Cyber Crime : डिजिटल अरेस्ट के नोटिस से रहे सतर्क, सीबीआई के अभय पोर्टल से करें संदिग्ध नोटिस और वारंट का सत्यापन
Cyber Crime : डिजिटल अरेस्ट के नोटिस से रहे सतर्क, सीबीआई के अभय पोर्टल से करें संदिग्ध नोटिस और वारंट का सत्यापन राजस्थान पुलिस की साइबर विंग ने जारी की एडवाइजरी. कोई जांच एजेंसी वीडियो कॉल-वाट्सएप पर नहीं भेजती नोटिस-व…

सौजन्य से:- ETV Bharat
Cyber Crime : डिजिटल अरेस्ट के नोटिस से रहे सतर्क, सीबीआई के अभय पोर्टल से करें संदिग्ध नोटिस और वारंट का सत्यापन
राजस्थान पुलिस की साइबर विंग ने जारी की एडवाइजरी. कोई जांच एजेंसी वीडियो कॉल-वाट्सएप पर नहीं भेजती नोटिस-वारंट.
Published : August 17, 2026 at 9:05 PM IST
जयपुर: प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट के बहाने साइबर ठगी और वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध विंग ने आमजन को सतर्क करते हुए एक एडवाइजरी जारी की है. इसमें साफ किया है कि कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल या वाट्सएप पर नोटिस या वारंट जारी नहीं करती है. ऐसे किसी संदिग्ध नोटिस या वारंट का सीबीआई के पोर्टल पर सत्यापन किया जा सकता है.
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराधों को देखते हुए आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी फर्जी कॉल, वीडियो कॉल, नोटिस या गिरफ्तारी के नाम पर डरने के बजाय सतर्कता बरतें और तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दें.
सीबीआई, ईडी और कस्टम के नाम पर ठगी : एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधियों द्वारा इन दिनों खुद को सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कस्टम या एटीएस का अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. ठग फर्जी वारंट, समन और नोटिस भेजकर लोगों को डराते हैं तथा वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें डिजिटल अरेस्ट का एहसास कराकर उनकी जमा पूंजी हड़प लेते हैं. इस प्रकार की धोखाधड़ी से बचाव के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अभय नामक एक एआई आधारित पोर्टल शुरू किया है. जहां नागरिक संदिग्ध पुलिस, न्यायालय या सीबीआई के नाम से भेजे गए नोटिस और वारंट की सत्यता की जांच कर सकते हैं.
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ऐसे जाल में फंसाते हैं साइबर ठग : साइबर अपराधी फोन, वाट्सएप या वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों से संपर्क करते हैं. वे दावा करते हैं कि पीड़ित के आधार कार्ड, बैंक खाते या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किसी अवैध गतिविधि, जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला, मादक पदार्थों की तस्करी या किसी गैरकानूनी पार्सल भेजने में किया गया है. इसके बाद ठग पुलिस स्टेशन या सीबीआई कार्यालय जैसा माहौल तैयार कर वीडियो कॉल करते हैं. वे फर्जी गिरफ्तारी वारंट और नोटिस भेजकर पीड़ित को धमकाते हैं तथा मामले को गोपनीय रखने का दबाव बनाते हैं.
सत्यापन के बहाने रकम करवाते हैं ट्रांसफर : इसके बाद साइबर अपराधी लोगों से बैंक खाते, एफडी और अन्य वित्तीय जानकारी प्राप्त कर उन्हें बताते हैं कि उनकी राशि अपराध से जुड़ी हो सकती है. जब उन्हें लगता है कि सामने वाला पूरी तरह से उनके जाल में फंस गया है. वे सत्यापन के नाम पर पूरी धनराशि अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते हैं. इस बीच यह भरोसा दिलाया जाता है कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह रकम वापस खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी. हालांकि, रकम वापस नहीं आती है.
यह सावधानी रखकर बच सकते हैं ठगी से :
- किसी भी प्रकार की धमकी मिलने पर घबराएं नहीं.
- कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी नहीं करती.
- आधार नंबर, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और ओटीपी किसी के साथ साझा न करें.
- किसी भी संदिग्ध नोटिस या वारंट का सत्यापन अभय पोर्टल https://abhay.cbi.gov.in पर करें.
- याद रखें कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है.
ठगी होने पर तत्काल दर्ज करवाएं शिकायत : इसके साथ ही एडीजी सिंह ने आमजन से अपील की है कि यदि आप साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं तो तुरंत निकटतम पुलिस थाने या साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें. इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है. पुलिस मुख्यालय के साइबर हेल्प डेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
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