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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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पूर्व सैनिकों का आरोप- पुलिस ने हमें भू-माफिया कहा:22 साल पहले खरीदे प्लॉट पर बाउंड्री बनाने नहीं दी; SHO ने कहा- दोनों पक्षों से रिकॉर्ड मांगे
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जयपुर में 22 साल पहले प्लॉट खरीदने वाले 44 लोगों और किसान के बीच विवाद हो गया है। प्लॉटधारक 44 लोगों में 20 पूर्व सैनिक भी शामिल हैं। इन प्लॉटधारकों ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने और बात नहीं सुनने का आरोप लगाया है। साथ ही भू-माफिया कहकर अपमान करने का आरोप भी लगाया है।
वहीं, पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही उचित कार्रवाई होगी। मामला जयपुर के खोरा बिसल थाना क्षेत्र के जिलाई गांव स्थित राहुल सिटी-बी आवासीय योजना का है।
क्या है मामला
पीड़ितों के अनुसार करीब 22 साल पहले बुनियादी विकास गृह निर्माण सहकारी समिति की ‘राहुल सिटी-बी’ योजना में लगभग 800 वर्गगज के हिसाब से आवासीय भूखंड खरीदे थे। यह जमीन मूल किसान स्व. छितरमल गुर्जर ने बुनियादी गृह निर्माण सहकारी समिति को करीब छह लाख रुपये में बेची थी। इसकी भुगतान रसीदें और रिकॉर्ड आज भी समिति के पास सुरक्षित हैं। आरोप है कि उस समय छितरमल के बेटों रूड़ाराम और गोपाल ने भुगतान राशि हासिल की थी।
22 साल बाद निर्माण शुरू किया तो रुकवा दिया काम
पीड़ितों का कहना है कि सालों तक जमीन खाली रही। 2 मई को सभी प्लॉटधारक अपने-अपने भूखंडों पर बाउंड्री वॉल बनाने पहुंचे तो रूड़ाराम गुर्जर ने पुलिस (PCR) को बुला लिया। पुलिस मौके पर पहुंची और निर्माण कार्य रुकवा दिया। इसके बाद सभी 44 प्लॉटधारकों के नाम दर्ज कर उन्हें खोरा बिसल थाने बुलाया गया।
'एक्स सर्विसमैन होने के बावजूद हमें भू-माफिया कहा'
प्लॉटधारकों का आरोप है कि थाने पहुंचने पर एसएचओ सुरेंद्र चौधरी ने उन्हें यह कहते हुए फटकारा कि इतने साल कहां थे, तुम लोग खुद भू-माफिया हो। किसान की जमीन पर कब्जा करने आए हो। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने मौके पर और थाने में अपने सभी पट्टे, सोसायटी के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज पेश करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें देखने तक की जहमत नहीं उठाई।
25 जुलाई को फिर रुका निर्माण
प्लॉटधारकों ने बताया- 25 जुलाई को दोबारा बाउंड्री वॉल निर्माण शुरू करने पहुंचे तो फिर पुलिस पहुंच गई। काम रुकवा दिया। उन्हें दोबारा थाने बुलाया गया। इस बार पुलिस ने सोसायटी से पूरे रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे।
सोसायटी के वकील ने पेश किए दस्तावेज
पीड़ितों के अनुसार इसके बाद बुनियादी गृह निर्माण सहकारी समिति के वकील थाने पहुंचे। समिति से जुड़े सभी दस्तावेज, एग्रीमेंट, भुगतान रसीदें और रिकॉर्ड पुलिस को सौंप दिए। दूसरी तरफ रूड़ाराम बिना किसी ठोस दस्तावेज के केवल अपनी बात रख रहा है। फिर भी पुलिस उसी के पक्ष में झुकी हुई नजर आ रही है।
पूर्व सैनिकों ने बताई आपबीती…
घर बनाने पहुंचा तो काम रुकवा दिया
हवलदार (सेवानिवृत्त) लक्ष्मण सिंह राठौड़ बोले- मैंने सेना में नौकरी के दौरान अपनी पत्नी ओम कंवर के नाम प्लॉट खरीदा था। साल 1997 से 2017 तक सेना में सेवा देने के बाद जब रिटायर्ड हुआ तो मकान बनाने पहुंचे। दूसरे पक्ष ने निर्माण रुकवा दिया। थाने में पुलिस ने पट्टे देखने के बजाय भू-माफिया कह दिया।
आनंद सिंह शेखावत बोले- पिता की जीवनभर की कमाई लगी
आनंद सिंह शेखावत ने बताया- मेरे पिता मदन सिंह शेखावत राजस्थान पुलिस से एसआई पद से रिटायर्ड हुए थे। उन्होंने परिवार के भविष्य के लिए अपनी जमा पूंजी से यह प्लॉट खरीदा था। सालों तक वे प्लॉट की देखभाल करते रहे। जब निर्माण शुरू करने पहुंचे तो पुलिस ने काम रुकवा दिया। तीन महीने से लगातार थाने और सोसायटी के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन पुलिस ने आज तक दस्तावेज तक नहीं देखे।
पुलिस पूर्व सैनिकों को भूमाफिया बता रही
सुबेदार (सेवानिवृत्त) भंवर सिंह बोले- 22 साल पहले सोसायटी से प्लॉट खरीदा था। अब किसान का बेटा रूड़ाराम जमीन बेचने से इनकार कर रहा है। पुलिस भी हमारा साथ नहीं दे रही। पूर्व सैनिक होने के बावजूद पुलिस उन्हें ही भूमाफिया बता रही है।
सेवानिवृत्त सैनिक श्याम सिंह बोले- अपनी पूरी जमा पूंजी से पत्नी के नाम प्लॉट खरीदा था। करीब तीन महीने पहले जब निर्माण कराने पहुंचे तो पुलिस ने काम रुकवा दिया। सोसायटी की ओर से सभी दस्तावेज देने के बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही।
क्या है किसान के परिवार का दावा?
पुलिस के अनुसार किसान के बेटे रूड़ाराम गुर्जर का कहना है कि उसके पिता छितरमल गुर्जर ने केवल साढ़े पांच बीघा जमीन का एग्रीमेंट किया था। बाद में साढ़े तीन बीघा जमीन की किसी अन्य के नाम सीधे रजिस्ट्री कर दी गई, जबकि करीब दो बीघा जमीन उनके परिवार के पास बची हुई है।
रूड़ाराम का यह भी कहना है कि सोसायटी द्वारा पेश किए गए कुछ वाउचरों पर मौजूद हस्ताक्षर उसके नहीं हैं।
SHO ने कहा- दोनों पक्षों से रिकॉर्ड मांगे
खोरा बिसल थानाधिकारी सुरेंद्र चौधरी ने बताया- मामला जमीन विवाद से जुड़ा है। दोनों पक्षों से दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे गए हैं। सोसायटी और किसान दोनों अपने-अपने दावे कर रहे हैं। दस्तावेजों, एग्रीमेंट, भुगतान रिकॉर्ड और हस्ताक्षरों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डीसीपी बोले- निष्पक्ष जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी
डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण का मामले को लेकर कहना है कि मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।
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