ओबीसी में जाट सबसे ताकतवर, 22 हजार परिवार राजनीति में: गुर्जर दूसरे नंबर पर, सपेरा जाति की कोई हिस्सेदारी नहीं; पहली बार राजस्थान की 92 जातियों की स्थिति - Rajasthan News
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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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भास्कर एक्सक्लूसिवओबीसी में जाट सबसे ताकतवर, 22 हजार परिवार राजनीति में:गुर्जर दूसरे नंबर पर, सपेरा जाति की कोई हिस्सेदारी नहीं; पहली बार राजस्थान की 92 जातियों की स्थिति
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अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की 92 जातियों में 17 से 20 ही ऐसी हैं, जिनका राजनीतिक भागीदारी, सरकारी नौकरी से लेकर खेती और दूसरे संसाधनों पर पूरा दबदबा है।
18 जातियां ऐसी हैं जिनके 100 लोग भी सरकारी सेवा में नहीं हैं। सपेरा जाति का एक भी व्यक्ति न राजनीति में भागीदार है न सरकारी नौकरी में है।
पंचायतीराज और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। सबसे पहले भास्कर में पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
रिपोर्ट के अनुसार ओबीसी की 92 जातियों में केवल 17 जातियां ही ऐसी हैं जिनके 2000 से ज्यादा परिवारों को राजनीतिक भागीदारी मिली है। 22 जातियां ऐसी हैं जिनके 100 परिवारों को भी राजनीति में भागीदारी नहीं मिली है।
ओबीसी में राजनीतिक भागीदारी वाले परिवारों की कुल संख्या के मामले में जाट टॉप पर हैं। गुर्जर राजनीतिक भागीदारी के मामले में दूसरे और माली, सैनी तीसरे नंबर पर हैं।
सबसे पहले राजनीति में किस जाति का कितना दबदबा…
रिपोर्ट से निकाय, पंचायतीराज संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण तय होगा
ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की इस रिपोर्ट के आधार पर शहरी निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं में ओबीसी का आरक्षण तय होगा।
ओबीसी के लिए कौनसे निकाय में निकाय प्रमुख के पद और वार्ड आरक्षित होंगे, यह सरकार इस रिपोर्ट से तय करेगी। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में राजनीतिक भागीदारी में पिछड़ी जातियों को आगे लाने के लिए सिफारिश की है।
सरकारी नौकरी में किस जाति के सबसे ज्यादा लोग…
किस जाति के सबसे ज्यादा बीपीएल और क्या है साक्षरता दर…
रिपोर्ट में एमबीसी की गुर्जर सहित 5 जातियों को भी ओबीसी के साथ गिना
आयोग की रिपोर्ट में एमबीसी की गुर्जर सहित 5 जातियों को भी ओबीसी के साथ गिना गया है। गुर्जर,बंजारा/ बाल्दिया/ लबाना,गाड़िया लुहार, रेबारी/रायका/ देवासी, गडरिया (गाडरी) को ओबीसी के साथ गिना गया है।
ओबीसी आयोग अध्यक्ष बोले— हमने बंद कमरों में बैठकर रिपोर्ट नहीं बनाई
ओबीसी आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज एमएल भाटी ने रिपोर्ट सौंपने के बाद कहा- हमने बंद कमरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार नहीं की। ओबीसी वर्ग से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए हैं और उम्मीद है कि इनका लाभ संबंधित वर्ग को मिलेगा। हमने 19 पॉइंट पर सर्वे किया।
ओबीसी की जातियों के सामाजिक, आर्थिक, राजनीकि पिछड़ेपन का भी आकलन करके ब्योरा दिया है। कौन-से वार्ड आरक्षित किए जाएंगे, इसका फैसला सरकार और प्रशासन करेंगे।
नेता प्रतिपक्ष बोले- सरकार तत्काल सार्वजनिक करे ओबीसी आयोग की रिपोर्ट
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का कहना है कि राजस्थान सरकार को ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक करनी चाहिए। उस रिपोर्ट में आखिर क्या है, यह जानने का जनता को पूरा हक है। पारदर्शिता से भागना भाजपा सरकार की आदत बन चुकी है।
एक्सपर्ट बोले- नई बहस छिड़ेगी
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक महेश शर्मा के मुताबिक क्वांटिफाइड डेटा के सर्वे से ओबीसी की जातियों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक तस्वीर सामने आ गई है। इससे यह साबित हो गया है कि अब भी ओबीसी की बहुत सी जातियों में गरीबी और पिछड़ापन हावी है, उनकी राजनीतिक और सरकारी नौकरियों में भागीदारी न के बराबर है। इसे लेकर नई बहस छिड़ेगी।
वंचित जातियों के नेताओं को टिकट की मांग तेज होगी
सरकार और राजनीतिक पार्टियों के लिए ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्च आयोग की रिपोर्ट के गहरे सियासी मायने हैं। आयोग के सर्वे में सामने आए डेटा और जमीनी हालत के बाद सरकार भी नया टास्क हाथ में ले सकती है।
वंचित जातियों को राजनीतिक भागीदारी और सरकारी नौकिरियों में आगे लाने के लिए नए सिरे से प्लान बनाने पर जोर दिया जा सकता है। राजनीतिक दलों में भी वंचित जातियों से टिकट ज्यादा देने पर विचार होगा, वंचित जातियों के नेता इसकी मांग भी उठाएंगे।
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ओबीसी आयोग की रिपोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…
ओबीसी की 11 जातियों का ही राजनीति में दबदबा:आयोग की रिपोर्ट में खुलासा; अध्यक्ष बोले- अब 92 जातियों को फोकस करके रिपोर्ट बनाई
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