अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हार्डकोर कैदियों के 'सच्चे साथी' बनीं किताबें, गन छोड़ हाथों में उठाई कलम
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हार्डकोर कैदियों के 'सच्चे साथी' बनीं किताबें, गन छोड़ हाथों में उठाई कलम अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के हार्डकोर कैदी अकेलेपन के बीच किताबों को अपना साथी बनाकर आत्ममंथन व लेखन के जरिए सकारात्मक…

सौजन्य से:- ETV Bharat
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हार्डकोर कैदियों के 'सच्चे साथी' बनीं किताबें, गन छोड़ हाथों में उठाई कलम
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के हार्डकोर कैदी अकेलेपन के बीच किताबों को अपना साथी बनाकर आत्ममंथन व लेखन के जरिए सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं.
Published : August 29, 2026 at 9:13 AM IST
|Updated : August 29, 2026 at 9:36 AM IST
अजमेर : चारदीवारी की भीषण खामोशी, लोहे की मजबूत सलाखें, कड़ा पहरा और बाहर निकलने की हर उम्मीद पर लगा सख्त पहरा यह पहचान है राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की. वही जेल, जो कभी सुरक्षा में चूक और कुख्यात जगन गुर्जर हत्याकांड को लेकर सुर्खियों और विवादों में घिरी रही थी. लेकिन आज इसी जेल की तन्हा कोठरियों से एक ऐसी मानवीय और सकारात्मक तस्वीर निकलकर सामने आ रही है. जेल की कोठरी में कैदी अपना अकेलापन दूर किताबों से कर रहे है. यही किताबें अपराध के अंधकार में डूबे कैदियों में सकारात्मक का उजाला ला रही है. जेल के बेहद कड़े अनुशासन और मनोरंजन के साधनों के शून्य के बीच अब किताबें ही इन खूंखार बंदियों की सबसे भरोसेमंद दोस्त बन चुकी हैं.
तन्हाई और सख्त पहरे के बीच किताबों का सहारा : वर्ष 2015 में इस जेल को बाल सुधार गृह से बदलकर प्रदेश की एकमात्र हाई सिक्योरिटी जेल बनाया गया था. इस जेल की तासीर राजस्थान की अन्य सामान्य जेलों से बिल्कुल जुदा है. यहां केवल उन्हीं बंदियों को शिफ्ट किया जाता है जो बेहद संगीन अपराधों में लिप्त रहे हैं और सामान्य जेलों में रहकर भी अपना आपराधिक सिंडिकेट संचालित करने के साथ-साथ अपराध में लिप्त रहते हैं.
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खास बात यह कि सामान्य जेल के बजाय यहां आने वाला कैदी अपने पहले दिन को ही कोसते हैं. दरअसल यहां कैदियों को सामान्य जेल जैसी सुविधाए नहीं मिलती है बल्कि यहां कड़े नियम है और मनोरंजन के भी कोई साधन नहीं है. यहां की व्यवस्था इतनी कड़ी है कि बंदियों को एक-दूसरे से मिलने-जुलने की बिल्कुल इजाजत नहीं होती. आपस में बातचीत तो दूर, यहां टीवी, रेडियो या खेलकूद जैसे मनोरंजन का कोई साधन मौजूद नहीं है. सामान्य जेलों जैसी खुली हवा और सुविधाओं के आदी अपराधियों के लिए यहां का पहला दिन किसी बुरे सपने जैसा होता है. कई कैदी सामान्य जेल में वापस जाने के लिए भूख हड़ताल करते हैं, तो कुछ हताशा में खुद को चोट पहुंचाने की कोशिश तक कर बैठते हैं. ऐसे में जेल में मौजूदा लाइब्रेरी ही कैदियों में सकारात्मकता ला रही है. जेल में अधिकांश कैदी अपने अकेलेपन को किताबों से दूर कर रहे है. जेल की लाइब्रेरी में फिलहाल 1000 से अधिक किताबें हैं जो कैदियों की दोस्त बन गई हैं. कई कैदी किताबें पढ़ने के इतने शौकीन है कि एक किताब पढ़ते ही वे दूसरी किताब मांग लेते हैं.
80 में से 70 कैदी किताबें बढ़ने के शौक़ीन: अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के अधीक्षक पारसमल जांगिड़ बताते हैं कि सामान्य जेलों के मुकाबले यहां के कायदे-कानून बेहद सख्त हैं. जगन गुर्जर हत्याकांड की घटना के बाद सुरक्षा रणनीति में व्यापक बदलाव किए गए हैं. पहले जहां एक बैरक में दो या तीन कैदी साथ रहते थे, वहीं अब सुरक्षा के लिहाज से अधिकांश कैदियों को अलग-अलग कोठरियों में रखा गया है. वर्तमान में इस जेल की कुल क्षमता 264 बंदियों की है, जिसके मुकाबले यहां प्रदेशभर से चिन्हित कर लाए गए 80 हार्डकोर अपराधी बंद हैं.
उन्होंने बताया कि जेल में कैदियों के मनोरंजन के लिए कोई साधन नहीं है. यही वजह है कि जेल में खाली बैठे अपराधियों के जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए जेल की लाइब्रेरी कारगर साबित हो रही है. अधीक्षक जांगिड़ के अनुसार, सबसे सुखद और हैरान करने वाली बात यह है कि इन 80 में से 70 कैदी नियमित रूप से किताबें और पत्रिकाएं पढ़ रहे हैं. वहीं अखबारों और मैगजीन के जरिए बाहरी दुनिया के हाल चाल भी कैदी जान पा रहे हैं. जांगिड़ बताते हैं कि जेल नियमों के अनुसार कैदी लाइब्रेरी में नहीं आते बल्कि उन तक जेल प्रहरियों के माध्यम से किताबें पहुंचाई जाती हैं, जब वह किताब पढ़ लेते हैं तो अन्य किताब की डिमांड करते हैं.
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कैदियों को प्रेरक कहानियों की किताबें ज्यादा पसंद : जेल में स्थापित इस विशेष लाइब्रेरी की नींव करीब ढाई साल पहले जेल अधीक्षक पारसमल जांगिड़ के प्रयासों और किशनगढ़ के एक भामाशाह (दानदाता) के सहयोग से रखी गई थी. वर्तमान में इस लाइब्रेरी में 1000 से अधिक चुनिंदा पुस्तकें मौजूद हैं. हाल ही में जेल महानिदेशालय ने भी कैदियों की इस सकारात्मक रुचि को देखते हुए 200 नई पुस्तकें भिजवाई हैं. लाइब्रेरी में रखी जाने वाली किताबों के चयन पर विशेष ध्यान दिया जाता है. जेल प्रशासन यह सुनिश्चित करता है कि यहां ऐसी कोई भी सामग्री न पहुंचे जो हिंसा, नफरत, बदले की भावना या अपराध को बढ़ावा देती हो.
इन किताबों में आध्यात्मिक, प्रेरक कहानियां, महापुरुषों की जीवनियां, व्यक्तित्व विकास, काव्य और उपन्यास आदि की किताबें लाइब्रेरी में है. इनमें महापुरुषों में महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस समेत कई स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानी एवं महाराणा प्रताप वीर शिवाजी जैसे महान योद्धा और उनके, मातृभूमि के प्रति प्रेम, स्वाभिमान और शौर्य को किताब में कैदी पढ़ते हैं. अधीक्षक जांगिड़ बताते हैं कि बंदियों को सबसे ज्यादा छोटी और रोचक प्रेरक कहानियां आकर्षित करती हैं, जो उन्हें अंदर से झकझोरती हैं और सही-गलत का बोध कराती हैं.
दिन में किताबों में व्यस्त रहते है कैदी: जेल अधीक्षक पारसमल जांगिड़ ने बताया कि सुरक्षा कारणों के चलते जेल की इन तन्हा कोठरियों के भीतर बिजली और लाइट के पॉइंट नहीं दिए गए हैं. ऐसे में कैदी दिनभर खिड़की से आने वाली प्राकृतिक सूर्य की रोशनी में ही किताबों का अध्ययन करते हैं. सुबह सूरज उगने के साथ किताबों का सिलसिला शुरू होता है, जो शाम ढलने तक अनवरत चलता है. वहीं, कैदियों के मानसिक तनाव को कम करने और बाहरी दुनिया से जोड़े रखने के लिए बैरकों के बाहर कॉमन स्पीकर लगाए गए हैं, जिन पर सुबह और शाम के वक्त आकाशवाणी और एफएम का प्रसारण सुनाया जाता है. इसके अलावा कैदी दैनिक समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के माध्यम से देश-दुनिया की घटनाओं से भी अपडेट रहते हैं.
कुख्यात गैंगस्टर और चर्चित मामलों के आरोपी भी पढ़ते हैं धार्मिक पुस्तकें : पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में संलिप्त रहा हार्डकोर अपराधी सचिन थापन जेल में नियमित रूप से धार्मिक और गंभीर साहित्यिक पुस्तकें पढ़ रहा है. वहीं कुख्यात डकैत जगन सिंह की जेल में हत्या का आरोपी विष्णु सिंह अपना अधिकांश समय अध्ययन में बिताता है. वह जेल कैंटीन से मिली नोटबुक और पेन की मदद से किताबों के अहम विचारों को डायरी में दर्ज करता है. उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल टेलर हत्याकांड के आरोपी रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद भी अपनी कोठरियों में धार्मिक और दार्शनिक पुस्तकें पढ़कर समय बिता रहा है. कोटा का गैंगस्टर अमन बच्चा, गोगामेडी हत्याकांड के आरोपी रामवीर, उधम सिंह, अशोक, भीलवाड़ा में कांस्टेबल की हत्या के आरोप में कुख्यात तस्कर राजू फौजी समेत कई हार्डकोर अपराधी जेल में है जो किताबें बढ़कर अपना समय गुजारते है.
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किताबों के निरंतर अध्ययन ने कई बंदियों के भीतर छिपे लेखक को भी जगा दिया है. कैदी अब सिर्फ पाठक नहीं रहे, बल्कि अपने जीवन के कड़वे अनुभवों, गलतियों और पछतावे को कागजों पर उकेर रहे हैं. हाल ही में इसी जेल में बंद हार्डकोर अपराधी योगेश चारणवासी अपनी लिखी पुस्तक "जेल में ब्रांडेड कफन" को लेकर चर्चा में आया था. योगेश ने जेल में रहते हुए ही निरंतर अध्ययन से प्रेरित होकर यह किताब लिखी थी, जो बाद में ऑनलाइन प्रकाशित भी हुई. बताया जा रहा है कि योगेश अब अपनी दूसरी किताब की पांडुलिपि तैयार कर रहा है.
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