होमक्राइमराजस्थान पुलिस का बड़ा एक्शन: युवाओं को कंबोडिया में बंधक बनाकर करवाते थे साइबर ठगी, गिरोह के 5 गिरफ्तार
क्राइम

राजस्थान पुलिस का बड़ा एक्शन: युवाओं को कंबोडिया में बंधक बनाकर करवाते थे साइबर ठगी, गिरोह के 5 गिरफ्तार

राजस्थान पुलिस का बड़ा एक्शन: युवाओं को कंबोडिया में बंधक बनाकर करवाते थे साइबर ठगी, गिरोह के 5 गिरफ्तार पुलिस ने कंबोडिया और म्यांमार में युवाओं को बंधक बनाकर जबरन साइबर ठगी कराने वाले अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह के…

ETV Bharat के अनुसार3 अगस्त 2026 को 08:16 pm बजे
राजस्थान पुलिस का बड़ा एक्शन: युवाओं को कंबोडिया में बंधक बनाकर करवाते थे साइबर ठगी, गिरोह के 5 गिरफ्तार

सौजन्य से:- ETV Bharat

राजस्थान पुलिस का बड़ा एक्शन: युवाओं को कंबोडिया में बंधक बनाकर करवाते थे साइबर ठगी, गिरोह के 5 गिरफ्तार

पुलिस ने कंबोडिया और म्यांमार में युवाओं को बंधक बनाकर जबरन साइबर ठगी कराने वाले अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया.

Published : August 3, 2026 at 10:53 PM IST

जयपुर: राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और मानव तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह युवाओं को विदेश में 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह वेतन का लालच देकर कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और लाओस भेजता था, जहां उनके पासपोर्ट छीनकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट, फर्जी इन्वेस्टमेंट और क्रिप्टो फ्रॉड जैसे साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था.

डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत यह कार्रवाई भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिली सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर की गई. जांच में सामने आया कि विदेश पहुंचते ही युवाओं के पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर लिए जाते. रोजाना सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे तक काम कराया जाता था. काम छोड़ने पर हजारों डॉलर जुर्माना और मारपीट की धमकी दी जाती थी.

इसे भी पढ़ें- कपड़ा व्यापारी से 8.30 करोड़ की धोखाधड़ी कर दुबई भागा, वापस आते ही पुलिस ने दबोचा

प्रदेश से 500 से अधिक लोग पहुंचे: एडीजी साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि I4C के डाटा विश्लेषण में राजस्थान के 500 से अधिक लोगों की पहचान हुई है. जिन्हें कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और लाओस भेजा गया था. इनमें से कई अब तक भारत नहीं लौटे हैं. लौटे पीड़ितों ने खुलासा किया कि वहां उनके साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और जबरन साइबर ठगी करवाई जाती थी.

ब्यावर से जुड़े आरोपी, कोलकाता से तीन गिरफ्तार: जांच के दौरान राजकरण उर्फ रॉनी और सागर सिंह निवासी ब्यावर को गिरफ्तार किया गया. इनके मोबाइल फोन, पासपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों से विदेशी हैंडलर्स, वीपीएन, बायनेन्स, फर्जी जीपीएस और अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मिले. पूछताछ के बाद ब्यावर निवासी जीतूराज उर्फ जेम्स, रवि कुमार उर्फ माही और अनिल कुमार उर्फ डेविल को कोलकाता से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे टूरिस्ट वीजा पर म्यांमार जाने की तैयारी में थे.

फर्जी प्रोफाइल बनाकर करते थे करोड़ों की ठगी: आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि साइबर स्कैम सेंटर में पहले उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता था. इसके बाद फर्जी प्रोफाइल के जरिए वे भारतीय नागरिकों से सोशल मीडिया पर दोस्ती कर विश्वास जीतते. उन्हें क्रिप्टो करेंसी और निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर लाखों रुपए का निवेश करवाया जाता. ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों के जरिए निकालकर क्रिप्टो करेंसी में बदलकर चीन और कंबोडिया के हैंडलर्स तक पहुंचाई जाती थी.

इसे भी पढ़ें- फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, रोजगार दिलाने का झांसा देकर की लाखों की ठगी, संचालक समेत 11 हिरासत में

एचआर की भूमिका निभाता राजकरण: राजकरण उर्फ रॉनी कंबोडिया के पोइपेट स्थित स्कैम कंपाउंड में यह मुख्य रूप से एचआर की भूमिका निभाता था, जहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते थे, जिनसे प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से रात 11:30 बजे तक जबरन ठगी का काम करवाया जाता था. चार महीने बाद कंबोडिया से भारत लौटने के बाद इसने ब्यावर के कई युवाओं को अधिक वेतन 800 डॉलर प्रति माह का लालच देकर कंबोडिया भेजा, जिसके बदले इसे भारी कमीशन मिलता था.

महिलाओं की फर्जी प्रोफाइल बनाता सागर: सागर सिंह यह पोइपेट (कंबोडिया) में भारतीय नागरिकों की फेसबुक पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर उनसे दोस्ती करता था. पांच-सात दिनों तक सामान्य चैटिंग के जरिए पीड़ितों के परिवार, बैंक खाते की डिटेल्स, बिजनेस प्रोफाइल और वित्तीय स्थिति की गोपनीय जानकारी हासिल करता था. पूरी जानकारी जुटाने के बाद यह टार्गेट को अपने टीम लीडर को सौंप देता था, जो क्रिप्टो निवेश की फर्जी स्कीम बताकर म्यूल खातों में पैसे ट्रांसफर करवाते थे.

क्रिप्टो में रकम ट्रांसफर करता जीतूराज: जीतूराज फुलवारी उर्फ जेम्स के नाम से क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज बायनेन्स पर खाता संचालित था, जिसके माध्यम से यह यूएसडीटी क्रिप्टो के जरिए कंबोडिया में कार्यरत अन्य नेटवर्क सदस्यों को धन ट्रांसफर करता था. वह भारत से फर्जी म्यूल खाते और भारतीय मोबाइल नंबरों की सिम कार्ड्स साइबर सेंटर्स तक पहुंचाने में संलिप्त था. इसने लगभग 10 भारतीय युवाओं के पासपोर्ट और व्यक्तिगत दस्तावेज चीनी हैंडलर्स को उपलब्ध कराए ताकि उन्हें कंबोडिया के स्कैम सेंटर्स में शामिल कराया जा सके.

इसे भी पढ़ें- बारां: ट्रेडिंग टिप्स के नाम पर महिला डॉक्टर से 1.75 लाख की ठगी, आरोपी गिरफ्तार

शिकार फंसाने की ट्रैनिंग देता था रवि कुमार: पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि रवि कुमार उर्फ माही 2023 से ही कंबोडिया स्थित स्कैम कंपाउंड्स में एक्टिव था. वहां पीड़ितों को फर्जी फेसबुक प्रोफाइल का उपयोग करके भारतीय नागरिकों को फंसाने की ट्रेनिंग देता था. कंबोडिया में लंबे समय तक साइबर ठगी का काम करने के बाद यह चीनी हैंडलर्स के संपर्क में आकर कोलकाता के रास्ते म्यांमार के नए साइबर स्कैम सेंटर में शिफ्ट होने जा रहा था.

कंबोडिया से म्यांमार जा रहा था अनिल: अनिल कुमार उर्फ डेविल आरोपी जीतूराज (जेम्स) का भाई है, जो वर्ष 2024 में कंबोडिया गया था और करीब एक साल तक स्कैम सेंटर में सक्रिय रूप से साइबर अपराधों का संचालन कर रहा था. उसे चीनी कंस्ट्रक्शन कंपनी में 'कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर' के छद्म रोल पर म्यांमार के यानचिया (Yanchia Township) स्थित स्कैम सेंटर भेजा जा रहा था, जिसे पुलिस ने म्यांमार की उड़ान भरने से ठीक पहले कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया.

इसे भी पढ़ें- 1 लाख रुपए की ठगी पर 1930 पर कॉल करें, अपने आप दर्ज होगी एफआईआर, तुरंत शुरू होगी कार्रवाई

नेटवर्क की जड़े खंगालने में जुटी पुलिस: पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पासपोर्ट, विदेशी वीजा दस्तावेज, मोबाइल फोन, डिजिटल साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए हैं. पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है. एसपी साइबर क्राइम सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन और थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम में इंस्पेक्टर नीरज कुमार, एएसआई राकेश कुमार सामोता, हेड कांस्टेबल अशोक कुमार, दौलतराम, कांस्टेबल सुभाष कुमार, कांस्टेबल चालक सूबे सिंह शामिल थे.

राजस्थान पुलिस की आमजन से यह अपील: राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले आकर्षक प्रस्तावों पर बिना सत्यापन विश्वास न करें. किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर दें. अपने निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पर भी संपर्क कर सकते हैं.

इसे भी पढ़ें- 12.09 करोड़ रुपए की ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग ठगी का खुलासा, मुंबई से फर्जी फाइनेंस कंपनी की महिला निदेशक गिरफ्तार

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें