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'अशोक गहलोत ही आलाकमान' राजस्थान के पूर्व CM के समर्थन में फिर बोले शांति धारीवाल के मन में क्या?

Ashok Gehlot News: राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेकर हुई नारेबाजी के बाद चढ़े सियासी पारे को शांति धारीवाल के बयान ने उफान दे दिया है। शांति धारीवाल ने एक बार अपने उस बयान को दोहरा दिया है, जिसमें वो राजस…

Navbharat Times के अनुसार5 अगस्त 2026 को 09:15 am बजे
'अशोक गहलोत ही आलाकमान' राजस्थान के पूर्व CM के समर्थन में फिर बोले शांति धारीवाल के मन में क्या?

सौजन्य से:- Navbharat Times

Ashok Gehlot News: राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेकर हुई नारेबाजी के बाद चढ़े सियासी पारे को शांति धारीवाल के बयान ने उफान दे दिया है। शांति धारीवाल ने एक बार अपने उस बयान को दोहरा दिया है, जिसमें वो राजस्थान में अशोक गहलोत को ही आलाकमान मानते हैं।

जयपुर : राजस्थान कांग्रेस में नारेबाजी को लेकर उठे तूफान के बीच सियासत ने नया रंग ले लिया है। अब कांग्रेस की सियासत में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल के बयान से सियासी गर्माहट तेज कर दी है। दरअसल , पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले धारीवाल ने एक बार फिर अपने पुराने बयान को दोहरा दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'राजस्थान में तो अशोक गहलोत ही आलाकमान है'। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि दिल्ली का आलाकमान ही सबसे बड़ा है, लेकिन राजस्थान में तो जयपुर में जब कोई भी कार्यकर्ता उतरता है, तो वह सबसे पहले अशोक गहलोत के बंगले पर जाता है। कोटा में दिए गए धारीवाल के इस बयान ने फिर से सियासी हलचल मचा दी है। बड़ी बात यह है कि धारीवाल का यह बयान उस समय सामने आया हैं, जब गहलोत के लिए चौथी बार सीएम के नारे लगे और बाद में इस तरह के नारों का विरोध हुआ।

गहलोत और धारीवाल के बीच गजब की बॉन्डिंग

कांग्रेस के इतिहास में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके सबसे करीबी शांति धारीवाल के बीच गजब का गठजोड़ देखने को मिला है। धारीवाल शुरू से ही गहलोत के सबसे भरोसेमंद साथियों में रहे हैं। एक बार फिर उन्होंने अशोक गहलोत के समर्थन में उतरकर साफ कर दिया है कि वो उनके साथ खड़े हैं। धारीवाल हर उस समय भी गहलोत के साथ खड़े रहे हैं। जब उनकी पार्टी के भीतर से भी आलोचना हुई। यहां तक कि 2022 में सियासी संकट के दौरान उन्होंने गहलोत के लिए कांग्रेस के हाई कमान तक को भी चुनौती दे दी थी।

2022 का सियासी एपिसोड, गहलोत को माफी तक मांगनी पड़ी थी

अशोक गहलोत और शांति धारीवाल की बॉन्डिंग को इस तरह भी समझा जा सकता है कि जब कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उनका नाम सामने आया। इस दौरान 25 सितंबर 2022 को जयपुर में दिल्ली से आए पर्यवेक्षकों की ओर से आधिकारिक बैठक बुलाई गई। लेकिन बैठक का बहिष्कार करके गहलोत गुट के विधायक शांति धारीवाल के घर इकट्ठा हुए थे। इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस आलाकमान को चुनौती देने से जोड़कर देखा गया। इतना ही नहीं, धारीवाल ने अगले दिन मीडिया के सामने खुलकर ये तक बयान दे दिया था कि 'राजस्थान में कांग्रेस के आलाकमान तो अशोक गहलोत ही हैं।' एक बार फिर उठे सियासी भूचाल पर उन्होंने फिर से अपने बयान को दोहरा दिया है।

अशोक गहलोत को मांगनी पड़ी थी माफी

पूरे घटनाक्रम पर अशोक गहलोत को माफी तक मांगनी पड़ी थी। 2022 में जब केंद्रीय पर्यवेक्षक जयपुर में आधिकारिक बैठक का बहिष्कार होने से नाराज होकर दिल्ली लौटे। इसके बाद धारीवाल और अन्य नेताओं को कारण बताओ नोटिस भी मिला था। पूरे मामले में अशोक गहलोत ने खुद इस बात को मीडिया के सामने रखते हुए कहा था कि जो भी गलतफहमी हुई, उस पर उन्होंने सोनिया गांधी से खेद जताया और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए माफी मांगी। धारीवाल की बयानबाजी और बैठक का पर्यवेक्षकों के बहिष्कार का मुद्दा इस दौरान खूब उबाल में रहा।

गहलोत ने तीनों कार्यकाल में बहुत कुछ दिया

राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का तीन बार का कार्यकाल रहा। इसमें शांति धारीवाल हमेशा उनके साथ रहे। शांति धारीवाल गहलोत के लिए इतने लॉयल नेताओं में से है कि 2022 में चुनाव से पहले भी गहलोत ने यह स्पष्ट कर दिया था कि अगर 'हमारी सरकार वापस आती है, तो धारीवाल को ही यूडीएच का जिम्मा सौंपा जाएगा। 1998 से 2003 के पहले कार्यकाल में गहलोत ने उन्हें शहरी विकास एवं आवास विभाग और स्थानीय स्वास्थ्य शासन विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया। इसी तरह दूसरे कार्यकाल में धारीवाल का कद और बढ़ गया। इसमें गहलोत ने उन्हें गृह विभाग, शहरी विकास एवं आवास, संसदीय कार्य विभाग, कानून न्याय विभाग और स्वास्थ्य शासन विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया। 2019 से 2023 के कार्यकाल में धारीवाल फिर से शहरी विकास एवं आवास विभाग और संसदीय कार्य विभाग कानून एवं विधिक विभाग के मंत्री बने।

शांति धारीवाल के बयान पर इन नेताओं ने दी प्रतिक्रिया

बीते दिनों कोटा में शांति धारीवाल ने गहलोत को ही राजस्थान का हाई कमान बता कर फिर से नई बहस शुरू कर दी। इसको लेकर कांग्रेसी नेताओं की भी प्रतिक्रिया सामने आई। इसमें पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास से सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा कि 'धारीवाल जी कुछ भी बोल सकते हैं। वह हमारे सीनियर नेता है और मेरे पिता की उम्र के हैं, अब उनके लिए मैं क्या कहूं, उनको कैसे रोका जा सकता हैं। इधर, कांग्रेस के विधायक रफीक खान ने कहा कि उन्होंने ना तो यह बयान सुना है, ना उनकी जानकारी में आया है। इधर, सियासी गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस हाई कमान के निर्देश पर अब राजस्थान में व्यक्तिगत नारों पर रोक लगा दी गई। खुद अशोक गहलोत ने ऐसे नारे ना लगाने की कार्यकर्ताओं से अपील की है। पंचायत चुनाव में जयपुर जिला अध्यक्ष सुनील शर्मा से साफ कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि वो राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस पार्टी के लिए नारे लगाए।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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