जयपुर: विवाद के बाद स्कूल शिफ्ट, शिक्षक संघ ने चेताया-बाहरी दखल और शिक्षकों का अपमान बर्दाश्त नहीं
जयपुर: विवाद के बाद स्कूल शिफ्ट, शिक्षक संघ ने चेताया-बाहरी दखल और शिक्षकों का अपमान बर्दाश्त नहीं महासंघ ने चेताया कि सुधार के नाम पर विद्यालयों में अराजकता और शिक्षकों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. Published : Aug…

सौजन्य से:- ETV Bharat
जयपुर: विवाद के बाद स्कूल शिफ्ट, शिक्षक संघ ने चेताया-बाहरी दखल और शिक्षकों का अपमान बर्दाश्त नहीं
महासंघ ने चेताया कि सुधार के नाम पर विद्यालयों में अराजकता और शिक्षकों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
Published : August 22, 2026 at 9:24 PM IST
जयपुर: राजधानी जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा कंवरपुरा गांव के सरकारी स्कूल के निरीक्षण को लेकर शुक्रवार के विवाद के बाद शनिवार सुबह स्कूल को मौजूदा परिसर से करीब 50 मीटर दूर दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया. इधर, पूरे विवाद में राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब शैक्षिक महासंघ की भी एंट्री हो गई. मामले को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने कड़ी आपत्ति जताई एवं शिक्षकों की सुरक्षा और सरकारी विद्यालयों में बाहरी लोगों के अनाधिकृत हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की. महासंघ ने चेताया कि सुधार के नाम पर विद्यालयों में अराजकता और शिक्षकों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
बाहरी हस्तक्षेप से खफा शिक्षक : उधर, सरकारी स्कूलों में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने स्कूलों को बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त रखने और शिक्षकों के राजनीतिक इस्तेमाल का पुरजोर विरोध किया है. महासंघ के प्रदेश संगठन मंत्री उमराव लाल वर्मा ने कहा कि निरीक्षण और सुधार के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के विद्यालय पहुंचने, स्कूल की व्यवस्था में हस्तक्षेप करने और शिक्षकों के साथ कथित अमर्यादित व्यवहार की जानकारी सामने आई है. ये केवल एक विद्यालय का विषय नहीं है, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक सरकारी विद्यालय, शिक्षक और विद्यार्थी की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा मामला है.
सियासी मंच नहीं बनने दिया जाए: वर्मा ने कहा कि विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण का केंद्र है. इसे किसी व्यक्ति, संगठन या फिर राजनीतिक अभियान के प्रचार का मंच नहीं बनने दिया जा सकता. किसी विद्यालय में व्यवस्था की कमी है या शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर शिकायत है तो उसके समाधान के लिए शिक्षा विभाग की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद है. विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति, अभिभावक, स्थानीय समुदाय और शिक्षा अधिकारी मिलकर समस्याओं का समाधान कर सकते हैं.
शिक्षकों के सम्मान से समझौता नहीं : महासंघ ने सवाल उठाया कि निरीक्षण के नाम पर 50 से 100 लोगों का समूह लेकर विद्यालय पहुंचने की आवश्यकता क्यों पड़ी? महासंघ के अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल ने कहा कि विद्यालय शिक्षा का केंद्र है, राजनीतिक प्रदर्शन का नहीं. शिक्षकों के साथ जिस प्रकार की भाषा और व्यवहार किया गया, वो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. शिक्षकों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है. उनके काम का मूल्यांकन विभागीय अधिकारियों की ओर से किया जाता है. शिकायत है तो विभाग में जाएं, जांच चाहिए तो अधिकृत अधिकारी से कराएं और सुधार चाहिए तो व्यवस्था के साथ मिलकर करें. किसी शिक्षक को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना या मानसिक दबाव में डालना स्वीकार नहीं किया जाएगा.
ग्रामीण बच्चों को राजनीतिक प्रयोग का हिस्सा नहीं बनाएं: उन्होंने कहा कि ग्रामीण और सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे किसी भी प्राइवेट विद्यालय के बच्चों से कम नहीं हैं. उनके सपने और अभिभावकों की उम्मीदें भी उतनी ही बड़ी हैं. ऐसे में सरकारी विद्यालयों को राजनीतिक अभियान, व्यक्तिगत लोकप्रियता या सोशल मीडिया प्रचार का माध्यम बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रदेश संयुक्त मंत्री देवेंद्र शर्मा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन वास्तव में बच्चों की शिक्षा के लिए काम करना चाहता है तो विद्यालय में पुस्तकालय, शैक्षणिक सामग्री, खेल सुविधाएं और विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन कार्यक्रम उपलब्ध कराने जैसे प्रयास करें. केवल कैमरा लेकर विद्यालय पहुंचना और फिर पूरे घटनाक्रम को प्रचार का विषय बनाना शिक्षा सुधार का विकल्प नहीं हो सकता.
शैक्षिक महासंघ ने सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें
- बगरू क्षेत्र की स्कूल की घटना की निष्पक्ष जांच कराएं और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई हों
- सरकारी विद्यालयों में बाहरी व्यक्तियों या समूहों के अनाधिकृत प्रवेश रोकने के लिए स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था करें
- शिक्षकों से अभद्रता, धमकी या उनके कार्य में अनाधिकृत हस्तक्षेप की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करें
- विद्यालयों के निरीक्षण और शैक्षणिक मूल्यांकन की प्रक्रिया केवल अधिकृत शिक्षा विभागीय व्यवस्था के माध्यम से सुनिश्चित की जाएं
- सरकारी विद्यालयों को राजनीतिक प्रचार, व्यक्तिगत लोकप्रियता या सोशल मीडिया प्रचार का मंच बनने से रोकें
महासंघ ने दी चेतावनी : महासंघ ने कहा कि वो शिक्षा सुधार का विरोधी नहीं है. संगठन चाहता है कि प्रदेश के हर सरकारी विद्यालय में बेहतर भवन, आधुनिक सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिले. इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सुधार के नाम पर अराजकता, शिक्षकों का अपमान, विद्यालयों में अनधिकृत प्रवेश, बच्चों के भविष्य के साथ राजनीति और शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिश स्वीकार नहीं होगी. ऐसा दोबारा होता है तो शिक्षक भी ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतरेंगे.
पढ़ें: अलवर: गुस्साए ग्रामीणों ने जड़ा डगडगा स्कूल के गेट पर ताला, विभाग ने तुरंत लगाए दो शिक्षक
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

जिला अंडर-19 क्रिकेट टीम जयपुर रवाना - Jaisalmer News

राजस्थान की पहली नगर निकाय अजमेर में बनी थी, आजाद भारत में 1947 में पहले अध्यक्ष थे हेमचंद सोगानी

जयपुर में मिले ब्रिक्स देशों के पर्यटन मंत्री, ट्यूरिज्म में AI का होगा इस्तेमाल


