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परकोटा हवेली के खजाने में छुपी जानकरीः क्या है मालिकाना हक का सच

परकोटा स्थित विद्याधर जी के रास्ते में एक पुरानी हवेली की खुदाई में करोड़ों रुपए का खजाना निकलने की जानकारी आ रही है। इसके साथ ही हवेली के मालिक राहुल सेठी ने ठेकेदार और मजदूरों पर मुकदमा दर्ज कराया है। खजाने के मालिकाना हक को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। राजस्थान हाईकोर्ट के एडवोकेट अभिषेक देवंदा का कहना है कि सैकड़ों साल पुराने खजाने को लेकर इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट 1878 के तहत सरकार का हक होगा।

Navbharat Times के अनुसार19 जुलाई 2026 को 08:00 am बजे
परकोटा हवेली के खजाने में छुपी जानकरीः क्या है मालिकाना हक का सच

सौजन्य से:- Navbharat Times

Jaipur Haveli News: जयपुर में हाल ही में एक हवेली के मालिक ने पुरानी हवेली को तोड़कर नई हवेली बनवाई। नींव की खुदाई हुई तो करोड़ों रुपए का खजाना निकलने की जानकारी सामने आई। अब इस पूरे मामले में मालिकाना हक को लेकर चर्चा तेज हो रही है।

जयपुर: जयपुर के परकोटा क्षेत्र में दर्जनों हवेलियां है। ये हवेलियां सौ साल से ज्यादा से ज्यादा पुरानी है। चूंकि कई हवेलियों के मालिक बड़े व्यापारी रहे हैं। ऐसे में पुराने व्यापारियों के वारिसों का मानना है कि कई हवेलियों के नीचे सोने चांदी के खजाने छिपे हैं। जयपुर में हाल ही में एक हवेली के मालिक ने पुरानी हवेली को तोड़कर नई हवेली बनवाई। जब पुरानी हवेली तोड़ी गई और नींव की खुदाई हुई तो करोड़ों रुपए का खजाना निकलने की जानकारी सामने आई है।

ठेकेदार और मजदूरों ने किया गायब

परकोटा स्थित त्रिपोलिया बाजार के पास विद्याधर जी के रास्ते में एक पुरानी हवेली है जिनके मालिक हैं बापू नगर निवासी राहुल सेठी। करीब छह सात महीने पहले सेठी ने ठेकेदार महेश मल्होत्रा को पुरानी हवेली गिराकर नई हवेली बनाने का ठेका दिया। ठेका देते समय यह शर्त रखी गई थी कि अगर खुदाई में खजाना निकले तो मालिक को पूरी जानकारी देनी होगी। राहुल का कहना है कि हवेली की खुदाई के दौरान सोने चांदी का बड़ा खजाना निकला था। सोने चांदी की बड़ी सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 15 कलश और करीब 10,000 चांदी के सिक्के निकले थे। मालिक का आरोप है कि ठेकेदार और मजदूरों ने खजाना गायब कर दिया।

मालिक ने दर्ज कराई नामजद FIR

हवेली के मालिक राहुल सेठी ने जयपुर के माणक चौक थाने में ठेकेदार महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू के साथ उनके सहयोगियों अनुज, जगदीश, रजनी, रेहान, सुल्तान (ड्राइवर) और पप्पू अजमेरा के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया है। सेठी का कहना है कि एक मजदूर ने उन्हें इस खजाने के बारे में जानकारी दी है। इससे जुड़े दो वीडियो भी सामने आए जिसमें खजाना मिलने और बांटने का जिक्र है। वीडियो में खजाना भी नजर आना बताया जा रहा है। माणक चौक थाना प्रभारी राकेश ख्यालिया का कहना है कि राहुल सेठी की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई है। तथ्यों की जानकारी जुटाते हुए जांच की जा रही है।

अगर खजाना मिले तो हकदार कौन ?

राजस्थान हाईकोर्ट के एडवोकेट अभिषेक देवंदा का कहना है कि सैकड़ों साल पुराने खजाने को लेकर कानून बना हुआ है। इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट 1878 के तहत जमीन की खुदाई या ऊपर मिलने वाले खजाने पर सरकार का हक होगा। राजस्थान में 'इंडियन ट्रेजर ट्रोव रूल्स 1961' भी लागू है। खजाना मिलने की स्थिति में ये नियम 'इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878' के प्रावधानों के अनुसार खजाने का हक सरकार का है। जमीन के मालिक का इस खजाने पर कोई हक नहीं होता है। एडवोकेट अभिषेक देवंदा का कहना है कि खजाना मिलने पर इसकी सूचना जिला प्रशासन को देना भी जरूरी है। ऐसा नहीं करने का दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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