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अशोक गहलोत बोले- पश्चिमी राजस्थान में सूखे की मार, घोषणाओं से नहीं चलेगा काम

अशोक गहलोत बोले- पश्चिमी राजस्थान में सूखे की मार, घोषणाओं से नहीं चलेगा काम बाड़मेर और जैसलमेर के प्रभावित क्षेत्रों में चारा डिपो और पशु शिविर शुरू नहीं हुए हैं. Published : October 8, 2026 at 5:58 PM IST जयपुरः पश्चिम…

ETV Bharat के अनुसार8 अक्टूबर 2026 को 01:05 pm बजे
अशोक गहलोत बोले- पश्चिमी राजस्थान में सूखे  की मार, घोषणाओं से नहीं चलेगा काम

सौजन्य से:- ETV Bharat

अशोक गहलोत बोले- पश्चिमी राजस्थान में सूखे की मार, घोषणाओं से नहीं चलेगा काम

बाड़मेर और जैसलमेर के प्रभावित क्षेत्रों में चारा डिपो और पशु शिविर शुरू नहीं हुए हैं.

Published : October 8, 2026 at 5:58 PM IST

जयपुरः पश्चिमी राजस्थान में सूखे और अकाल के हालात को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए तत्काल राहत कार्य शुरू करने की मांग की है. गहलोत ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में गोवंश भूख और प्यास से परेशान हैं, लेकिन राज्य सरकार केवल घोषणाएं कर रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सूखा घोषित कर चारे और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.

गहलोत ने एक बयान जारी कर कहा कि प्रदेश की मीडिया लगातार पश्चिमी राजस्थान में सूखे और अकाल की गंभीर स्थिति की तस्वीर सामने ला रही है. इसके बावजूद राहत के स्तर पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है. 30 सितंबर को मुख्यमंत्री ने बाड़मेर में चारा डिपो खोलने की घोषणा की थी, लेकिन आठ दिन बाद भी बाड़मेर और जैसलमेर के प्रभावित क्षेत्रों में चारा डिपो और पशु शिविर शुरू नहीं हुए हैं.

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23 पटवार मंडलों में प्रस्ताव, मंजूरी का इंतजारः पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि गडरारोड के स्थानीय प्रशासन ने मीडिया को बताया है कि 23 पटवार मंडलों में चारा शिविर शुरू करने के प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक इन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के सामने सूखे के हालात पहले से स्पष्ट थे, तो राहत की तैयारियां समय रहते क्यों नहीं की गईं?.

गहलोत ने आचार संहिता का हवाला दिए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि राहत कार्यों में आचार संहिता बाधा बन रही है तो सरकार को राज्य निर्वाचन आयोग से अनुमति मांगनी चाहिए. उन्होंने पूछा कि आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार ने आवश्यक तैयारियां क्यों नहीं की?.

20 से ज्यादा गांवों में गायों की मौत की खबरः गहलोत ने गोवंश की मौतों पर चिंता जताते हुए कहा कि बाड़मेर के गडरारोड क्षेत्र के 20 से ज्यादा गांवों में गायों की मौत हो चुकी है. हालात इतने गंभीर बताए जा रहे हैं कि कुछ जगहों पर गायें प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर हैं. उन्होंने दावा किया कि सीमावर्ती गांवों में चारे के दाम तीन गुना तक बढ़ गए हैं और जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं. ऐसे में सरकार को चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ उसकी कीमतों पर भी निगरानी रखनी चाहिए.

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गौशालाओं के भुगतान का मुद्दा भी उठायाः पूर्व मुख्यमंत्री ने गौशालाओं को मिलने वाले अनुदान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार की ओर से बड़े पशु के लिए प्रतिदिन 50 रुपए दिए जा रहे हैं, जबकि गौशाला संचालकों के अनुसार एक पशु पर रोजाना 100 से 150 रुपये तक खर्च हो रहा है. सरकार के आंकड़ों के अनुसार 9 सितंबर तक करीब 383 करोड़ रुपए के अनुदान बिलों का भुगतान लंबित था. गहलोत ने सरकार से गौशालाओं के लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की.

भाजपा विधायक भी कर रहे सूखा घोषित करने की मांगः गहलोत ने कहा कि हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जैसलमेर के भाजपा विधायक भी सरकार से तत्काल सूखा घोषित करने की मांग कर रहे हैं. इसके बावजूद सरकार की ओर से अभी तक सूखा घोषित नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में पशुपालकों और गोवंश के सामने चारे और पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में राहत कार्यों में देरी स्थिति को और गंभीर बना सकती है.

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