जयपुर में दिवाली से पहले राख हो गईं व्यापारियों की उम्मीदें; लाखों का माल जलता देख बिलख पड़े व्यापारी
जयपुर में दिवाली से पहले राख हो गईं व्यापारियों की उम्मीदें; लाखों का माल जलता देख बिलख पड़े व्यापारी व्यापारी कमल अग्रवाल के लिए यह आग सिर्फ दुकानों में लगी आग नहीं थी, बल्कि दिवाली की उन उम्मीदों पर भी भारी पड़ी थी, जि…

सौजन्य से:- Hindustan
जयपुर में दिवाली से पहले राख हो गईं व्यापारियों की उम्मीदें; लाखों का माल जलता देख बिलख पड़े व्यापारी
व्यापारी कमल अग्रवाल के लिए यह आग सिर्फ दुकानों में लगी आग नहीं थी, बल्कि दिवाली की उन उम्मीदों पर भी भारी पड़ी थी, जिनके भरोसे उन्होंने पहले से लाखों रुपए का सामान जुटा रखा था। कमल की कॉम्पलेक्स में तीन दुकानें खुद की हैं,
जयपुर में दिवाली से ठीक पहले लगी भीषण आग ने कई कारोबारियों की महीनों की मेहनत और त्योहार के सीजन से जुड़ी उम्मीदों को एक झटके में राख कर दिया। जिस सामान को व्यापारियों ने अच्छे कारोबार की उम्मीद में लाखों रुपए खर्च कर जुटाया था, वही माल गुरुवार सुबह उनकी आंखों के सामने आग की लपटों में जलता रहा। कोई व्यापारी अपने हाथों से आंसू पोंछता रहा तो किसी परिवार के लिए नुकसान का सदमा इतना भारी पड़ा कि तबीयत बिगड़ गई।
बड़ी चौपड़ स्थित मणिहारों का कटला-सेठी कॉम्पलेक्स में सुबह करीब 7 बजे दूसरी मंजिल पर चूड़ियों के गोदाम में आग लगी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग शॉर्ट सर्किट से लगी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और करीब 25 दुकानें इसकी चपेट में आ गईं। कपड़े, प्लास्टिक का सामान, कॉस्मेटिक आइटम, चूड़ियां और दिवाली सीजन से जुड़ा सामान आग में जल गया। करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन धुआं शाम तक उठता रहा।
दिवाली के लिए भरा था माल, आंखों के सामने राख हो गया
व्यापारी कमल अग्रवाल के लिए यह आग सिर्फ दुकानों में लगी आग नहीं थी, बल्कि दिवाली की उन उम्मीदों पर भी भारी पड़ी थी, जिनके भरोसे उन्होंने पहले से लाखों रुपए का सामान जुटा रखा था। कमल की कॉम्पलेक्स में तीन दुकानें खुद की हैं, जबकि दो दुकानें किराये पर हैं। दिवाली सीजन को देखते हुए पांचों दुकानों में बड़ी मात्रा में सामान स्टॉक किया गया था।
इनमें बंदरवाल, दिवाली सजावट का सामान, धागों की गट्टियां और टेलरिंग से जुड़े सीजनल आइटम शामिल थे। आग की चपेट में उनकी तीन दुकानें आ गईं। बड़ी मात्रा में माल जलकर राख हो गया।
आग की खबर मिलते ही कमल अपनी पत्नी और बेटे प्रणव अग्रवाल के साथ मौके पर पहुंचे। दुकानें जलती देखकर कमल भावुक हो गए। कुछ देर तक वह एक कोने में बैठे रहे और लगातार आंसू पोंछते नजर आए। जिस माल को उन्होंने सीजन में बिक्री के लिए सजाकर रखा था, वह उनकी आंखों के सामने धुएं में बदल रहा था।
नुकसान देखकर पत्नी की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल ले जाना पड़ा
कॉम्पलेक्स के सेक्रेटरी राम कटारिया के मुताबिक दिवाली को देखते हुए कमल ने काफी मात्रा में सामान भरकर रखा था। आग से हुए नुकसान को देखकर कमल की पत्नी भी रोने लगीं। परिवार और रिश्तेदार उन्हें संभालते रहे, लेकिन कुछ देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और बीपी लो हो गया। उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।
कमल की हालत भी खराब होने पर परिजनों ने उन्हें घर भेज दिया। बेटे प्रणव ने बताया कि परिवार सीजनल कारोबार करता है। दिवाली पर अच्छे व्यापार की उम्मीद थी, इसलिए पहले से बड़ी मात्रा में सामान खरीदा गया था। आग वाले हिस्से में जाने की अनुमति नहीं होने के कारण परिवार अपने माल की स्थिति भी ठीक से नहीं देख सका।
व्यापारी बेबस थे, पुलिसकर्मी रास्ता बनाकर अंदर पहुंचे
एक तरफ व्यापारी अपने कारोबार को अपनी आंखों के सामने खत्म होते देखने को मजबूर थे, वहीं दूसरी तरफ पुलिस, दमकल, सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ की टीमें आग से जूझ रही थीं।
तीन मंजिला कॉम्पलेक्स के बरामदों में लोहे की जालियां लगी थीं। रास्ता संकरा था और सामान भी भरा हुआ था। ऐसे में आग वाले हिस्से तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था। माणक चौक थाने में तैनात नरेंद्र सिंह शेखावत और विक्रम सिंह ने रास्ता बनाने के लिए दीवार और लोहे की जाली तोड़ी। इसके बाद सीढ़ियों के जरिए दूसरी मंजिल तक पहुंचकर दमकलकर्मियों के लिए रास्ता बनाया गया।
धुआं आंखों में चुभता रहा, दम घुटता रहा, फिर भी नहीं रुकी टीम
दूसरी मंजिल पर जमा सामान आग बुझाने की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ था। घने धुएं के बीच दमकलकर्मी, सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ जवान लगातार ऑपरेशन में जुटे रहे। कई जगह शटर और दूसरे अवरोध तोड़कर अंदर पहुंचना पड़ा।
धुआं इतना घना था कि जवानों की आंखों में तेज जलन होने लगी। कुछ को सांस लेने में भी परेशानी हुई। तबीयत प्रभावित होने पर कुछ दमकलकर्मियों को थोड़ी देर के लिए बाहर बैठाया गया, लेकिन इसके बाद वे फिर ऑपरेशन में जुट गए। करीब सात घंटे से ज्यादा चले अभियान में टीम आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास करती रही।
नीचे के दुकानदारों को भी सताने लगा अपना माल जलने का डर
दूसरी मंजिल से उठती लपटों और धुएं ने नीचे की दुकानों में बैठे व्यापारियों की चिंता भी बढ़ा दी। ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल के दुकानदार अपने स्टाफ के साथ सामान बाहर निकालने में जुट गए। बड़े-बड़े कार्टून दुकानों और गोदामों से बाहर लाए जाने लगे।
डर था कि अगर आग नीचे तक पहुंची तो दिवाली के लिए जमा किया गया उनका माल भी राख हो जाएगा। एक तरफ दमकल की गाड़ियां आग बुझा रही थीं, दूसरी तरफ व्यापारी अपनी दुकानों से बचा हुआ सामान बाहर निकाल रहे थे।
आग बुझी, लेकिन कारोबारियों का संकट अभी बाकी
अग्निकांड के बाद व्यापारियों में कॉम्पलेक्स प्रबंधन को लेकर आक्रोश है। व्यापारियों ने प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आग ने सिर्फ सामान नहीं जलाया, बल्कि दिवाली के पूरे सीजन की तैयारियों को भी झटका दिया है।
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