राजस्थान में 3500 किमी की यात्रा में जानी कला-संस्कृति और विरासत, कलाओं को बचाने का किया आह्वान
राजस्थान में 3500 किमी की यात्रा में जानी कला-संस्कृति और विरासत, कलाओं को बचाने का किया आह्वान प्रदेश के 45 शहरों की यात्रा में लोगों से मुलाकात करके वहां के खान-पान, कला-संस्कृति और जीवन शैली को जाना. Published : Septe…

सौजन्य से:- ETV Bharat
राजस्थान में 3500 किमी की यात्रा में जानी कला-संस्कृति और विरासत, कलाओं को बचाने का किया आह्वान
प्रदेश के 45 शहरों की यात्रा में लोगों से मुलाकात करके वहां के खान-पान, कला-संस्कृति और जीवन शैली को जाना.
Published : September 23, 2026 at 8:53 PM IST
जयपुर: राजस्थान की कला-संस्कृति, विरासत, खान-पान और लोगों की अनकही कहानियां को करीब से जानने के लिए 'स्टोरीज ऑफ इंडियन सिटीज' के राजस्थान चैप्टर ने 3500 किलोमीटर की यात्रा की. 'कार्टिस्ट' की ओर से आयोजित 20 दिवसीय यात्रा में राजस्थान के करीब 45 से ज्यादा स्थानों पर पहुंचकर वहां की कला–संस्कृति के साथ ही लोगों की जीवन शैली को करीब से जाना. यात्रा के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में पारंपरिक भोजन और स्थानीय स्वाद को भी डॉक्यूमेंट किया गया.
'कलाओं को प्रोत्साहित करे आमजन': कार्टिस्ट के संस्थापक हिमांशु जांगिड़ ने यात्रा के अनुभव साझा करते हुए बताया कि हमने 4 सितंबर से राजस्थान की यात्रा शुरू की थी. यात्रा के दौरान प्रदेश के 45 शहरों में जाकर लोगों से मुलाकात करके वहां के खान-पान, कला-संस्कृति और जीवन शैली को जाना. इसमें आमजन के साथ ही आर्टिस्ट और रॉयल फैमिली से जुड़े लोग भी शामिल थे. यात्रा के दौरान कई प्रकार के अनुभव देखने को मिले. एक जगह हमारी गाड़ी रेगिस्तान में फंस गई थी, जिसे ट्रैक्टर से खींचकर निकालना पड़ा. राजस्थान की यात्रा का 3500 किलोमीटर सफर काफी रोमांचक रहा. राजस्थान में कई आर्ट और कलाएं ऐसी है, जो राजस्थान की पहचान है, लेकिन उन कलाओं को नई जनरेशन फॉलो नहीं कर रही है. ऐसी कलाओं को आमजन के साथ ही सरकार भी प्रोत्साहित करे.
पढ़ें: भट्टी की तपिश में आखिरी सांसें ले रही जयपुर की सदियों पुरानी परंपरा, जानिए क्या है 'कलई' कला
ये रहा यात्रा का उद्देश्य: 4 सितंबर को जयपुर से शुरू हुई यात्रा का बुधवार 23 सितंबर को जयपुर के अल्बर्ट हॉल के बाहर समापन हुआ. यह यात्रा मंडावा, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, जवाई, रणकपुर, नाथद्वारा, उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बूंदी, कोटा, भरतपुर, डीग और अलवर समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से होकर वापस जयपुर पहुंची. यात्रा का उद्देश्य प्रसिद्ध स्मारकों और पर्यटन स्थल तक सीमित नहीं था, बल्कि स्थानीय लोगों, कारीगरों, कलाकारों, पारंपरिक व्यवसाय, लोक कलाओं, हस्तशिल्प, खानपान और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कहानियों को भी सामने लाना रहा.
20 दिनों में हासिल किया ये अनुभव: हिमांशु जांगिड़ ने बताया कि 20 दिनों में राजस्थान को अलग-अलग रूपों में देखने और लोगों से मिलने का अवसर मिला. कुछ कहानियां केवल डॉक्यूमेंट करने के लिए नहीं होती, बल्कि लंबे समय तक दिल पर अपनी छाप छोड़ जाती हैं. बांसवाड़ा के आदिवासी क्षेत्र में खेमराज और उनके परिवार से मुलाकात और बाड़मेर के दूरदराज क्षेत्र में पारंपरिक पैचवर्क और स्थानीय कढ़ाई से जुड़े कानाराम की कहानी यात्रा के विशेष अनुभव में शामिल रही है.
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

राजस्थान में रोटेशन को लेकर तीन पंचायतों में सरपंच की आरक्षण लॉटरी हाईकोर्ट से रद्द, सात दिन में फिर होगी कवायद

Rajasthan CM to discuss 100-day action plan with new civic body heads

जयपुर CM भजनलाल शर्मा कल नवनिर्वाचित नगरीय निकाय प्रमुखों से करेंगे संवाद, कहा- विकसित शहरों से ही विकसित राजस्थान का संकल्प होगा साकार


