राजस्थान निकाय-पंचायत चुनाव, ओबीसी आयोग आज अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा
राजस्थान निकाय-पंचायत चुनाव, ओबीसी आयोग आज अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा ओबीसी आयोग को अपनी रिपोर्ट सरकार को 3 महीने में देनी थी, लेकिन आयोग को अपनी रिपोर्ट देने में डेढ़ साल का समय लग गया. Published : August 5, 2026 at…

सौजन्य से:- ETV Bharat
राजस्थान निकाय-पंचायत चुनाव, ओबीसी आयोग आज अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा
ओबीसी आयोग को अपनी रिपोर्ट सरकार को 3 महीने में देनी थी, लेकिन आयोग को अपनी रिपोर्ट देने में डेढ़ साल का समय लग गया.
Published : August 5, 2026 at 10:00 AM IST
जयपुर : निकाय-पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए गठित ओबीसी (राजनीतिक) आयोग आज अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को रिपोर्ट सौंपेगी. आयोग की ओर से 10 जुलाई से प्रदेश में राजधारा सर्वे मोबाइल ऐप के जरिए ओबीसी परिवारों की जानकारी ली गई थी. सर्वे के मुताबिक प्रदेश में 3.63 करोड़ ओबीसी आबादी है. इस काम में प्रदेश भर में 50 हजार से ज्यादा कार्मिकों ने सर्वे किया था.
आज राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण वर्गीकरण का रास्ता साफ होगा. आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यह सर्वे किया है, जिसके लिए सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग ने मोबाइल ऐप तैयार किया था. इस रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण तय होगा. चर्चा है कि निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण वर्गीकरण की लॉटरी 15 अगस्त तक निकाली जा सकती है. इसके लिए पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं.
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दोनों ही विभागों के दिशा निर्देशों के बाद जिला कलेक्ट्रेट में जिला स्तर पर वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी. लॉटरी निकालने के समय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे. लॉटरी के आधार पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी वर्ग, महिला के लिए वार्डों का आरक्षण किया जाएगा. लॉटरी के आधार पर वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग की ओर से राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने की सिफारिश भेजी जाएगी. माना जा रहा है कि अगस्त माह के ही अंतिम सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो सकती है.
तीन माह में देनी थी रिपोर्ट, लग गए डेढ़ साल : वहीं, प्रदेश में निकाय-पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए गठित ओबीसी आयोग का गठन 2025 में हुआ था. गठन के बाद ही ओबीसी आयोग को अपनी रिपोर्ट सरकार को 3 महीने में देनी थी, लेकिन आयोग को अपनी रिपोर्ट देने में डेढ़ साल का समय लग गया. आयोग का कार्यकाल तीन बार बढ़ाना पड़ा. आयोग का कार्यकाल पहली बार दिसंबर 2025 तक बढ़ाया गया. दूसरा कार्यकाल 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया. उसके बाद तीसरा कार्यकाल 30 सितंबर 2026 तक किया गया.
प्रदेश में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए राज्य सरकार ने 9 मई 2025 को सेवानिवृत्ति जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी की अध्यक्षता में ओबीसी आयोग का गठन किया था. मोहन मोरवाल, प्रोफेसर राजीव सक्सेना और एडवोकेट गोपाल कृष्ण और पवन मंडाविया को सदस्य बनाया गया था. ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की देरी को लेकर विपक्ष की ओर से लगातार यह आरोप लगाए जाते थे कि राज्य सरकार जानबूझकर ओबीसी आयोग को संसाधन उपलब्ध नहीं करा रही है, जिससे कि ओबीसी आयोग समय पर अपने रिपोर्ट नहीं दे सकी, क्योंकि सरकार चुनाव कराने से बच रही है. वहीं, प्रदेश में निकाय-पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने को लेकर हाईकोर्ट ने भी कई बार सख्त रुख अपनाया था और सरकार को निकाय पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए थे.
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