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राजस्थान जल आत्मनिर्भरत का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा, जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान

राजस्थान सरकार जल आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया है।

Navbharat Times के अनुसार29 जुलाई 2026 को 06:43 am बजे
राजस्थान जल आत्मनिर्भरत का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा, जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान

सौजन्य से:- Navbharat Times

Rajasthan Cm Bhajanlal Sharma Addresses Sp Water Conclave Sp Water Security Projects

राजस्थान बनेगा जल आत्मनिर्भरता का राष्ट्रीय मॉडल, जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

Authored by: स्पॉटलाइट टीम|SPOTLIGHT•

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जयपुर में आयोजित ‘राजस्थान वॉटर कॉन्क्लेव’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश जल प्रबंधन और जल आत्मनिर्भरता का राष्ट्रीय मॉडल बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौते, अमृत 2.0 और अटल भू-जल योजना जैसी प्रमुख परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजस्थान जल प्रबंधन और जल आत्मनिर्भरता का राष्ट्रीय मॉडल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद से ही जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रामजल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते जैसे ऐतिहासिक निर्णयों को अमलीजामा पहनाया गया है। इन कोशिशों से राज्य में पेयजल सुरक्षा, सिंचाई क्षमता और जल संरक्षण को नई गति मिली है।

द इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा आयोजित राजस्थान वॉटर कॉन्क्लेव

जयपुर में द इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा आयोजित राजस्थान वॉटर कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां जल संरक्षण के प्रति हमारे प्रयासों के आधार पर हमारा मूल्यांकन करेंगी। इसलिए जल संचयन और जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे पानी के महत्व को समझते हुए इसके संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल भविष्य सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार जल आत्मनिर्भरता की दिशा में व्यापक स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि रामजल सेतु लिंक परियोजना प्रदेश के जल इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित होगी। इस परियोजना के जरिए 17 जिलों में पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित होगी और लगभग 4.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा पहुंचाई जाएगी। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों को भी राहत मिलेगी।

राजस्थान वॉटर कॉन्क्लेव

उन्होंने कहा कि यमुना जल समझौता भी प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसके तहत लगभग 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से 1,917 क्यूसेक यमुना का पानी शेखावाटी क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा। इससे सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिलों के लगभग 75 लाख लोगों को स्थायी पेयजल राहत मिलेगी और दशकों से चली आ रही जल संकट की समस्या का समाधान होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पानी के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। उदयपुर शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए देवास तृतीय और देवास चतुर्थ परियोजनाओं का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही पश्चिमी राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) के नहरी क्षेत्रों का सुदृढ़ीकरण (Strengthening) किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नर्मदा जल विस्तार और परवन बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना जैसे प्रयास भी प्रदेश की लंबे समय के लिए जल सुरक्षा को मजबूत करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण में जनभागीदारी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अमृत 2.0 के तहत 178 शहरी निकायों में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ₹5,100 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से कई परियोजनाओं पर काम शुरू हो गया है। वहीं जल जीवन मिशन के माध्यम से 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अटल भू-जल योजना के अंतर्गत ₹485 करोड़ के जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य पूरे किए गए हैं, जिससे ग्राउंड वॉटर के स्तर को सुधारने में सहायता मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण में जनभागीदारी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान और वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से जल स्रोतों का संरक्षण, जल संचयन, जनजागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं के साथ-साथ समाज की भागीदारी ही राजस्थान को जल समृद्ध राज्य बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही विभिन्न संस्थाओं और विशेषज्ञों से संवाद भी किया। उन्होंने उनके अनुभवों, नवाचारों और सुझावों की जानकारी ली और कहा कि जल संरक्षण वर्तमान और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने विशेषज्ञों और संस्थाओं से आह्वान किया कि वे स्थानीय जल चुनौतियों को समझते हुए आधुनिक तकनीक आधारित मॉनिटरिंग, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और इनोवेटिव सॉल्यूशंस से जल संरक्षण और जल प्रबंधन को और प्रभावी बनाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि सरकार, विशेषज्ञों और समाज के साझा प्रयासों से ही राजस्थान जल आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि राजस्थान की संस्कृति में जल सिर्फ एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि सभ्यता, समृद्धि और सुरक्षित भविष्य का आधार है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जल सुरक्षा को विकास की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है तथा वर्षों से लंबित जल परियोजनाओं को गति दी है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है।

जल संरक्षण के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अभय कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग, हेमंत कुमार गेरा, प्रमुख सचिव, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भूजल विभाग, तथा जल संरक्षण के क्षेत्र से जुड़े अनेक विशेषज्ञ कॉन्क्लेव में उपस्थित रहे।

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