MP Weather News: मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, राजस्थान का सिस्टम खत्म, अब 7 दिन नहीं बनेगा नया डिप्रेशन, जानिए कहां होगी बारिश
सबसे अधिक चिंता पूर्वी मध्य प्रदेश को लेकर है। यहां सामान्य से 19 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। रीवा जिले में सबसे अधिक 64 प्रतिशत बारिश की कमी रिकॉर्ड हुई है। इसके अलावा मैहर, सीधी, सागर, सिंगरौली, मंडला, नरसिंहपुर, प…

सौजन्य से:- Navbharat Times
सबसे अधिक चिंता पूर्वी मध्य प्रदेश को लेकर है। यहां सामान्य से 19 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। रीवा जिले में सबसे अधिक 64 प्रतिशत बारिश की कमी रिकॉर्ड हुई है। इसके अलावा मैहर, सीधी, सागर, सिंगरौली, मंडला, नरसिंहपुर, पन्ना, छतरपुर, कटनी और जबलपुर जैसे जिले भी वर्षा अभाव वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। इन जिलों में खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
इसके विपरीत पश्चिमी एमपी में मानसून अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है। बुरहानपुर, खरगोन, देवास, खंडवा, बड़वानी और इंदौर जैसे जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। अच्छी वर्षा के कारण इन क्षेत्रों में जलाशयों का जलस्तर बढ़ा है और मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी हुई है।
पिछले 24 घंटे में कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश
2 अगस्त सुबह 8:30 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार आगर-मालवा के बड़ौद में 45 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इसके बाद मंदसौर के मल्हारगढ़ में 42 मिमी, अलीराजपुर के कठीवाड़ा में 36 मिमी, अलीराजपुर में 26.4 मिमी, नागदा में 26.2 मिमी, सोयत कलां में 24 मिमी और रतलाम में 22 मिमी बारिश हुई। वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश में अधिकांश स्थानों पर हल्की बारिश ही दर्ज की गई।
कई जिलों में चली तेज हवाएं
गरज-चमक के साथ प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाएं भी चलीं। मुरैना में सबसे अधिक 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली। ग्वालियर में 47 किमी, जबलपुर में 37 किमी, सागर में 33 किमी तथा भिंड, बुरहानपुर, आगर और टीकमगढ़ में 30 से 31 किमी प्रति घंटे की रफ्तार दर्ज की गई।
अगले सात दिन नहीं बनेगा नया डिप्रेशन
शैलेन्द्र कुमार नायक के अनुसार दक्षिण-पश्चिम राजस्थान पर बना निम्न दाब क्षेत्र अब लगभग समाप्त हो चुका है। नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र के ट्रॉपिकल वेदर आउटलुक के मुताबिक अगले 168 घंटे यानी सात दिनों तक बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में किसी नए निम्न दाब क्षेत्र, डिप्रेशन या चक्रवात बनने की संभावना नहीं है।
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ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश में होने वाली बारिश मुख्य रूप से मानसून द्रोणी, स्थानीय संवहनीय गतिविधियों और ऊपरी वायुमंडलीय परिसंचरण पर निर्भर रहेगी। हालांकि 4 अगस्त के बाद उत्तर-पश्चिम भारत में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिसका सीमित प्रभाव मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है।
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किसानों की बढ़ी चिंता, इसका असर फसलों पर पड़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि अगस्त के मध्य तक बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मानसूनी तंत्र विकसित नहीं होता है, तो पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा की कमी और बढ़ सकती है। इसका असर धान, सोयाबीन और मक्का जैसी खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है। वहीं मालवा और निमाड़ क्षेत्र में अच्छी बारिश से फिलहाल खेती और जल संसाधनों की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है।
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