Organ Donation Day: राजस्थान संकल्प में आगे, लेकिन अंगदान में पीछे, जिंदगी के लिए कतार में हजारों मरीज
Organ Donation Day: राजस्थान संकल्प में आगे, लेकिन अंगदान में पीछे, जिंदगी के लिए कतार में हजारों मरीज अंगदान संकल्प में देश में दूसरे स्थान पर रहने के बावजूद राजस्थान वास्तविक अंगदान में पीछे है. पढ़िए आदित्य आत्रेय की…

सौजन्य से:- ETV Bharat
Organ Donation Day: राजस्थान संकल्प में आगे, लेकिन अंगदान में पीछे, जिंदगी के लिए कतार में हजारों मरीज
अंगदान संकल्प में देश में दूसरे स्थान पर रहने के बावजूद राजस्थान वास्तविक अंगदान में पीछे है. पढ़िए आदित्य आत्रेय की रिपोर्ट.
Published : August 3, 2026 at 6:33 AM IST
जयपुर: हर साल 3 अगस्त को देशभर में राष्ट्रीय अंगदान दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण की दिशा में जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित है. वर्ष 1994 में 3 अगस्त को देश में पहली सफल मृत दाता हृदय प्रत्यारोपण सर्जरी हुई थी, इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की याद में इस तिथि को चुना गया. इस दिन न केवल अंगदाताओं और उनके परिवारों के महान बलिदान को याद किया जाता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया जाता है कि एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसके अंग कई जिंदगियों को नया जीवन दे सकते हैं.
1.08 लाख लोगों ने अंगदान की शपथ ली: राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में अंगदान को लेकर जागरूकता का स्तर लगातार बढ़ रहा है. राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है. हाल ही में आयोजित अंगदान संकल्प अभियान में राजस्थान ने देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है. महाराष्ट्र के बाद सबसे अधिक लोगों ने राजस्थान में अंगदान का संकल्प लिया. अभियान के तहत प्रदेश के 1.08 लाख से अधिक नागरिकों ने अंगदान की शपथ ली, जो एक सकारात्मक और उत्साहवर्धक संकेत है. झुंझुनू, जयपुर, चूरू, अजमेर, सीकर और हनुमानगढ़ जैसे जिले इस अभियान में अग्रणी रहे. अभियान 3 अगस्त 2026 तक जारी रहा, जिसमें जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम, शिविर और डिजिटल संकल्प अभियान चलाए गए.
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प्रतीक्षा सूची में ज्यादा मरीज: यह उपलब्धि निश्चित रूप से गर्व की बात है. अंगदान संकल्प लेने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि से पता चलता है कि समाज में अंगदान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित हो रही है. युवा पीढ़ी और महिलाएं भी इस मुहिम में सक्रिय रूप से शामिल हो रही हैं, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल संकल्प लेने से समस्या का समाधान नहीं होगा. असली चुनौती वास्तविक अंगदान की संख्या बढ़ाने की है. हर दिन ऐसे सैकड़ों मरीज सामने आ रहे हैं जिन्हें किडनी, लीवर, हृदय, फेफड़े या कॉर्निया जैसे अंगों की सख्त जरूरत है. कई मरीजों के लिए अंग प्रत्यारोपण ही जीवन बचाने का एकमात्र विकल्प होता है. प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि उपलब्ध अंगों की संख्या जरूरत के मुकाबले बहुत कम है.
दुर्घटनाओं में मौतें और अंगदान की संभावना: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में वर्ष 2024 में सड़क और अन्य हादसों के कारण कुल 30,794 मौतें हुईं. यह आंकड़ा देश की कुल दुर्घटना मौतों का लगभग 6.6 प्रतिशत है. राज्य की दुर्घटना मृत्यु दर 37.5 प्रति लाख आबादी रही, जो राष्ट्रीय औसत 33.3 से काफी अधिक है. अकेले जयपुर शहर में भी सड़क हादसों में बड़ी संख्या में मौतें दर्ज की गईं. चिकित्सा विभाग का मानना है कि इन मौतों में से यदि लगभग 10 प्रतिशत ब्रेन डेड मरीजों के परिजन अंगदान के लिए सहमति दें तो सैकड़ों लोगों को नया जीवन मिल सकता है. एक ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान से कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है.
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राजस्थान में वास्तविक अंगदान की स्थिति: राजस्थान में मृतक अंगदान (कैडेवर डोनेशन) की रफ्तार अभी भी जरूरत के मुकाबले काफी धीमी है. राज्य के अंग प्रत्यारोपण पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रदेश में 71 मृतक अंगदाताओं से 156 ठोस अंगों (Solid Organs) का सफल प्रत्यारोपण किया जा चुका है. इनमें सबसे अधिक 106 किडनी, 36 लीवर, 12 हृदय, एक फेफड़ा और एक अग्न्याशय (पैंक्रियास) का प्रत्यारोपण शामिल है. आंत (इंटेस्टाइन) का अब तक कोई प्रत्यारोपण नहीं हुआ है.
कई मरीजों को अंगो का इंतजार: ये आंकड़े सराहनीय हैं, लेकिन आवश्यकता की तुलना में बहुत कम हैं. वर्तमान में प्रदेश में 954 मरीज किडनी, 440 मरीज लीवर और 133 मरीज हृदय प्रत्यारोपण के लिए प्रतीक्षा सूची में हैं. इनमें किडनी के 942, लीवर के 434 और हृदय के 126 मरीज सक्रिय वेटिंग लिस्ट में हैं. कई मरीज वर्षों से डायलिसिस पर जीवन बिता रहे हैं या लीवर व हृदय की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. कुछ परिवार तो बेहतर सुविधाओं और कम प्रतीक्षा समय की उम्मीद में गुजरात जैसे अन्य राज्यों में भी इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं.
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अधिकांश कैडेवर डोनेशन SMS में: पिछले कुछ वर्षों में मृतक अंगदान की संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है, लेकिन यह अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर कई दक्षिणी राज्यों की तुलना में काफी पीछे है. तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ब्रेन डेड दाताओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है. राजस्थान में अधिकांश कैडेवर डोनेशन जयपुर के एसएमएस अस्पताल और कुछ अन्य प्रमुख केंद्रों से ही होते हैं. अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अंग निकालने और प्रत्यारोपण की पूर्ण क्षमता अभी विकसित नहीं हो पाई है.
जागरूकता बढ़ाने की जरूरत: अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने, ब्रेन-डेड मरीजों के परिजनों को सही और संवेदनशील जानकारी देने तथा अस्पतालों में अंगदान की प्रक्रिया को मजबूत करने की आवश्यकता है. कई बार परिवार वाले गलतफहमियों, धार्मिक या सामाजिक भ्रांतियों के कारण सहमति नहीं देते. कुछ लोग यह सोचते हैं कि अंगदान से शरीर का सम्मान कम हो जाएगा या अंतिम संस्कार में कोई समस्या आएगी. इन भ्रांतियों को दूर करना बेहद जरूरी है.
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