गरीबों के लिए 10 आवास कोटा लागू कराने हाई कोर्ट पहुंचे सांसद धर्मवीर गांधी, EWS प्रावधानों को बिल्डर कर रहे नजर अंदाज - mp dharamveer gandhi moves high court to enforce 10 housing quota for the poor builders are ignoring ews provisions
गरीबों के लिए 10% आवास कोटा लागू कराने हाई कोर्ट पहुंचे सांसद धर्मवीर गांधी, EWS प्रावधानों को बिल्डर कर रहे नजर अंदाज सांसद धर्मवीर गांधी ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर PAPRA एक्ट के तहत आर्थिक…

सौजन्य से:- Jagran
गरीबों के लिए 10% आवास कोटा लागू कराने हाई कोर्ट पहुंचे सांसद धर्मवीर गांधी, EWS प्रावधानों को बिल्डर कर रहे नजर अंदाज
सांसद धर्मवीर गांधी ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर PAPRA एक्ट के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10% आवासीय आरक्षण ...और पढ़ें
HighLights
- सांसद धर्मवीर गांधी ने EWS आवास आरक्षण पर याचिका दायर की।
- PAPRA एक्ट के 10% आरक्षण को लागू करने की मांग।
- बिल्डरों पर अनदेखी का आरोप, 1 जुलाई को सुनवाई।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पटियाला से सांसद धर्मवीर गांधी ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट (पापरा) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत आवासीय आरक्षण को सख्ती से लागू कराने की मांग की है। इस याचिका पर हाई कोर्ट एक जुलाई को सुनवाई करेगा।
याचिका में कहा गया है कि पापरा एक्ट के तहत किसी भी बिल्डर या कॉलोनाइजर द्वारा विकसित की जाने वाली कॉलोनी अथवा आवासीय परियोजना में 10 प्रतिशत मकान या रिहायशी यूनिट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए आरक्षित रखने का स्पष्ट प्रावधान है। इसके बावजूद पिछले कई वर्षों से पंजाब में इस व्यवस्था का पालन नहीं किया जा रहा है।
सांसद धर्मवीर गांधी ने आरोप लगाया है कि निजी बिल्डर और कॉलोनाइजर इस कानूनी प्रावधान की अनदेखी कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार भी इसे प्रभावी ढंग से लागू कराने में विफल रही है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिल्डरों और सरकारी तंत्र की मिलीभगत के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को इस कानून का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि पापरा एक्ट का उद्देश्य शहरी विकास योजनाओं में समाज के कमजोर तबकों को भी सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना था, लेकिन जमीनी स्तर पर इस प्रावधान को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए किफायती आवास का सपना अधूरा रह गया है।
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याचिका में हाई कोर्ट से मांग की गई है कि राज्य सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएं कि वे पापरा एक्ट के ईडब्ल्यूएस संबंधी प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और सभी मौजूदा तथा भविष्य की आवासीय परियोजनाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य रूप से लागू कराया जाए।
मामले की सुनवाई पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक जुलाई को निर्धारित की गई है।
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