जयपुर नगर निगम चुनाव: 'किंगमेकर' बनीं महिला वोटर्स, Gen-Z बोलीं- जाम से नहीं, जाम में फंसने से डर लगता है
जयपुर नगर निगम चुनाव: 'किंगमेकर' बनीं महिला वोटर्स, Gen-Z बोलीं- जाम से नहीं, जाम में फंसने से डर लगता है सुबह से ही अलग-अलग बूथों पर महिला मतदाताओं की कतारें नजर आईं. Published : September 11, 2026 at 5:23 PM IST जयपुर:…

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जयपुर नगर निगम चुनाव: 'किंगमेकर' बनीं महिला वोटर्स, Gen-Z बोलीं- जाम से नहीं, जाम में फंसने से डर लगता है
सुबह से ही अलग-अलग बूथों पर महिला मतदाताओं की कतारें नजर आईं.
Published : September 11, 2026 at 5:23 PM IST
जयपुर: जयपुर नगर निगम चुनाव में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं. नगर निगम क्षेत्र में कुल 24 लाख 23 हजार 121 मतदाता हैं, जिनमें 11 लाख 71 हजार 649 महिला मतदाता हैं, यानी कुल मतदाताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 48.31 फीसदी है. ऐसे में शहरी सरकार चुनने में महिला मतदाताओं के वोट अहम माने जा रहे हैं. अपनी इसी अहमियत के चलते आधी आबादी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मतदान केंद्रों तक पहुंची.सुबह से ही अलग-अलग बूथों पर महिला मतदाताओं की कतारें नजर आईं. महिलाओं ने अपने वार्ड की स्थानीय समस्याओं के साथ शहर से जुड़े बड़े मुद्दों को लेकर भी मतदान किया.
महिला वोटर्स का कहना है कि नई शहरी सरकार से सिर्फ बड़े विकास कार्यों की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है. सांसद मंजू शर्मा ने महिलाओं के मुद्दों को सिर्फ आधी आबादी के नहीं, बल्कि पूरी आबादी के अहम मुद्दे बताए.
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सफाई व्यवस्था में सुधार की सबसे बड़ी उम्मीद: महिला मतदाताओं ने सफाई व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बताया. उनका कहना है कि घर और आसपास की सफाई सीधे तौर पर परिवार के स्वास्थ्य और शहर के माहौल से जुड़ी है. कई इलाकों में नियमित सफाई, कचरा उठाने और गंदगी की समस्या अभी भी बनी हुई है. शहर में घूमते निराश्रित पशु भी इसकी एक बड़ी वजह हैं. ऐसे में नई शहरी सरकार से उम्मीद है कि वार्ड स्तर पर सफाई व्यवस्था को मजबूत किया जाए, पशु प्रबंधन हो और कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग हो.
महिलाओं की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा: महिला वोटरों के लिए सुरक्षा भी अहम मुद्दा है. महिलाओं का कहना है कि शहर में सार्वजनिक स्थानों, बाजारों और आवागमन वाले क्षेत्रों में सुरक्षित माहौल जरूरी है. खासकर शाम के समय स्ट्रीट लाइट, सुनसान इलाकों और सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने की जरूरत है. शहर सीसीटीवी सर्विलांस पर रहे ताकि महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें. महिलाओं को उम्मीद है कि नई शहरी सरकार इस पर भी गंभीरता से काम करेगी.
जेन जी को ट्रैफिक की समस्या से निजात की उम्मीद: जयपुर में बढ़ते ट्रैफिक को लेकर भी जेन जी और फर्स्ट टाइम वोटर्स ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि शहर के कई प्रमुख रास्तों और बाजारों में आए दिन जाम की स्थिति रहती है. इसका असर नौकरीपेशा महिलाओं, कॉलेज जाने वाली छात्राओं, बच्चों को स्कूल छोड़ने-लाने वाली माताओं और रोजाना सफर करने वाली महिलाओं पर भी पड़ता है. ऐसे में नई शहरी सरकार से ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किंग और सड़कों की व्यवस्था को बेहतर करने की उम्मीद है.
सार्वजनिक टॉयलेट की सुविधा पर भी जोर: महिला मतदाताओं ने शहर में पर्याप्त और साफ-सुथरे सार्वजनिक टॉयलेट की जरूरत भी बताई. बाजारों, प्रमुख सार्वजनिक स्थानों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में महिलाओं के लिए स्वच्छ और सुरक्षित टॉयलेट की उपलब्धता को जरूरी बताया गया. एक युवती ने कहा कि शहर को स्मार्ट और विकसित बनाने की बात तभी पूरी होगी, जब बुनियादी सुविधाएं जमीन पर नजर आएं.
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सांसद मंजू शर्मा बोलीं- महिला और पुरुषों के मुद्दे समान: जयपुर नगर निगम चुनाव में सांसद मंजू शर्मा ने भी अपने परिवार के साथ मतदान किया. मतदान के बाद उन्होंने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि शहर के विकास से जुड़े मुद्दे महिला और पुरुष सभी के लिए समान हैं. यही वजह है कि सभी बढ़-चढ़कर लोकतंत्र के इस महापर्व में अपने मत का प्रयोग करने के लिए मतदान केंद्र पर पहुंच रहे हैं. मंजू शर्मा ने दावा किया कि महिलाओं का बीजेपी को भरपूर समर्थन मिल रहा है और प्रदेश के अधिकतर नगरीय निकायों में बीजेपी के बोर्ड बन रहे हैं. उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास के साथ बनने वाली शहरी सरकार का फोकस शहर के विकास, बेहतर सुविधाओं और लोगों की समस्याओं के समाधान पर होगा.
नई शहरी सरकार से वार्ड स्तर पर काम की उम्मीद: महिला मतदाताओं ने कहा कि मतदान के बाद चुने जाने वाले पार्षदों को वार्ड की समस्याओं के बीच नियमित रूप से मौजूद रहना चाहिए. सफाई, सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, सुरक्षा, ट्रैफिक और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे मुद्दों पर समयबद्ध तरीके से काम होना चाहिए. नगर निगम चुनाव में महिलाओं ने अपने मत के जरिए नई शहरी सरकार चुनने में भागीदारी निभाई है. अब देखना होगा कि मतदान के बाद बनने वाली शहरी सरकार आधी आबादी की इन उम्मीदों और मुद्दों को कितनी प्राथमिकता देती है.
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