गदह खजाने की दास्तान: ज्यादा पुराना है तो सरकार का है, या शायद आपका...
गड़ा हुआ खजाना मिलने के बाद कई सवाल उठते हैं। खजाने के मालिक बनने के लिए क्या आवश्यक है? क्या सरकार को इसकी सूचना देनी होगी? इन सवालों के जवाब हमें 'इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878' के प्रावधानों से मिल सकते हैं।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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भास्कर एक्सप्लेनरजमीन खुदाई में मिला खजाना किसका, मालिक या सरकार का?:जयपुर में घर में मिले सोने से भरे 15 कलश; 8 सवालों से समझें नियम
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हाल ही जयपुर में एक हवेली की खुदाई में खजाना मिलने का दावा किया गया। मालिक का आरोप है कि ठेकेदार और उसके साथियों ने करीब 40-45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14-15 कलश और 8 से 10 हजार चांदी के पुराने सिक्के आपस में बांट लिए। मामला पु
इस घटना के बाद कई सवाल उठ रहे हैं…
- क्या पुश्तैनी जमीन की खुदाई में मिला खजाना मालिक का होता है?
- खजाने के दावेदारों की जांच कैसे की जाती है?
- सरकार को जानकारी देना क्यों जरूरी है?
इस रिपोर्ट में आपके मन में उठ रहे सवालों के जवाब मिल जाएंगे...
सवाल : आपकी पुश्तैनी जमीन या घर में खजाना मिलता है तो क्या आपका हो जाता है?
जवाब : आपके पूर्वजों ने घर में 100 साल पहले या सैकड़ों साल पहले भी जमीन के भीतर खजाना छिपाया हो और एक दिन अचानक आपको मिल जाए तो आपको 'इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878' के तहत सरकार को इसकी जानकारी देनी होगी। जमीन के ऊपर या खुदाई में आपको मिलने पर भी खजाना कानूनी रूप से आपका नहीं हो जाता है।
सवाल : फिर इस खजाने पर किसका हक माना जाएगा?
जवाब : कानूनन गड़े मिले खजाने पर सरकार का ही हक माना जाएगा। पूरे देश में 'इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878' लागू है। वहीं राजस्थान में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव रूल्स 1961’ भी काम करता है। गड़ा हुआ खजाना मिलने की स्थिति में ये नियम 'इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878' के प्रावधानों को राज्य में लागू करने के लिए बनाए गए हैं। कानूनी प्रवधानों के तहत ही गड़े खजाने पर सबसे पहला हक राज्य सरकार का है।
सवाल : क्या गड़ा खजाना जिसका हक हो, उसका हो सकता है?
जवाब : हां, कानून के तहत हो सकता है। शर्त यह है कि व्यक्ति साबित कर दे कि ये खजाना उसके पूर्वजों का है, भले ही 100 साल से कम पुराना हो। खजाना किसी और को मिला हो, लेकिन कोई और यदि खजाना अपने बुजुर्गों का होने के तथ्य ले आए और कानूनी जांच में साबित कर दे तो सरकार उसे सौंप सकती है।
सवाल : खजाने के दावेदारों की जांच कैसे की जाती है, दावेदार नहीं मिले तो...?
जवाब : जांच के दौरान खजाना सरकारी ट्रेजरी में सरकार की निगरानी में रहता है। जिसे खजाना मिला हो और वह खुद की संपत्ति होने का दावा करता है तो भी जांच प्रक्रिया पूरी करनी होती है। कलेक्टर को खजाने की अनुमानित कीमत बताते हुए एक सार्वजनिक नोटिस जारी करना होता है।
इसमें वह कहता है कि इस खजाने का कोई दावेदार हो या उसके वंशज हों तो दस्तावेज सहित हाजिर हो जाएं। इस नोटिस के बाद कलेक्टर चाहे तो 4 से 6 महीने का समय दे सकते हैं। दावेदार के हाजिर होने पर कलेक्टर चाहें तो दावा साबित करने के लिए उसे सालभर का समय भी दे सकते हैं।
पूरी जांच कलेक्टर की अंडर में चलती है। यदि कलेक्टर की जांच में कोई अपने दावे को साबित कर देता है कि खजाना उसके बुजुर्गों का है, तो कलेक्टर मूल मालिक को खजाना सौंप सकता है। यदि कोई दावेदार इस दौरान नहीं आता, तो ये खजाना लावारिस घोषित हो जाता है और पूरी तरह सरकार के अंडर आ जाता है।
सवाल : यदि खजाना 100 साल पुराना हो तो...
जवाब : जांच के दौरान यदि खजाना ऐतिहासिक महत्व का लगता है तो कलेक्टर पुरातत्व विभाग से रिपोर्ट मांग सकते हैं। यदि खजाने में शामिल चीजें 100 साल से ज्यादा पुरानी निकलती हैं, तो एंटीक्विटी एंड आर्ट वैल्यूएबल्स एक्ट 1972 के तहत उन्हें 'पुरातत्व' या 'ऐतिहासिक धरोहर' माना जाता है।
ऐसे में संबंधित खजाना किसी निजी व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। 'इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878' के प्रावधानों के तहत ऐसा खजाना सीधे राज्य की संपत्ति माना जाता है।
सवाल : क्या गड़ा खजाना खोजने वालों या जमीन मालिक के बीच बांटा जा सकता है?
जवाब : कानूनी धाराओं के तहत यदि खजाना सौ साल से ज्यादा पुराना है तो खोजने वाले का इस पर कोई अधिकार नहीं होता है। ये सरकार की संपत्ति माना जाएगा।
वहीं यदि गड़ा खजाना 100 साल से कम पुराना हो तो कानूनी प्रावधानों के तहत खोजकर्ता और जमीन के मालिक के बीच साझा किया जा सकता है। प्रशासन की जांच में यदि कोई खजाने का दावेदार नहीं मिलता है तो उसे खोजने वाले को 75% और जमीन मालिक को 25% हिस्सा मिल सकता है।
सवाल : सरकार को जानकारी देना क्यों जरूरी है?
जवाब : कानून के अनुसार तो 10 रुपए से अधिक की कीमत का भी धन या वस्तु, सोना-चांदी आदि आपको मिलता है, तो तत्काल लिखित सूचना कलेक्टर या स्थानीय प्रशासन को देनी होती है।
सवाल : यदि खजाना सार्वजनिक जगह या सरकारी कब्जे वाली जमीन पर मिले तो...?
जवाब : तो ये खजाना सरकार के ही अधीन माना जाएगा। सरकार के कब्जा लेने से पहले यदि कोई इसमें से कुछ भी ले जाएगा तो उसे सरकार को ही जमा करवाना होगा। यदि खजाने में कुछ भी ले जाने वाला व्यक्ति खुद अपने स्तर पर प्रशासन को सौंपता है तो वह सजा से बच सकता है, लेकिन यदि प्रशासन अपने स्तर पर जांच कर तलाशी से कुछ वसूली करेगी तो सजा भी मिल सकती है।
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