Bhajanlal Government : किससे लगाएं गुहार...ढाई साल बाद भी जनता से जुड़े संवैधानिक बोर्ड-आयोगों में नियुक्ति नहीं
Bhajanlal Government : किससे लगाएं गुहार...ढाई साल बाद भी जनता से जुड़े संवैधानिक बोर्ड-आयोगों में नियुक्ति नहीं महिला आयोग, बाल आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, एससी-एसटी, ओबीसी, हज कमेटी, युवा बोर्ड, समाज कल्याण बोर्ड में रिक्त…

सौजन्य से:- ETV Bharat
Bhajanlal Government : किससे लगाएं गुहार...ढाई साल बाद भी जनता से जुड़े संवैधानिक बोर्ड-आयोगों में नियुक्ति नहीं
महिला आयोग, बाल आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, एससी-एसटी, ओबीसी, हज कमेटी, युवा बोर्ड, समाज कल्याण बोर्ड में रिक्त चल रहे हैं अध्यक्ष और सदस्यों के पद.
Published : July 20, 2026 at 2:55 PM IST
जयपुर: एक तरफ प्रदेश में एससी-एसटी, महिलाओं और बच्चों से जुड़े अत्याचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. हाल ही में जारी हुई एनसीआरबी की रिपोर्ट में भी प्रदेश में महिलाओं और बच्चों से जुड़े अत्याचार के मामलों में बढ़ोतरी का खुलासा हुआ है. प्रदेश में एससी-एसटी, महिलाएं और बच्चों से जुड़े अत्याचार के मामलों को लेकर विपक्षी दलों ने कई बार सरकार के खिलाफ आंदोलन भी किया है, लेकिन दिलचस्प यह है कि एससी-एसटी, महिला, बच्चे, माइनॉरिटी और जनता से जुड़े कई संवैधानिक आयोग और बोर्ड पिछले ढाई साल से रिक्त चल रहे हैं.
आलम यह है कि इन बोर्ड-आयोगों में जनता से जुड़ी शिकायतें तो आती है, लेकिन बोर्ड आयोगों में अध्यक्ष और सदस्यों के पद रिक्त होने से शिकायतों का निवारण नहीं हो पा रहा है.
कई संवैधानिक आयोग तो ऐसे हैं जिनका सीधा जुड़ाव जाति विशेष है, लेकिन सरकार अपने कार्यकाल के ढाई वर्ष बीतने के बावजूद इन संवैधानिक बोर्ड आयोग में नियुक्तियां नहीं कर रही है.
यह बोर्ड आयोग चल रहे हैं रिक्त : प्रदेश में बाल आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, एससी-एसटी, ओबीसी आयोग, निशक्तजन आयोग, राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण,समाज कल्याण बोर्ड, युवा बोर्ड, हज कमेटी, पिछले दो-ढाई साल से रिक्त चल रहे हैं. इन बोर्ड आयोगों में न सदस्य है और न ही अध्यक्ष है. ज्यादातर संवैधानिक आयोगों में अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो गया है तो वहीं कई आयोगों में सरकार बदलने के बाद सदस्य और अध्यक्ष ने जाना ही बंद कर दिया था.
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सरकार से अपेक्षाकृत सहयोग नहीं मिला : राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रहे कांग्रेस विधायक रफीक खान का कहना है कि प्रदेश में सरकार बदलने के बाद आयोग को अपेक्षाकृत सहयोग नहीं मिल पाया. संसाधन वापस ले लिए गए थे. स्टाफ भी नहीं था. ऐसे में फरियादियों की समस्याएं भी सुनते थे तो उनका निराकरण नहीं हो पता था. ऐसे में जाना ही बंद कर दिया था. हालांकि, मेरा कार्यकाल फरवरी 2025 तक था.
आयोग के सदस्य रहे हरदीप सिंह चहल का कहना है कि कांग्रेस की सरकार थी तब जिलों में जाकर जनसुनवाई भी करते थे और हाथों-हाथ लोगों की समस्याओं का समाधान करते थे, लेकिन सरकार बदलने के बाद सहयोग नहीं मिला. अब आयोग में न अध्यक्ष न ही सदस्य, ऐसे में अब जनसुनवाई कैसे होती होगी.
प्रतिदिन 25 से 30 मामलों की करते थे सुनवाई : वहीं, महिला आयोग की अध्यक्ष रही रेहाना रियाज और बाल आयोग के अध्यक्ष रही संगीता बेनीवाल का कहना है कि कांग्रेस शासन में प्रतिदिन 25 से 30 मामलों की सुनवाई करते थे. रेहाना रियाज का कहना है कि सरकार बदलने के बाद संसाधन वापस ले लिए उसके बावजूद हम जनसुनवाई करते थे, लेकिन जो सहयोग मिलना चाहिए था वो नहीं मिल पा रहाथा. फरवरी 2025 से महिला आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद रिक्त चल रहे हैं. अब कौन जनसुनवाई करता है पता नहीं.
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वहीं, बाल आयोग की अध्यक्ष रही संगीता बेनीवाल का कहना है कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, तब से ही बाल आयोग में पद रिक्त चल रहे हैं, लेकिन जिस तरह से प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों पर अत्याचार के मामले बढ़ रहे हैं. सरकार को तुरंत इन दोनों महत्वपूर्ण आयोगों में नियुक्तियां करनी चाहिए, जिससे कि पीड़ित महिलाओं और बच्चों को कम से कम आयोग के द्वारा इंसाफ दिलाया जा सके.
SC-ST आयोग में भी ढाई साल से पद रिक्त : प्रदेश के एससी-एसटी आयोग में पिछले ढाई साल से पद रिक्त चल रहा है, एससी आयोग के अध्यक्ष रहे खिलाड़ी बैरवा का कहना है कि उन्होंने तो विधानसभा चुनाव से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. जब अध्यक्ष और सदस्य थे, तब जिलों में जाकर एससी वर्ग से जुड़े मामलों की जनसुनवाई करते थे. तब उनकी जमीनों पर कब्जे करने, मारपीट करने, जाति सूचक शब्दों से अपमानित करने जैसे मामलों की सुनवाई करते थे और उन्हें तुरंत न्याय देते थे, लेकिन अब न वहां सदस्य है और न ही अध्यक्ष.
यही स्थिति राजस्थान हज कमेटी और समाज कल्याण बोर्ड की भी है. हाल ही में संपन्न हुई हज यात्रा की पूरी जिम्मेदारी हज कमेटी की होती है, लेकिन इस बार बिना अध्यक्ष और सदस्यों के ही हज कमेटी में तैनात कर्मचारियों ने हज यात्रा संपन्न करवाई. हालांकि, इस दौरान कई बार समस्याओं का भी सामना करना पड़ा. वहीं, राजस्थान समाज कल्याण बोर्ड में भी सरकार बदलने के बाद से ही अध्यक्ष और सदस्यों के पद रिक्त है. हालांकि, संवैधानिक आयोग और बोर्ड प्रशासनिक अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं.
डोटासरा भी उठा चुके सवाल : वहीं, संवैधानिक आयोगों और बोर्डो में रिक्त चल रहे अध्यक्ष और सदस्यों के पदों को लेकर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर सवाल खड़े किए थे. डोटासरा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा था कि राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण में अध्यक्ष सहित कई पद खाली हैं, जिसके चलते कर्मचारी अपनी गुहार लगाने कहां जाएं.
इसी तरह से लोकायुक्त और आरपीएससी में भी कई पद रिक्त चल रहे हैं.वही राजस्थान महिला आयोग, युवा बोर्ड मे भी पद रिक्त चल रहे हैं. डोटासरा यह सरकार को घेरते हुए कहा था कि महिलाओं और युवा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे सरकार की प्राथमिकता नहीं है, आखिर भाजपा सरकार इन महत्वपूर्ण संस्थाओं को खाली रखकर किसे संरक्षण दे रही है.
कांग्रेस की राह पर भाजपा सरकार : वहीं, राजनीतिक विश्लेषक योगेश शर्मा का कहना है कि भजनलाल सरकार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के नक्शे कदम पर चल रही है. पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने भी अपने कार्यकाल के साढे तीन वर्ष बीतने के बाद बोर्ड, आयोगों और निगमों में नियुक्ति की थी. वहीं अब भजनलाल भी उसी पैटर्न पर काम कर रही है.
सरकार के कार्यकाल के पौने तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन सरकार महत्वपूर्ण बोर्ड-आयोगों में नियुक्तियां नहीं कर रही है. इससे न केवल भाजपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं में मायूसी छा रही है. वहीं, जनता की समस्याओं का समाधान भी नहीं हो पा रहा है, क्योंकि कई बोर्ड-आयोग ऐसे हैं जो सीधे जनता से जुड़े हुए हैं, जहां जाकर वो अपनी फरियाद रखते हैं और उन्हें उम्मीद होती है कि उनकी समस्याओं का समाधान हो जाएगा.
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