खाकी वर्दी छोड़ बना 'अघोरी बाबा', फेसबुक पर बांट रहा था ज्ञान, 15 साल बाद खुला पुलिस भर्ती का वो राज!
डमी कैंडिडेट के दम पर पाई थी नौकरी मामला आरएसी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2010-11 से जुड़ा है। आरोप है कि श्रीराम मीणा नाम के इस कांस्टेबल ने खुद परीक्षा देने के बजाय अपनी जगह एक 'डमी कैंडिडेट' को बैठाया था। इस जालसाजी के द…

सौजन्य से:- Navbharat Times
डमी कैंडिडेट के दम पर पाई थी नौकरी
मामला आरएसी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2010-11 से जुड़ा है। आरोप है कि श्रीराम मीणा नाम के इस कांस्टेबल ने खुद परीक्षा देने के बजाय अपनी जगह एक 'डमी कैंडिडेट' को बैठाया था। इस जालसाजी के दम पर उसने परीक्षा पास की और टोंक की 9वीं बटालियन आरएसी में कांस्टेबल पद पर तैनात हो गया। वह साल 2024 तक पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं भी देता रहा, लेकिन उसे क्या पता था कि डेढ़ दशक पुराना यह राज एक दिन उसका पीछा करते हुए आएगा।फेसबुक पर 'ज्ञान' और वीआईपी तस्वीरें
नौकरी छोड़ने के बाद श्रीराम मीणा ने भीलवाड़ा जिले के कांतोली गांव में डेरा जमा लिया। उसने बकायदा अघोरी बाबा का चोला ओढ़ लिया और अपना नाम बदलकर 'श्रीराम अघोरी बाबा' रख लिया। बाबा सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव थे। अपने फेसबुक प्रोफाइल पर उसने एक बड़ा ही दिलचस्प विचार पोस्ट किया था कि 'डिग्री केवल आपको नौकरी दिलाती है, लेकिन ज्ञान पूरी दुनिया को जीतने की शक्ति दे सकता है।'इतना ही नहीं, बाबा के रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कई बड़े राजनेताओं और ऊंचे रसूख वाले पुलिस अधिकारियों के साथ उसकी तस्वीरें मौजूद हैं।
SOG की जांच में फूटा भंडाफोड़
15 साल पुराने इस राज से पर्दा तब उठा जब राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने एक शिकायत के आधार पर इस मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की। SOG की जांच में सामने आया कि श्रीराम मीणा की भर्ती पूरी तरह फर्जीवाड़े पर टिकी थी। रिपोर्ट के आधार पर टोंक के 9वीं बटालियन आरएसी के कमांडेंट राजेश चौधरी ने टोंक कोतवाली थाने में आरोपी के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई है।टोंक एसपी रोशन मीणा के अनुसार, SOG की जांच रिपोर्ट के बाद पूर्व कांस्टेबल के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस फिलहाल आरोपी 'बाबा' की तलाश में जुट गई है, हालांकि आधिकारिक रूप से उसके वर्तमान ठिकाने की पुष्टि होना अभी बाकी है। इस खुलासे के बाद से पुलिस महकमे के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी इस 'फर्जी पुलिसवाले और असली अघोरी' की कहानी जमकर सुर्खियां बटोर रही है।
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