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लाडो प्रोत्साहन योजना: बेटियों को 1.5 लाख दे रही सरकार, अब 2 बच्चों वाली शर्त खत्म, पैसा भी आएगा तुरंत

योजना के तहत अब तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ दिया जा चुका है । लाडो प्रोत्साहन योजना: प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजेश कुमार यादव ने गुरुवार को शासन सचिवालय में लाडो प्रोत्साहन योजना की समी…

Navbharat Times के अनुसार10 जुलाई 2026 को 05:55 am बजे
लाडो प्रोत्साहन योजना: बेटियों को 1.5 लाख दे रही सरकार, अब 2 बच्चों वाली शर्त खत्म, पैसा भी आएगा तुरंत

सौजन्य से:- Navbharat Times

योजना के तहत अब तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ दिया जा चुका है ।

लाडो प्रोत्साहन योजना: प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजेश कुमार यादव ने गुरुवार को शासन सचिवालय में लाडो प्रोत्साहन योजना की समीक्षा बैठक की। बैठक में योजना के बेहतर कार्य , भुगतान की स्थिति और टेक्निकल चैलेंज पर विस्तार से बात-चीत की गई। इस बात-चीत के दौरान प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र बालिका तक बिना किसी देरी के पहुंचे।

तकनीकी समस्याओं का जल्द समाधान करने के निर्देश

समीक्षा बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि योजना के संचालन में आने वाली तकनीकी बाधाओं का तत्काल समाधान किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभ वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि पात्र बालिकाओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही सभी लंबित मामलों का जल्द निस्तारण करने पर भी जोर दिया गया।

6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को पहले ही मिल चुका है लाभ

राज्य सरकार की प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल लाडो प्रोत्साहन योजना के तहत पात्र बालिकाओं को 1.50 लाख रुपये का संकल्प पत्र प्रदान किया जाता है। 1 अगस्त 2024 से अब तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है। सरकार ने योजना के दायरे का विस्तार करते हुए दो से अधिक संतान की बाध्यता को समाप्त कर दिया है। इसके अलावा अब मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में अध्ययनरत पात्र बालिकाओं को भी योजना का लाभ दिया जा रहा है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में भुगतान प्रक्रिया तेज

वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान योजना के लिए 4,531.96 लाख रुपये के विपत्र कोषालय भेजे गए हैं। इनमें से 2,509.48 लाख रुपये के विपत्रों का ईसीएस सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है, जबकि 2,022.48 लाख रुपये के विपत्रों की ईसीएस प्रक्रिया जारी है। विभाग लगातार भुगतान प्रक्रिया को तेज गति से आगे बढ़ा रहा है ताकि लाभार्थियों को समय पर राशि मिल सके।

2.56 लाख से अधिक बालिकाओं को मिली तीसरी किस्त

लाडो प्रोत्साहन योजना के तहत अब तक 2,56,808 बालिकाओं को तीसरी किस्त का लाभ प्रदान किया जा चुका है। विभाग ने बताया कि शेष पात्र आवेदनों के सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया भी लगातार जारी है। सरकार का उद्देश्य है कि सभी पात्र बालिकाओं तक योजना का लाभ जल्द से जल्द पहुंचे और उनकी शिक्षा तथा सशक्तिकरण को आर्थिक सहयोग मिल सके।

कैसे ले सकेंगे लाडो प्रोत्साहन योजना का लाभ

स्कूल में प्रवेश से लेकर कक्षा 12 तक की किस्तों के लिए संबंधित विद्यालय द्वारा आवश्यक जानकारी ऑनलाइन अपडेट की जाती है, जबकि अंतिम किस्त के लिए स्नातक पूर्ण होने और 21 वर्ष की आयु पूरी होने पर आवश्यक दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं। सभी पात्र किस्तों का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लाभार्थी के बैंक खाते में किया जाता है।

लेखक के बारे मेंअमित कुमारअमित कुमार, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर/सीनियर जर्नलिस्ट हैं। वर्तमान में सरकारी योजना सेक्शन के जरिए आम जनता तक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचा रहे हैं। अमित कुमार की प्राथमिकता भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े हर सवाल का जवाब तथ्यों के आधार पर रीडर्स तक पहुंचाना है। अमित कुमार जनवरी, 2025 से नवभारत टाइम्स डिजिटल से जुड़े हैं। इसके साथ बिहार-झारखंड और राजस्थान टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वह NBT Digital में सरकारी योजनाओं, बिहार-झारखंड और राजस्थान से संबंधित सेक्शन की प्लानिंग से लेकर तथ्यों पर आधारित ऐसे लेख तैयार कर रहे हैं, जो रीडर्स तक काम की जानकारी बिना बढ़ा-चढ़ाकर आसान भाषा में पहुंचा सकें।खबरें बिना सनसनी फैलाए पाठकों तक पहुंचाने पर उनका फोकस है। इन राज्यों की सियासी नब्ज को टटोलने के साथ-साथ आम लोगों की जरूरत की खबरों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। अपने 20 साल के करियर में अमित कुमार को पत्रकारिता जगत के अलग-अलग क्षेत्र में रिपोर्टिंग करने और आमजन के लिए उपयोगी खबरें लिखने का मौका मिला।अमित कुमार ने सितंबर, 2006 में खेल जगत में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत की। फिर देश के प्रमुख अखबारों से डिजिटल की दुनिया तक कई पड़ाव आए। इस दौरान नेशनल, इंटरनेशनल, देश के विभिन्न राज्यों की खबरों को लेकर न्यूज प्लानिंग, वैल्यू एडेड आर्टिकल्स, इन्फ्रोग्राफिक्स और स्पेशल दिनों के लिए कंटेंट तैयार करने का काम किया। अमित कुमार के करियर में भूमिकाएं तो कई बदलीं, लेकिन एक चीज स्थिर रही। आमजन के लिए उपयोगी खबरों को आसान से आसान भाषा में रीडर्स तक पहुंचाना।अपने करियर के दो दशक लंबे सफर के दौरान सटीक खबर, फैक्ट पर आधारित, इन-डेप्थ और नॉलेज से भरपूर कंटेंट रीडर्स तक पहुंचाना ही प्राथमिकता रही। उनका मानना है कि कोई भी जानकारी यूजर तक बिना वेरिफाई किए नहीं जानी चाहिए। इसलिए खबरों के लिए वह हमेशा ऑथेंटिक सोर्स पर भी भरोसा करते हैं।देश की राजधानी दिल्ली में ही जन्मे और पले-बढ़े अमित कुमार ने CBSE Board से 10वीं और 12वीं पास की। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही हिंदी भाषा में M.A. किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में करियर संवारने की ख्वाहिश के चलते माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। अमित कुमार शुरू से ही कुछ नया सीखने को लेकर आतुर रहे हैं। यही चीज उनके 2 दशक लंबे करियर में भी झलकती है।पत्रकारिता जगत में 20 साल का अनुभवअमित कुमार नवभारतटाइम्स.कॉम में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पिछले 20 साल में अमित कुमार को अमर उजाला, राजस्थान पत्रिका, दैनिक हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, नई दुनिया, जनसत्ता और हरिभूमि जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में अपनी स्किल को संवारने का मौका मिला। 2019 में अमर उजाला के साथ डिजिटल का सफर शुरू किया। यहां नेशनल-इंटनेशनल खबरों पर इन-डेप्थ काम करते हुए सफर के अगले पड़ाव टीवी9 भारतवर्ष और न्यूज-24 बने। यहां न्यूज टीम को लीड किया।करियर के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स 2010, क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 और बैडमिंटन ओपन जैसे कई बड़े इवेंट्स में रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। देश-विदेश की बड़ी खबरों पर काम करते हुए अयोध्या राम मंदिर फैसला, लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव, बिहार और झारखंड विधानसभा चुनाव, बजट, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स कवर किए। अमित कुमार को पॉजिटिव इम्पैक्ट वाली स्टोरीज लिखना पसंद है। उनकी प्राथमिकता ऐसा कंटेंट लिखने की रहती है, जो लोगों के लिए मददगार साबित हों। अमित कुमार को लिखने और पढ़ने के साथ घूमने का शौक है। देश के छोटे-छोटे गांवों तक जाना वहां की जीवनशैली से रूबरू होना खासतौर से पसंद है।... और पढ़ें

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