अजमेर में जलभराव की समस्या: मानसून सिर पर, लेकिन नालों की सफाई का काम अभी भी अधूरा
अजमेर में जलभराव की समस्या: मानसून सिर पर, लेकिन नालों की सफाई का काम अभी भी अधूरा 4 दिन पहले हुई बारिश ने अजमेर में जलभराव की समस्या का समाधान करने के दावों की पोल खोल कर रख दी है. Published : July 9, 2026 at 6:28 PM IS…

सौजन्य से:- ETV Bharat
अजमेर में जलभराव की समस्या: मानसून सिर पर, लेकिन नालों की सफाई का काम अभी भी अधूरा
4 दिन पहले हुई बारिश ने अजमेर में जलभराव की समस्या का समाधान करने के दावों की पोल खोल कर रख दी है.
Published : July 9, 2026 at 6:28 PM IST
अजमेर: प्रदेश में मानसून की एंट्री होने वाली है. किसानों को बारिश का इंतजार है. वहीं कई ऐसे इलाके भी हैं, जो अच्छी बारिश की आहट से ही सिहर जाते हैं. शहर में ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जहां प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के कारण बारिश इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए मुसीबत बन जाती है. 4 दिन पहले हुई अच्छी बारिश ने जल निकासी को लेकर किए गए सभी दावों की पोल खोल दी है. यहां जलभराव की स्थित पूर्व की तरह ही है. हालांकि एस्केप चैनल को नगर निगम ने साफ करवाया है, लेकिन यह कार्य अभी 60 फीसदी ही हो पाया है. इसके अलावा शहर के कई नाले गंदगी से अटे पड़े हैं, जो बारिश होने पर जलभराव का कारण बनते है.
सफाई के दावों की खुली पोल: अजमेर नगर निगम क्षेत्र में 80 वार्ड हैं. इन वार्डो में 290 छोटे और बड़े नाले हैं. मानसून से पहले अजमेर शहर के सभी नालों और एस्केप चैनल की सफाई का ठेका नगर निगम देती है. इस बार भी सफाई के लिए 6 एजेंसियों को नालों की सफाई का काम 70 लाख में सौंपा है. एक माह से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी यह एजेंसियां 60 फीसदी नालों की ही सफाई कर पाई है. 4 दिन पहले हुई बारिश ने अजमेर में जलभराव की समस्या का समाधान करने के दावों की पोल खोल कर रख दी है. कई जगहों पर जलभराव से लोग परेशान होते हुए देखे गए. नालों की सफाई नहीं होने के कारण निचली बस्तियों में जलभराव होने की संभावना इस बार भी नजर आ रही है. टेंडर प्रक्रिया में देरी और सफाई कर्मियों की हड़ताल के कारण नालों की सफाई का काम देरी से शुरू हुआ, जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया.
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निचली बस्तियों में भरता है पानी: अजमेर शहर के बीच खूबसूरत आनासागर झील भी है. झील से लगातार पानी की निकासी एस्केप चैनल में की जा रही है. यह आनासागर झील से पानी एस्केप चैनल से शहर के बीच से होकर दोराई, तबीजी और पीसांगन होते हुए गोविंदगढ़ बांध पहुंचता है. झील के पानी की निकासी के कारण एस्केप चैनल में कचरा बहकर आगे चला गया है. लेकिन एस्केप चैनल से मिट्टी कुछ जगह से ही निकाली गई है. बारिश के दिनों में एस्केप चैनल उफान मारते हैं और निचली बस्तियों में पानी भर जाता है.
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'नहीं लगता ये स्मार्ट सिटी है...': श्री अजयमेरु व्यापारिक महासंघ के सचिव रमेश लालवानी कहा कि अजमेर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला, लेकिन कहीं से भी अजमेर स्मार्ट सिटी नजर नहीं आ रहा है. अजमेर की बसावट ऐसी है कि चारों तरफ पहाड़ियां हैं जिससे बरसात का पानी तेजी से आता है. आनासागर झील से ओवरफुल पानी एस्केप चैनल में जाता है. एस्केप चैनल की बीच में कई जगह से दीवारें टूटी हुई है. एस्केप चैनल कई कच्ची बस्तियों और रिहायशी क्षेत्र से होकर गुजरता है. बारिश में एस्केप चैनल फुल हो जाता है जिस कारण पानी बस्तियों में घुस जाता है. अजमेर में पटेल स्टेडियम के सामने, जेएलएन मार्ग, मेडिकल कॉलेज चौराहा, स्टेशन रोड, पुष्कर रोड, फायसागर रोड, नगरा, मार्टिंडल ब्रिज के नीचे, गुलाब बाड़ी, आम का तालाब आदि क्षेत्र है, जहां जलभराव की समस्या रहती है. महासंघ की ओर से भी शहर के नालों की सफाई को लेकर लिखकर प्रशासन को दिया हुआ है.
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जेएलएन अस्पताल भी नहीं अछूता: स्थानीय सुरेश तंबोली बताते हैं कि बरसात के दिनों में अजमेर के कई क्षेत्रों में जलभराव की समस्या रहती है. तेज बारिश से ही लोग सिहर जाते हैं कि अब उन्हें नुकसान झेलना पड़ेगा. तंबोली ने कहा कि कई बड़े नाले जिनको छोटा करके नालियां बना दी गई हैं. इन नालियों से पानी उफन कर सड़क पर जमा होता है और दुकानों–घरों में घुस जाता है. कई जगह पर रोड भी छोटी कर दी गई है. जेएलएन अस्पताल में बरसात के दिनों में पानी भर जाता है. मरीज इलाज के लिए पानी में होकर पहुंचते हैं. अजमेर को स्मार्ट सिटी कहा जाता है, लेकिन यह किसी भी सूरत में अजमेर स्मार्ट सिटी नहीं है. आनासागर झील में भी शहर के गंदे नालों का पानी जाता है. जिसमें तेज बदबू आती है. चार दिन पहले आई बरसात ने शासन–प्रशासन के जलभराव के समाधान के दावों की पोल खोल दी है.
इनका कहना है: नगर निगम आयुक्त नित्या के. ने बताया कि नालों की सफाई का कार्य चल रहा है. सर्किल इंस्पेक्टर और जमादारों से उनके क्षेत्र में नालों की सफाई को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है. नालों की सफाई कार्य की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. वहीं नालों से निकलने वाले कचरे को भी तत्काल उठाया जा रहा है. कोशिश है कि समय रहते नालों की सफाई हो जाए और जलभराव की समस्या ना हो.
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