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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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जयपुर ने दी दिशा: 19 की उम्र में कोलकाता से गुलाबी नगरी आए गोपीनाथ बने भारतीय दर्शन के युगपुरुष
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जीवनयात्रा; प्राच्य और अर्वाचीन विद्याओं के मनीषी गोपीनाथ कविराज का जन्म 7 सितम्बर 1887 को धामराई (बांग्लादेश) में हुआ। मार्मिक संयोग था कि पिता वैकुंठनाथ के निधन के 5 माह बाद उन्हें माता सुखदासुंदरी ने जन्म दिया। 12 जून 1976 को वे वाराणसी में महायात्रा पर चले गए।
जयपुर पर 20वीं शताब्दी के शुरू में ‘बांधव’’ पत्रिका में धर्मानंद महाभारती का छपा लेख पंडित गोपीनाथ कविराज के हाथ लगा, जिसमें जयपुर के नगर-नियोजक विद्याधर चक्रवर्ती और प्रधानमंत्री संसारचंद्र सेन का उल्लेख था। इस लेख ने कविराज के मन में जयपुर में पढ़ने की तीव्र अभिलाषा जगाई। फलत: कोलकाता से जुलाई 1906 में 19 वर्ष की आयु में वे जयपुर आ पहुंचे। जयपुर में उन्होंने भारतीय धर्म, दर्शन, पुरातत्त्व तथा यूरोप के प्राचीन और मध्ययुगीन इतिहास का अध्ययन किया। फ्रेंच, स्पेनिश, इटालियन, जर्मन, रूसी और संस्कृत साहित्य पर उनकी समान दृष्टि थी। उन्होंने बौद्ध दर्शन और वेदांत का गंभीर अनुशीलन किया।
संस्कृत विद्वान शास्त्री कोसलेंद्रदास के अनुसार हवामहल के निकट बने महाराजा कॉलेज में उनकी भेंट प्राचार्य संजीवन गांगुली और उप-प्राचार्य मेघनाथ भट्टाचार्य से हुई। जयपुर के प्रधानमंत्री संसारचंद्र सेन ने उनके रहने की व्यवस्था की। कविराज ने प्रो. नवकृष्ण राय से अंग्रेजी का अध्ययन किया। विलक्षण प्रतिभाशाली होने से उन्हें 15 रुपए प्रतिमाह छात्रवृत्ति मिली। वाराणसी संस्कृत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर्थर वेनिस द्वारा अंग्रेजी में अनूदित वेदान्तमुक्तावली और वेदान्तपरिभाषा का अध्ययन उनके लिए आनंद का स्रोत बना। जयपुर में वे कालजयी कहानी ‘उसने कहा था’ के लेखक चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ से मिले। गुलेरी ने उनका परिचय मेवाड़ के विख्यात इतिहासकार गौरीशंकर हीराचंद ओझा से भी कराया।
कविराज राजस्थान में वैष्णव धर्म के विकास और चैतन्य संप्रदाय की परंपराओं से खूब परिचित थे। श्रीगोविंददेवजी मंदिर इसी परंपरा का प्रमुख केंद्र है, जहां बंगाली वैष्णव पूजा करते हैं। ऐतिहासिक खोज में वे आमेर व गलता जाते रहते थे। कविराज मित्रों से अल्बर्ट म्यूजियम के प्रांगण में बंग-भंग आंदोलन पर चर्चा किया करते थे। दिसंबर 1906 में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में हुए कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में वे राजस्थान से सदस्य बने।
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