राजस्थान: शेखावाटी की 14 ऐतिहासिक हवेलियां यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल, विश्व धरोहर बनने की बढ़ी उम्मीद
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सौजन्य से:- Amar Ujala
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राजस्थान: शेखावाटी की 14 ऐतिहासिक हवेलियां यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल, विश्व धरोहर बनने की बढ़ी उम्मीद
Sat, 05 Sep 2026 11:02 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शेखावाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शेखावाटी
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sat, 05 Sep 2026 11:02 PM IST
सार
Rajasthan News: शेखावाटी अंचल की अलसीसर, मंडावा, नवलगढ़, झुंझुनू समेत 14 क्षेत्रों की ऐतिहासिक हवेलियां यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल की गई हैं। इससे इन हवेलियों के भविष्य में विश्व धरोहर सूची में शामिल होने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
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विस्तार
राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और वास्तुकला को अंतरराष्ट्रीय पटल पर बड़ी पहचान मिलने जा रही है। राज्य के शेखावाटी अंचल की 14 ऐतिहासिक हवेलियों को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय से इन प्राचीन इमारतों को भविष्य में विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलने की संभावना बढ़ गई है।
इन 14 क्षेत्रों की हवेलियों को मिली जगह
राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बताया कि शेखावाटी अंचल के अलसीसर, बिसाऊ, चिड़ावा, चूरू, डूंडलोद, फतेहपुर, झुंझुनू, खेतड़ी, लक्ष्मणगढ़, मंडावा, महांसर, नवलगढ़, रामगढ़ और सीकर क्षेत्र की ऐतिहासिक हवेलियों को इस सूची में जगह दी गई है। ये सभी हवेलियां अपनी विशिष्ट निर्माण शैली, भव्य प्रवेश द्वारों, नक्काशीदार झरोखों और दीवारों पर बने अद्भुत रंगीन भित्तिचित्रों के लिए देश और विदेश में जानी जाती हैं।
दीवारों पर दर्ज है सदियों पुराना इतिहास
शेखावाटी की हवेलियों की मुख्य विशेषता उनकी छतों और दीवारों पर उकेरी गई भित्तिचित्र कला है। इन कलाकृतियों में धार्मिक एवं पौराणिक प्रसंगों के साथ-साथ उस दौर के सामाजिक जीवन, राजसी वैभव और समय के साथ आए बदलावों का बेहद सूक्ष्म और सुंदर चित्रण देखने को मिलता है।
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पारंपरिक चित्रों के अतिरिक्त कलाकारों ने उस दौर में सामने आने वाली नई आधुनिक वस्तुओं और घटनाओं को भी अपनी चित्रकारी में उकेरा था। यही अनूठी कलात्मक शैली शेखावाटी को विश्व के अन्य विरासत क्षेत्रों से अलग पहचान प्रदान करती है।
अस्थायी सूची के बाद अब संरक्षण और दस्तावेजीकरण की तैयारी
यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना किसी भी स्थान के लिए मुख्य विश्व धरोहर सूची की ओर बढ़ने की महत्वपूर्ण शुरुआत है। अब हवेलियों के संरक्षण, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और दीर्घकालिक प्रबंधन की प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। इन तैयारियों के बाद ही अगले चरण के लिए औपचारिक नामांकन भेजा जाएगा। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के अनुसार, सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक इमारतों और धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।
यह भी पढ़ें: कांग्रेस का फेरबदल: पंजाब से हटे भूपेश बघेल, पार्टी ने अब सचिन पायलट को बनाया नया प्रभारी; सौंपी जिम्मेदारी
अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ी तो पर्यटन और रोजगार को मिलेगा सहारा
हवेलियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से शेखावाटी अंचल में पर्यटन गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस प्रक्रिया के आगे बढ़ने से ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के साथ स्थानीय हस्तकला और रोजगार के नए अवसरों का सृजन हो सकता है। यदि आने वाले समय में इन हवेलियों को विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिल जाता है, तो शेखावाटी अंतरराष्ट्रीय विरासत पर्यटन केंद्र के रूप में राजस्थान की पहचान को और मजबूत कर सकता है।
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इन 14 क्षेत्रों की हवेलियों को मिली जगह
राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बताया कि शेखावाटी अंचल के अलसीसर, बिसाऊ, चिड़ावा, चूरू, डूंडलोद, फतेहपुर, झुंझुनू, खेतड़ी, लक्ष्मणगढ़, मंडावा, महांसर, नवलगढ़, रामगढ़ और सीकर क्षेत्र की ऐतिहासिक हवेलियों को इस सूची में जगह दी गई है। ये सभी हवेलियां अपनी विशिष्ट निर्माण शैली, भव्य प्रवेश द्वारों, नक्काशीदार झरोखों और दीवारों पर बने अद्भुत रंगीन भित्तिचित्रों के लिए देश और विदेश में जानी जाती हैं।
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दीवारों पर दर्ज है सदियों पुराना इतिहास
शेखावाटी की हवेलियों की मुख्य विशेषता उनकी छतों और दीवारों पर उकेरी गई भित्तिचित्र कला है। इन कलाकृतियों में धार्मिक एवं पौराणिक प्रसंगों के साथ-साथ उस दौर के सामाजिक जीवन, राजसी वैभव और समय के साथ आए बदलावों का बेहद सूक्ष्म और सुंदर चित्रण देखने को मिलता है।
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पारंपरिक चित्रों के अतिरिक्त कलाकारों ने उस दौर में सामने आने वाली नई आधुनिक वस्तुओं और घटनाओं को भी अपनी चित्रकारी में उकेरा था। यही अनूठी कलात्मक शैली शेखावाटी को विश्व के अन्य विरासत क्षेत्रों से अलग पहचान प्रदान करती है।
अस्थायी सूची के बाद अब संरक्षण और दस्तावेजीकरण की तैयारी
यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना किसी भी स्थान के लिए मुख्य विश्व धरोहर सूची की ओर बढ़ने की महत्वपूर्ण शुरुआत है। अब हवेलियों के संरक्षण, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और दीर्घकालिक प्रबंधन की प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। इन तैयारियों के बाद ही अगले चरण के लिए औपचारिक नामांकन भेजा जाएगा। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के अनुसार, सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक इमारतों और धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।
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अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ी तो पर्यटन और रोजगार को मिलेगा सहारा
हवेलियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से शेखावाटी अंचल में पर्यटन गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस प्रक्रिया के आगे बढ़ने से ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के साथ स्थानीय हस्तकला और रोजगार के नए अवसरों का सृजन हो सकता है। यदि आने वाले समय में इन हवेलियों को विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिल जाता है, तो शेखावाटी अंतरराष्ट्रीय विरासत पर्यटन केंद्र के रूप में राजस्थान की पहचान को और मजबूत कर सकता है।
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