कांग्रेस का Gen Z कार्ड; जयपुर में 30 उम्मीदवार 30 साल से कम उम्र वाले उतारे
कांग्रेस का Gen Z कार्ड; जयपुर में 30 उम्मीदवार 30 साल से कम उम्र वाले उतारे युवा राजनीति में आने के सवाल पर दोनों उम्मीदवार मानती हैं कि उनके पास अनुभव सीमित है। लेकिन उनका तर्क है कि अनुभव समय के साथ हासिल किया जा सकता…

सौजन्य से:- Hindustan
कांग्रेस का Gen Z कार्ड; जयपुर में 30 उम्मीदवार 30 साल से कम उम्र वाले उतारे
युवा राजनीति में आने के सवाल पर दोनों उम्मीदवार मानती हैं कि उनके पास अनुभव सीमित है। लेकिन उनका तर्क है कि अनुभव समय के साथ हासिल किया जा सकता है, जबकि जनता के बीच काम करने की इच्छा और सीखने की क्षमता जरूरी है।
जयपुर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने इस बार पुराने सियासी समीकरणों के साथ युवा जोश को भी मैदान में उतारा है। पार्टी ने 30 साल से कम उम्र के 30 उम्मीदवारों को टिकट दिया है। वहीं, 50 साल से कम उम्र के प्रत्याशियों की संख्या 110 है। कांग्रेस के जयपुर प्रभारी रोहित बोहरा के मुताबिक, पार्टी के उम्मीदवारों की औसत उम्र करीब 37 साल है। यानी इस चुनाव में कांग्रेस ने अनुभव के साथ नई पीढ़ी को भी बड़ा राजनीतिक मंच देने की कोशिश की है।
इस युवा फौज में सबसे ज्यादा चर्चा 22 साल की सुमन भाटी की है। सुमन जयपुर के वार्ड 72 से चुनाव मैदान में हैं और कांग्रेस की सबसे कम उम्र की प्रत्याशी हैं। झलाना की झुग्गी बस्ती से आने वाली सुमन का राजनीति में आने का रास्ता किसी राजनीतिक परिवार से होकर नहीं गुजरता। वह लॉन्ड्री का काम करती हैं और अपने आसपास की महिलाओं की परेशानियों को बेहद करीब से देखती रही हैं।
सुमन का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद उनका फोकस केवल सड़क और नाली जैसे पारंपरिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा। वह बस्तियों में महिलाओं के लिए स्किल ट्रेनिंग, नशामुक्ति शिविर और बेहतर पुलिस व्यवस्था चाहती हैं। अपने इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगवाने और महिला पुलिसकर्मियों की नियमित गश्त बढ़ाने की भी उनकी प्राथमिकता है।
सुमन के लिए यह चुनाव सिर्फ पार्षद बनने की लड़ाई नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज को नगर निगम तक पहुंचाने का मौका है, जिन्हें अक्सर शहर की मुख्यधारा से दूर समझा जाता है। वह जातिगत दीवारों को तोड़ने को भी अपने एजेंडे का अहम हिस्सा मानती हैं।
23 साल की हर्षिता का ‘टेक्नोलॉजी मॉडल’
कांग्रेस के युवा उम्मीदवारों में 23 साल की हर्षिता जैन भी अलग पहचान बना रही हैं। वार्ड 46 से चुनाव लड़ रहीं हर्षिता ग्रेजुएट हैं और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक को हथियार बनाना चाहती हैं।
हर्षिता का जोर पारदर्शिता और जवाबदेही पर है। उनका कहना है कि नगर निगम में शिकायतों के लिए ऐसा टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम होना चाहिए, जिसमें नागरिक अपनी समस्या दर्ज करें और शिकायत को संबंधित विभाग तक स्वतः पहुंचाया जा सके। इससे शिकायत किस विभाग के पास है और उसका समाधान कब तक होगा, इसकी जानकारी भी लोगों को मिल सकेगी।
युवा राजनीति में आने के सवाल पर दोनों उम्मीदवार मानती हैं कि उनके पास अनुभव सीमित है। लेकिन उनका तर्क है कि अनुभव समय के साथ हासिल किया जा सकता है, जबकि जनता के बीच काम करने की इच्छा और सीखने की क्षमता जरूरी है।
309 निकायों में जयपुर का ‘Gen Z’ कनेक्शन सबसे मजबूत
कांग्रेस के जयपुर प्रभारी रोहित बोहरा के मुताबिक, पार्टी ने इस बार जानबूझकर युवाओं पर फोकस बढ़ाया है। उनका दावा है कि कांग्रेस के करीब 20 फीसदी उम्मीदवार Gen Z से हैं।
बोहरा ने कहा कि प्रदेश के 309 शहरी निकायों में होने वाले चुनावों में जयपुर में Gen Z उम्मीदवारों की संख्या सबसे ज्यादा है। पार्टी की कोशिश साफ दिखाई देती है—नगर निगम की राजनीति में नई पीढ़ी को जगह देकर स्थानीय स्तर पर संगठन को नए चेहरे देना।
यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है, जब शहरी राजनीति में युवा मतदाताओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। सोशल मीडिया, डिजिटल शिकायत प्रणाली, महिला सुरक्षा, रोजगार और नशे जैसी समस्याएं अब स्थानीय चुनावों के मुद्दे भी बन रही हैं। ऐसे में कांग्रेस ने इन मुद्दों को उठाने वाले युवा चेहरों पर दांव खेला है।
हालांकि, युवा उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनुभव की कमी होगी। नगर निगम की राजनीति में वार्ड स्तर की जमीनी समस्याओं से लेकर प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक की समझ जरूरी होती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पहली बार चुनावी मैदान में उतरे ये चेहरे जनता का भरोसा कितना जीत पाते हैं।
कांग्रेस के लिए जयपुर का यह प्रयोग केवल टिकट वितरण तक सीमित नहीं है। यह इस बात की परीक्षा भी है कि क्या युवा चेहरों के जरिए पार्टी शहर की राजनीति में नई कहानी लिख सकती है?
अब निगाहें चुनाव परिणाम पर हैं। अगर सुमन भाटी जैसे चेहरे जीतकर निगम की राजनीति में पहुंचते हैं, तो यह सिर्फ एक उम्मीदवार की जीत नहीं होगी, बल्कि झुग्गी बस्ती से निकलकर नगर निगम के सदन तक पहुंचती नई पीढ़ी की सियासी दस्तक भी मानी जाएगी।
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