यूनतम और अधिकतम तापमान
लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।
राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।
पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत
पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें
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