कोटा में समय से पहले एक साथ जन्मे ट्रिपलेट, आज किया गया डिस्चार्ज, अलवर में तीन बच्चियों का जन्म
कोटा में समय से पहले एक साथ जन्मे ट्रिपलेट, आज किया गया डिस्चार्ज, अलवर में तीन बच्चियों का जन्म कोटा में प्रीमेच्योर तीन लड़कों को सोमवार को डिस्चार्ज किया गया है. अलवर में महिला ने तीन बेटियों को जन्म दिया है. Publishe…

सौजन्य से:- ETV Bharat
कोटा में समय से पहले एक साथ जन्मे ट्रिपलेट, आज किया गया डिस्चार्ज, अलवर में तीन बच्चियों का जन्म
कोटा में प्रीमेच्योर तीन लड़कों को सोमवार को डिस्चार्ज किया गया है. अलवर में महिला ने तीन बेटियों को जन्म दिया है.
Published : August 10, 2026 at 10:02 AM IST
|Updated : August 10, 2026 at 4:43 PM IST
कोटा/अलवर : कोटा में एक गर्भवती ने एक साथ तीन बेटों को जन्म दिया है. यह ट्रिपलेट डिलीवरी जेके लोन अस्पताल में 29 जुलाई को की गई थी. इसके बाद तीनों बच्चे गंभीर स्थिति में आईसीयू में भर्ती थे. उनका वजन भी कम था. करीब 12 दिन जेके लोन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया हैं. यह तीनों नवजात मेल हैं. पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट के डॉक्टर ने उनकी नियोनेटल इंसेंटिव केयर यूनिट (NICU) में केयर की. वहीं, अलवर के जनाना अस्पताल में सोमवार को महिला ने तीन बच्चियों को जन्म दिया है.
जेके लोन अस्पताल में शिशु रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंकज सिंघल ने बताया कि 29 जुलाई को कोटा की रहने वाली रुखसार के प्रीमेच्योर डिलीवरी हुई थी. उसकी डिलीवरी 33 सप्ताह यानी सातवें महीने में ही हो गई थी. चिकित्सकों ने पहले सोनोग्राफी में ही उसके एक से ज्यादा बच्चों के होने की जानकारी दी थी, इसीलिए उसके सी सेक्शन (सिजेरियन) डिलीवरी करवाई गई थी.
सामान्य नवजात से आधे वजन के थे : इस डिलीवरी में उसने तीन नवजात को जन्म दिया. तीनों का वजन 1.6 किलोग्राम, 1.5 और 1.3 किलोग्राम था. तीनों बच्चे सामान्य नवजात से आधे वजन के आसपास थे. इन नवजात बच्चों को पैदा होते ही सांस लेने की तकलीफ शुरू हो गई थी. ऐसे में इन्हें शिशु रोग विभाग के चिकित्सकों ने तत्काल एनआईसीयू में शिफ्ट कर दिया था, जहां पर उनका 12 दिन तक उपचार चला है.
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कमजोर फेफड़े और ब्लड इंफेक्शन से जूझ रहे थे नवजात : डॉ पंकज सिंघल ने बताया कि एनआईसीयू में उनके उपचार में डॉ. प्रियंका और डॉ. सुनील के साथ स्टाफ भी शामिल रहा है. तीनों नवजात को सांस लेने की तकलीफ थी, इसीलिए उन्हें एनआईसीयू में सिपेप के जरिए ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया. जन्म के बाद पीलिया होने पर उन्हें फोटोथेरेपी मशीन में रखा गया. सेप्सिस यानी खून में संक्रमण सामने आया और यह लगातार बढ़ रहा था, इसीलिए इम्यूनोग्लोबिन के इंजेक्शन लगाए गए हैं.
लगातार एंटीबायोटिक देने से बच्चों की सेहत में सुधार आ रहा था. फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं हुए थे. ये सामान्य जन्म लेने वाले नवजात से छोटे और कमजोर भी थे. जन्म के साथ इन्हें निमोनिया था. हालांकि सर्फैक्टेंट्स में नहीं देना पड़ा. नवजात शुरू में एंटीबायोटिक व अन्य दवाओं से स्टेबल हुए और उसके बाद रिकवर करने लगे थे. उन्हें टयूब से दूध दिया जा रहा था. वजन हल्का सा बढ़ने पर मुंह से दूध देना शुरू किया गया. इसके बाद डिस्चार्ज कर दिया है.
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आईवीएफ के बाद ट्विंस होना नॉर्मल : डॉ. पंकज सिंघल का कहना है कि वर्तमान में ट्विंस होना काफी नॉर्मल हो गया है, क्योंकि आईवीएफ के बाद ऐसे ज्यादातर चांस रहते हैं. कई आईवीएफ के मामले में ट्रिपलेट डिलीवरी भी होती है, लेकिन यह काफी रेयर होती है. रुखसार का मामला इन सबसे बिल्कुल अलग है. यह कोई आईवीएफ का केस नहीं है. यह नॉर्मल ही ट्रिपलेट डिलीवरी का मामला है. यह तो बिल्कुल ही रेयर मामले में आता है.
अलवर में सामान्य प्रसव से तीन बेटियों का जन्म : जिले के जनाना अस्पताल से सोमवार को एक महिला ने तीन शिशुओं को जन्म दिया है. महिला 7 अगस्त को प्रसव पीड़ा होने के बाद जनाना अस्पताल में भर्ती हुई थी. इसके बाद डॉक्टरों ने सोमवार को सामान्य प्रसव कराया, जिसके बाद महिला ने तीन बेटियों को जन्म दिया है. फिलहाल तीनों शिशुओं को चिकित्सकीय टीम की निगरानी में रखा गया है.
महिला अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ. टेकचंद ने बताया कि मरीज रुकसीना पत्नी मुस्तफा निवासी किशनगढ़ को 7 अगस्त को प्रसव पीड़ा होने के चलते परिजनों ने अलवर के जनाना अस्पताल में भर्ती कराया. सोमवार को महिला ने तीन बच्चियों को जन्म दिया है. नवजात शिशुओं का वजन कम होने के चलते फिलहाल उन्हें नर्सरी वार्ड में रखा गया है. मां व बच्चियों का स्वास्थ्य ठीक है. परिजनों ने बताया कि महिला का पहले से एक बेटा था, जिसके करीब 5 साल बाद एक बार फिर उनके घर में खुशियां आई हैं. डॉ. टेकचंद ने बताया कि सामान्य स्थिति रहने के बाद नवजात शिशुओं को मशीन से निकाला जाएगा.
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