डांगावास हत्याकांड: सभी 40 आरोपियों के बरी होने पर भड़का दलित समाज, जयपुर में दिया धरना
डांगावास हत्याकांड: सभी 40 आरोपियों के बरी होने पर भड़का दलित समाज, जयपुर में दिया धरना नागौर के डांगावास हत्याकांड में आरोपियों के बरी होने के विरोध में दलित संगठनों ने जयपुर में धरना दिया. Published : August 12, 2026 a…

सौजन्य से:- ETV Bharat
डांगावास हत्याकांड: सभी 40 आरोपियों के बरी होने पर भड़का दलित समाज, जयपुर में दिया धरना
नागौर के डांगावास हत्याकांड में आरोपियों के बरी होने के विरोध में दलित संगठनों ने जयपुर में धरना दिया.
Published : August 12, 2026 at 2:38 PM IST
जयपुर: नागौर जिले के चर्चित डांगावास हत्याकांड में 40 आरोपियों के बरी होने के बाद दलित समाज का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. मामले में न्याय की मांग को लेकर बुधवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर राजस्थान अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी के बैनर तले दलित संगठनों ने सांकेतिक धरना दिया. धरने में कई जनप्रतिनिधियों के साथ डांगावास कांड में मारे गए लोगों के परिजन भी शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने सरकार और सीबीआई की जांच एवं अभियोजन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई की मांग की.
11 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया: धरने में वक्ताओं ने कहा कि डांगावास जैसी गंभीर घटना में छह लोगों की जान चली गई, कई लोग घायल हुए और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार के आरोप लगे, लेकिन करीब 11 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद सभी 40 आरोपियों का बरी होना पीड़ित परिवारों के लिए बेहद पीड़ादायक है. दलित संगठनों ने सरकार से मामले में तत्काल अपील दायर करने और मजबूत कानूनी पैरवी सुनिश्चित करने की मांग की.
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6 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन?: अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी सत्यवीर सिंह ने मडिया से बातचीत में कहा कि आखिर छह लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? सरकार और न्यायालय के सामने यह सवाल खड़ा है कि जिन लोगों की मौत हुई, उनके मामले में जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो सकी. सत्यवीर सिंह ने कहा कि यह अभी सांकेतिक धरना है. इसके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी दी जा रही है कि दलित समाज पर होने वाले अत्याचार और उसके बाद न्याय की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने और छह लोगों की मौत के बावजूद यदि आरोपी बरी हो जाते हैं तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए.
CBI की जांच पर भी उठाए सवाल: पूर्व आईपीएस सत्यवीर सिंह ने कहा कि वह सीबीआई जैसी देश की प्रीमियम जांच एजेंसी का सम्मान करते हैं और स्वयं आईपीएस अधिकारी के रूप में सेवा दे चुके हैं. उन्होंने कहा कि यदि जांच अधिकारियों की ओर से जांच में लापरवाही हुई है तो उसकी भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई और पुलिस ने आरोपियों की पहचान की, लेकिन मुकदमे को मजबूत बनाने के लिए जरूरी साक्ष्यों को उचित तरीके से अदालत के सामने रखने में कमी रह गई. उन्होंने कहा कि मुकदमे में जो कमियां रह गई हैं, उन्हें अपील के दौरान मजबूती से रखा जाना चाहिए.
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स्थायी और प्रभावी मैकेनिज्म हो विकसित: सत्यवीर सिंह ने सरकार से मांग की कि मामले में अच्छे से अच्छे वकील को नियुक्त कर प्रभावी पैरवी कराई जाए, ताकि दोषियों को सजा दिलाने की पूरी कोशिश हो सके. उन्होंने कहा कि इस मामले में ऐसा न्याय होना चाहिए जो भविष्य के लिए मिसाल बने. सत्यवीर सिंह ने कहा कि सरकार को केवल डांगावास प्रकरण में ही नहीं, बल्कि दलितों पर आए दिन होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी मैकेनिज्म विकसित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि समाज के बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए शिक्षा को मजबूत करना जरूरी है.
बैकलॉग पद भरने और निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग: धरने के दौरान दलित समाज से जुड़ी कई अन्य मांगें भी उठाई गईं. वक्ताओं ने सरकारी नौकरियों में दलित समाज के लंबित बैकलॉग पदों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की. इसके साथ ही निजी क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था लागू करने और ठेका पद्धति को समाप्त करने की मांग भी उठाई गई. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकारी नौकरियों में रिक्त पड़े आरक्षित पदों को लंबे समय तक खाली रखना सामाजिक न्याय के उद्देश्य को कमजोर करता है. सरकार को विशेष भर्ती अभियान चलाकर इन पदों को भरना चाहिए.
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धरने में पहुंचे जनप्रतिनिधि और पीड़ित परिवार: शहीद स्मारक पर आयोजित धरने में दलित समाज से जुड़े कई जनप्रतिनिधि भी पहुंचे और डांगावास घटना में मारे गए लोगों के परिजनों ने भी धरने में शामिल होकर न्याय की मांग उठाई. परिजनों का कहना था कि वर्षों से वे न्याय की उम्मीद में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन सभी आरोपियों के बरी होने से उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है.
2015 में जमीन विवाद ने लिया था खूनी रूप: नागौर जिले के डांगावास गांव में 14 मई 2015 को 23 बीघा जमीन के विवाद को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था. इस घटना में पांच दलितों सहित छह लोगों की मौत हुई थी. घटना के बाद मामला प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आया था. मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया करीब 11 साल तक चली. इसके बाद 5 अगस्त 2026 को मेड़ता की विशेष एससी-एसटी अदालत ने सबूतों के अभाव में मामले में आरोपी बनाए गए सभी 40 लोगों को बरी कर दिया था.
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