पहली बार आधी रात में खुला राजस्थान हाईकोर्ट; क्या मामला
पहली बार आधी रात में खुला राजस्थान हाईकोर्ट; क्या मामला मुख्य न्यायाधीश की विशेष अनुमति के बाद जस्टिस सुनील बेनीवाल ने रविवार रात इस मामले की सुनवाई की। मकसूद अहमद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने याचिका दाखिल…

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पहली बार आधी रात में खुला राजस्थान हाईकोर्ट; क्या मामला
मुख्य न्यायाधीश की विशेष अनुमति के बाद जस्टिस सुनील बेनीवाल ने रविवार रात इस मामले की सुनवाई की। मकसूद अहमद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने याचिका दाखिल की थी।
राजस्थान में निकाय चुनाव के बीच रविवार की रात हाईकोर्ट में ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया। चुनाव से ठीक पहले पार्षदों और प्रत्याशियों की गिरफ्तारी की आशंका के बीच राजस्थान हाईकोर्ट में देर रात तक सुनवाई चली। रात करीब 10 बजे शुरू हुई कार्यवाही आधी रात के बाद करीब 2 बजे तक चली। कोर्ट ने हनुमानगढ़ के 9 पार्षदों समेत बीकानेर के एक पार्षद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
चुनाव से पहले गिरफ्तारी का डर, रात में पहुंचा मामला
सोमवार को होने वाले निकायों के अध्यक्ष और मेयर चुनाव से ठीक पहले कुछ पार्षदों और प्रत्याशियों के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों में गिरफ्तारी की आशंका जताई गई थी। इसी को लेकर तत्काल राहत की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं। मामला चुनाव से जुड़ा होने के कारण रविवार को ही कोर्ट में सुनवाई की व्यवस्था की गई।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के निर्देश पर रविवार को विशेष पीठों का गठन किया गया। इसके बाद अलग-अलग मामलों में सुनवाई शुरू हुई। राजस्थान हाईकोर्ट के इतिहास में रात के समय इस तरह की सुनवाई को बेहद असाधारण घटनाक्रम माना जा रहा है।
रात 10 बजे शुरू हुई सुनवाई
हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों की ओर से याचिका दाखिल होने के बाद जस्टिस नूपुर भाटी की एकलपीठ गठित की गई। रात करीब 10 बजे सुनवाई शुरू हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए तत्काल संरक्षण देने की मांग की गई।
सुनवाई देर रात तक चली। कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। चुनाव के ठीक पहले आए इस आदेश से पार्षदों को बड़ी राहत मिली।
60 सीटों के गणित के बीच मामला गरमाया
हनुमानगढ़ निकाय में कुल 60 सीटें हैं। इनमें भाजपा के पास 15 सीटें बताई गई हैं, जबकि निर्दलीय विधायक गणेश बंसल के समर्थन वाले 32 पार्षदों के जीतने का उल्लेख याचिका से जुड़े घटनाक्रम में किया गया है। गणेश बंसल को 23 साल पुराने पट्टा मामले में बीकानेर से गिरफ्तार किए जाने की बात भी सामने आई है।
ऐसे में चुनाव से ठीक पहले पार्षदों की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई थी।
बीकानेर के पार्षद को भी मिली राहत
बीकानेर में वार्ड 18 के कांग्रेस पार्षद और पूर्व यूआईटी अध्यक्ष मकसूद अहमद को भी हाईकोर्ट से राहत मिली। उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के साथ ही उन्हें मतदान करने की अनुमति दी गई।
मुख्य न्यायाधीश की विशेष अनुमति के बाद जस्टिस सुनील बेनीवाल ने रविवार रात इस मामले की सुनवाई की। मकसूद अहमद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने याचिका दाखिल की थी।
याचिका में कहा गया कि एक पुराने विवाद से जुड़े मामले में पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया है और आशंका है कि उन्हें चुनाव में वोट देने से रोकने के लिए कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने रात करीब 11:15 बजे उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
पहले भी दो मामलों में मिली थी राहत
इससे पहले रविवार को ही कोर्ट ने कुचेरा नगरपालिका, नागौर के पूर्व अध्यक्ष और पार्षद तेजपाल मिर्धा तथा श्रीविजयनगर नगरपालिका में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सुशील मीढा उर्फ बिट्ट मीठा की गिरफ्तारी पर भी अंतरिम रोक लगाई थी।
निकाय चुनाव में मेयर और सभापति के चुनाव को लेकर पहले से ही राजनीतिक सरगर्मी तेज है। अलग-अलग दलों की ओर से निर्दलीय और दूसरे दलों के पार्षदों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों के अपने-अपने दावे हैं।
अब जयपुर-जोधपुर-कोटा पर नजर
राजस्थान के तीन बड़े नगर निगमों जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर के लिए मतदान 25 सितंबर को होना है। ऐसे में रविवार रात हाईकोर्ट में हुई सुनवाई और गिरफ्तारी पर लगी रोक ने निकाय चुनाव के सियासी माहौल को और गरमा दिया है।
वहीं प्रतापगढ़ में पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना के खिलाफ राज-काज में बाधा का मामला दर्ज होने की बात सामने आई है। श्रीगंगानगर में भाजपा प्रत्याशी लक्की के समर्थकों को धमकाने के आरोप में संजय मूंदड़ा, अशोक चांडक और मुकेश की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने छापेमारी की। हालांकि अशोक चांडक को कोर्ट से राहत मिल गई।
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