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पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान के हर OBC परिवार तक पहुंचेगी टीम; जानिए क्यों है यह सर्वे इतना खास

पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान के हर OBC परिवार तक पहुंचेगी टीम; जानिए क्यों है यह सर्वे इतना खास राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 31 जुलाई तक पंचायत और शहरी निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि मौजूदा परिस्थित…

Hindustan के अनुसार10 जुलाई 2026 को 04:16 am बजे
पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान के हर OBC परिवार तक पहुंचेगी टीम; जानिए क्यों है यह सर्वे इतना खास

सौजन्य से:- Hindustan

पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान के हर OBC परिवार तक पहुंचेगी टीम; जानिए क्यों है यह सर्वे इतना खास

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 31 जुलाई तक पंचायत और शहरी निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में इस समय सीमा के भीतर चुनाव होना मुश्किल माना जा रहा है।

राजस्थान में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) परिवारों का बड़ा सर्वे शुक्रवार (10 जुलाई) से शुरू होने जा रहा है। राज्य ओबीसी आयोग की ओर से 10 जुलाई से 23 जुलाई तक प्रदेशभर में घर-घर जाकर ऑनलाइन सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा और उसी रिपोर्ट के बाद स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण का अंतिम निर्धारण होगा। इसके बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनावों की घोषणा करेगा।

आयोग ने सरकार को लिखा पत्र, तबादलों से सर्वे प्रभावित होने की आशंका

सर्वे शुरू होने से ठीक पहले ओबीसी आयोग ने सरकार को चेतावनी दी है कि कर्मचारियों के तबादलों की वजह से सर्वे का काम प्रभावित हो सकता है। आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि वर्तमान में तबादलों पर लगी रोक 10 जुलाई तक हटाई गई है और कई विभागों में बड़े स्तर पर ट्रांसफर किए जा रहे हैं।

आयोग का कहना है कि यदि सर्वे में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को मौजूदा स्थान से हटाकर नई जगह भेज दिया गया तो सर्वे कार्य बाधित हो सकता है। इससे न केवल सर्वे समय पर पूरा होने में दिक्कत आएगी, बल्कि आयोग की रिपोर्ट भी तय समय पर तैयार नहीं हो पाएगी।

कलेक्टरों ने नियुक्त किए नोडल अधिकारी और प्रगणक

ओबीसी आयोग को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार स्थानीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण से जुड़ी सिफारिशें तैयार करनी हैं। इसके लिए सभी जिला कलेक्टरों ने नोडल अधिकारी, सहायक नोडल अधिकारी और प्रगणकों की नियुक्ति कर दी है।

ये कर्मचारी 10 जुलाई से 23 जुलाई तक प्रदेशभर में ओबीसी परिवारों के घर-घर जाकर ऑनलाइन सर्वे करेंगे। सर्वे के दौरान परिवारों से निर्धारित जानकारी जुटाई जाएगी, जिसके आधार पर आयोग आरक्षण संबंधी अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा।

रिपोर्ट के बाद ही तय होगा चुनावी कार्यक्रम

राज्य सरकार का स्पष्ट कहना है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद ही पंचायत और नगर निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय किया जा सकेगा। इसलिए चुनाव कार्यक्रम भी रिपोर्ट आने के बाद ही घोषित होगा।

सूत्रों के अनुसार आयोग अगस्त के दूसरे सप्ताह तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी में है। यदि ऐसा होता है तो अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में राज्य निर्वाचन आयोग चुनावों की घोषणा कर सकता है। सरकार की कोशिश नवंबर तक पंचायत और निकाय चुनाव संपन्न कराने की है।

हाईकोर्ट की समय सीमा पूरी होना मुश्किल

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 31 जुलाई तक पंचायत और शहरी निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में इस समय सीमा के भीतर चुनाव होना मुश्किल माना जा रहा है।

सरकार का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ओबीसी आरक्षण तय किए बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। इसलिए आयोग की रिपोर्ट आने तक चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।

अवमानना याचिका भी बनी सरकार की चुनौती

इधर, कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा ने हाईकोर्ट में चुनाव समय पर नहीं कराने को लेकर अवमानना याचिका दायर कर रखी है। दूसरी ओर राज्य सरकार चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगने की तैयारी में है।

संयम लोढ़ा पहले ही कैविएट दाखिल कर चुके हैं। ऐसे में यदि सरकार समय बढ़ाने की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंचती है तो अदालत कोई भी फैसला लेने से पहले लोढ़ा का पक्ष भी सुनेगी।

क्या है पूरे मामले की अहमियत?

राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव लंबे समय से लंबित हैं। इस बार चुनावों की सबसे बड़ी कड़ी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट बन गई है। आयोग का घर-घर सर्वे स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण तय करने का आधार बनेगा। ऐसे में सर्वे समय पर पूरा होना और रिपोर्ट तय समय में तैयार होना सरकार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यदि सर्वे या रिपोर्ट में देरी होती है तो चुनाव कार्यक्रम भी आगे खिसक सकता है, जिससे चुनावों को लेकर चल रही कानूनी और राजनीतिक खींचतान और तेज होने की संभावना है।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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