राजस्थान में मानसून बेपटरी: हर दूसरे जिलें में बारिश औसत से कम, पाली सबसे ज्यादा प्रभावित
राजस्थान में मानसून बेपटरी: हर दूसरे जिलें में बारिश औसत से कम, पाली सबसे ज्यादा प्रभावित राजस्थान में 25 अगस्त तक सामान्य से 16.13% कम बारिश हुई। 41 में 18 जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। पाली सबसे प्रभावित, जानें जिल…

सौजन्य से:- Amar Ujala
राजस्थान में मानसून बेपटरी: हर दूसरे जिलें में बारिश औसत से कम, पाली सबसे ज्यादा प्रभावित
राजस्थान में 25 अगस्त तक सामान्य से 16.13% कम बारिश हुई। 41 में 18 जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। पाली सबसे प्रभावित, जानें जिलेवार मानसून का हाल।
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क्या राजस्थान में इस बार सूखे की मार पड़ेगी? प्रदेश में इस बार मानसून की एंट्री हुए प्रदेश में 2 महीने होने को आए लेकिन अब तक 18 जिले ऐसे हैं जहां इस बार बारिश बेहद कम हुई है। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित जिला पाली रहा है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान प्रदेश में सामान्यतः 341.03 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, जबकि वास्तव में केवल 286.02 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज हुई। यानी समूचे राजस्थान में सामान्य से 16.13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पिछले साल इसी अवधि में 521.45 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो इस साल से कहीं ज्यादा थी। हालांकि प्रदेश का समग्र औसत अब भी "सामान्य" श्रेणी में गिना जा रहा है, लेकिन जिलेवार तस्वीर देखें तो हालात असमान और चिंताजनक हैं।
41 जिलों में से किसकी कैसी स्थिति
राज्य के सभी 41 जिलों को बारिश के आधार पर पांच श्रेणियों में बांटा गया है, और इस बार परिणाम बीते साल से बिल्कुल उलट हैं:
असामान्य ( 60% या अधिक): इस बार एक भी जिला इस श्रेणी में नहीं है, जबकि पिछले साल इसी तारीख तक 18 जिले इस श्रेणी में थे- यह सबसे बड़ा अंतर है।
अधिक ( 20% से 59% ज्यादा): केवल 5 जिले - डीग, फलौदी, बीकानेर, भरतपुर और सलूंबर।
सामान्य ( +19% से -19% के बीच): 18 जिले इस दायरे में रहे।
न्यून/कमी ( -20% से -59% कम): 18 जिले भारी कमी झेल रहे हैं -यानी करीब हर दूसरा जिला सूखे जैसी स्थिति में है।
अत्यल्प ( -60% या उससे कम): इस श्रेणी में भी कोई जिला दर्ज नहीं हुआ।
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पिछले साल जहां 18 जिले "असामान्य" (यानी बहुत अधिक बारिश) और 16 जिले "अधिक" श्रेणी में थे, वहीं इस साल सिर्फ 7 जिले (5 अधिक) उस दायरे के आसपास पहुंच पाए और बाकी आधे से ज्यादा जिले कमी या सामान्य श्रेणी में सिमट गए।
संभाग-वार पूरी तस्वीर (सभी 41 जिले)
1. अजमेर संभाग- औसतन 12.29% कम बारिश (सामान्य श्रेणी) अजमेर (-14.84%), भीलवाड़ा (-28.02%, न्यून), ब्यावर (+11.45%), डीडवाना-कुचामन (+11.40%), नागौर (-2.05%), टोंक (-23.29%, न्यून)।
2. भरतपुर संभाग - औसतन 7.25% कम (सामान्य श्रेणी) भरतपुर (+21.72%, अधिक), डीग (+41.83%, अधिक), धौलपुर (+9.64%), करौली (-17.17%), सवाई माधोपुर (-30.56%, न्यून)।
3. बीकानेर संभाग - औसतन 4.87% ज्यादा (सामान्य श्रेणी), प्रदेश का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला संभाग बीकानेर (+23.21%, अधिक), चूरू (+0.41%), हनुमानगढ़ (-25.97%, न्यून), गंगानगर (-11.04%)।
4. जयपुर संभाग- औसतन 10.67% कम (सामान्य श्रेणी) अलवर (+3.40%), दौसा (-20.00%, न्यून), जयपुर (-21.13%, न्यून), झुंझुनू (+4.60%), खैरथल-तिजारा (-10.57%), कोटपूतली-बहरोड़ (-19.79%, न्यून), सीकर (-3.01%)।
5. जोधपुर संभाग- औसतन 26.07% कम, न्यून श्रेणी बालोतरा (-17.30%), बाड़मेर (+4.27%), जैसलमेर (-43.23%, न्यून), जालोर (-45.91%, न्यून), जोधपुर (-12.38%), पाली (-53.29%, न्यून - प्रदेश में सबसे ज्यादा कमी वाला जिला), फलौदी (+33.95%, अधिक), सिरोही (-30.61%, न्यून)।
6. कोटा संभाग- औसतन 21.72% कम, न्यून श्रेणी बारां (-25.20%, न्यून), बूंदी (-24.49%, न्यून), झालावाड़ (-14.24%), कोटा (-24.44%, न्यून)। पूरा हाड़ौती अंचल ही पानी की किल्लत से जूझ रहा है।
7. उदयपुर संभाग - औसतन 24.20% कम, न्यून श्रेणी बांसवाड़ा (-44.17%, न्यून), चित्तौड़गढ़ (-13.50%), डूंगरपुर (-36.90%, न्यून), प्रतापगढ़ (-15.63%), राजसमंद (-32.47%, न्यून), सलूंबर (+20.97%, अधिक), उदयपुर (-39.79%, न्यून)।
सबसे ज्यादा और सबसे कम बारिश वाले जिले
सामान्य से सर्वाधिक बारिश वाले पांच जिले: डीग (+41.83%), फलौदी (+33.95%), बीकानेर (+23.21%), भरतपुर (+21.72%) और सलूंबर (+20.97%)।
सबसे ज्यादा कमी झेलने वाले पांच जिले: पाली (-53.29%), जालोर (-45.91%), बांसवाड़ा (-44.17%), जैसलमेर (-43.23%) और उदयपुर (-39.79%)।
कुल मिलाकर देखें तो राजस्थान के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्से इस मानसून में सबसे ज्यादा मार झेल रहे हैं। जोधपुर, कोटा और उदयपुर संभागों के 19 जिलों में औसत बारिश इतनी कम रही कि पूरा संभाग ही "कमी" की श्रेणी में आ गया। दूसरी तरफ बीकानेर और भरतपुर संभाग के कुछ जिलों ने राहत जरूर दी, जहां बारिश उम्मीद से बेहतर हुई। लेकिन प्रदेशभर की तस्वीर देखें तो 41 जिलों में से 18 जिलों में बारिश की भारी कमी है, जबकि सिर्फ 5 जिलों में ही ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। पिछले साल हुई झमाझम बारिश की तुलना में यह मानसून सीजन काफी कमजोर रहा है, और इसका असर आने वाले महीनों में भूजल स्तर, बांधों में पानी की मात्रा और खरीफ की फसल की बुवाई पर देखने को मिल सकता है।
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