शहरों के अंदर फंसे हाईवे पर सरकार का फैसला: मार्गाधिकार दोबारा तय होगा, अटकी कॉलोनियों को राहत
शहरों के अंदर फंसे हाईवे पर सरकार का फैसला: मार्गाधिकार दोबारा तय होगा, अटकी कॉलोनियों को राहत नए आदेश के अनुसार जिन क्षेत्रों में पहले से निर्माण है, वहां 70% तक विक्रय योग्य क्षेत्र के आधार पर नियमन किया जा सकेगा. Publ…

सौजन्य से:- ETV Bharat
शहरों के अंदर फंसे हाईवे पर सरकार का फैसला: मार्गाधिकार दोबारा तय होगा, अटकी कॉलोनियों को राहत
नए आदेश के अनुसार जिन क्षेत्रों में पहले से निर्माण है, वहां 70% तक विक्रय योग्य क्षेत्र के आधार पर नियमन किया जा सकेगा.
Published : August 11, 2026 at 11:59 AM IST
जयपुर: शहरों के अंदर से गुजर रहे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के साथ ही अन्य प्रमुख सड़कों की चौड़ाई और मार्गाधिकार (Right of Way) को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग ने ऐसे मामलों में मार्गाधिकार को दोबारा तय करने के निर्देश दिए हैं. राजस्थान के कई शहरों में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग के बाईपास बन जाने के बाद पुराने हाईवे का हिस्सा शहर के अंदर रह गया है. इसके बावजूद पुराने हाईवे की चौड़ाई के आधार पर ही मास्टर प्लान में सड़क के लिए जमीन आरक्षित है. कई जगह सड़क के दोनों ओर निर्माण भी हो चुका है. ऐसे मामलों में अब पुराने मार्गाधिकार की समीक्षा कर उसे वास्तविक स्थिति के अनुसार तय किया जाएगा
स्थानीय स्तर पर होगा पुनर्निर्धारण : डीएलबी डायरेक्टर जूईकर प्रतीक चंद्रशेखर ने बताया कि सड़कों के मार्गाधिकार का दोबारा निर्धारण स्थानीय एम्पावर्ड कमेटी करेगी. इसके बाद संशोधित मार्गाधिकार के अनुसार ही संबंधित जमीन पर योजनाओं और भूखंडों का नियमन किया जा सकेगा. उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि मास्टर प्लान में राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग का मार्गाधिकार केंद्र सरकार की ओर से तय मापदंडों के आधार पर है और उसका डीनोटिफिकेशन भारत सरकार कर चुकी है, तो मार्गाधिकार में बदलाव के लिए मास्टर प्लान में संशोधन जरूरी नहीं होगा.
पहले से बनी कॉलोनियों को भी राहत : नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग के आदेश में उन कॉलोनियों और योजनाओं का भी जिक्र है, जिनका नियमन पहले ही राजमार्ग की सीमा को छोड़कर किया जा चुका है. ऐसे मामलों में बचे हुए भूखंडों के पट्टे निर्धारित नए मार्गाधिकार के अनुसार जारी किए जा सकेंगे. जरूरत पड़ने पर भूखंडों के क्षेत्रफल में भी संशोधन किया जा सकेगा. वहीं, यदि पहले स्वीकृत मानचित्र में सड़क का मार्गाधिकार वर्तमान में तय मार्गाधिकार से ज्यादा है, तो ज्यादा वाले मार्गाधिकार को ही बनाए रखना अनिवार्य होगा.
90 फीसदी से अधिक निर्माण वाले मामलों में भी राहत: सुओमोटो के तहत विकास समितियों से पहले मंजूर ले-आउट प्लान में जहां वर्तमान में निर्माण हो चुका है, वहां नए सड़क मार्गाधिकार के अनुसार मानचित्र में संशोधन किया जा सकेगा. हालांकि, ऐसे मामलों में अधिकतम 70 प्रतिशत तक विक्रय योग्य क्षेत्रफल के अनुसार ही कार्रवाई करने की अनुमति होगी. इसके अलावा जिन योजनाओं या कॉलोनियों के रास्ते में कुछ भूखंडों के पट्टे जारी हो चुके हैं और कुछ के अभी जारी नहीं हुए हैं, वहां बाकी बचे भूखंडों के पट्टे भी मार्गाधिकार में छूट देते हुए प्राथमिकता से जारी किए जा सकेंगे.
सरकारी जमीन बचने पर सड़क का हिस्सा मानी जाएगी : सरकार ने ये भी साफ किया है कि यदि सड़क के मार्गाधिकार और प्रस्तावित भूखंड के बीच सरकारी जमीन आती है या अतिरिक्त जमीन बचती है, तो उस जमीन को भी सड़क के मार्गाधिकार का हिस्सा माना जाएगा. कुल मिलाकर सरकार के इस आदेश से उन शहरी इलाकों में पुराने हाईवे के कारण फंसे भूखंडों और कॉलोनियों के नियमन का रास्ता साफ हो सकता है, जहां बाईपास बनने के बाद सड़क की वास्तविक स्थिति बदल चुकी है.
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