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जयपुर में मानव शृंखला बनाकर महिलाओं ने उठाई आवाज, संसद एवं विधानसभा में 33% आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग

जयपुर में मानव शृंखला बनाकर महिलाओं ने उठाई आवाज, संसद एवं विधानसभा में 33% आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग राजधानी के शहीद स्मारक पर विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़ी महिलाओं का प्रदर्शन. Published : July 20, 2026 at 8:3…

ETV Bharat के अनुसार20 जुलाई 2026 को 04:02 pm बजे
जयपुर में मानव शृंखला बनाकर महिलाओं ने उठाई आवाज, संसद एवं विधानसभा में 33% आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग

सौजन्य से:- ETV Bharat

जयपुर में मानव शृंखला बनाकर महिलाओं ने उठाई आवाज, संसद एवं विधानसभा में 33% आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग

राजधानी के शहीद स्मारक पर विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़ी महिलाओं का प्रदर्शन.

Published : July 20, 2026 at 8:30 PM IST

जयपुर : विभिन्न महिला संगठनों ने राजनीति में महिलाओं की बराबर और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग को लेकर सोमवार को राजधानी जयपुर के शहीद स्मारक पर मानव शृंखला बनाकर प्रदर्शन किया. महिलाओं ने केंद्र सरकार से संसद के मानसून सत्र में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की शर्तों से अलग करते हुए तत्काल लागू करने की मांग की. प्रदर्शन से पहले महिला संगठनों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वीराज को ज्ञापन सौंपा एवं अपनी मांग केंद्र तक पहुंचाने का आग्रह किया.

महिला अधिकारों को और टालना स्वीकार्य नहीं : महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि आधी आबादी को लोकतांत्रिक संस्थाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना केवल समानता का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में आवश्यक कदम है. कानून पहले ही पारित हो चुका है तो क्रियान्वयन में अतिरिक्त शर्तें जोड़ना महिलाओं के अधिकारों को अनिश्चितकाल तक टालने जैसा है. एआईडीडब्ल्यूए की सचिव सुमित्रा चोपड़ा ने कहा कि संसद ने महिला आरक्षण बिल पारित कर दिया, लेकिन उसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर लागू करने में देरी की जा रही है. महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का वादा अब तत्काल पूरा हो. इसी मानसून सत्र में बिना शर्त कानून लागू करें.

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अब और इंतजार नहीं: एनएफआईडब्ल्यू की कार्यकारी अध्यक्ष मीनाक्षी बिंदोरिया ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी से ही संभव है. महिलाओं की राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ने से नीति निर्माण अधिक संवेदनशील और समावेशी होगा. आरक्षण को किसी प्रशासनिक प्रक्रिया से जोड़कर लंबित नहीं रखा जाना चाहिए. सामाजिक कार्यकर्ता अनिता माथुर ने कहा कि महिलाओं की आवाज को प्रभावी बनाने के लिए निर्वाचित संस्थाओं में उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व आवश्यक है और इस दिशा में अब और इंतजार उचित नहीं है.

महिला भागीदारी से बदलेगा विकास का स्वरूप :रेणु शर्मा ने कहा कि जब अधिक महिलाएं संसद और विधानसभाओं तक पहुंचेंगी तो शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों को अधिक प्राथमिकता मिलेगी. महिला आरक्षण केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के समग्र विकास से जुड़ा विषय है. सामाजिक कार्यकर्ता मंजू लता ने कहा कि महिला संगठनों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक 33 प्रतिशत महिला आरक्षण बिना शर्त लागू ना किया जाए.

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राज्यपाल के सचिव को ज्ञापन: इससे पहले प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के सचिव को दिए ज्ञापन में कहा कि मानसून सत्र में महिला आरक्षण कानून बिना पूर्व शर्त के लागू कराने के लिए केंद्र सरकार संवैधानिक और विधायी कदम उठाए. महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को अब और लंबित रखना लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप नहीं है. महिला संगठनों ने स्पष्ट किया कि जब तक 33 प्रतिशत आरक्षण बिना शर्त लागू नहीं किया जाता, तब तक देशभर में जनजागरण अभियान और लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा.

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