राजस्थान में पंचायत चुनावों की घोषणा कल, 2 महीने रहेगी आचार संहिता; तबादलों पर लगेगी रोक
राजस्थान में पंचायत चुनावों की घोषणा कल, 2 महीने रहेगी आचार संहिता; तबादलों पर लगेगी रोक पंचायत चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक फैसलों पर भी असर पड़ेगा। आचार संहिता लागू होने के साथ तबादल…

सौजन्य से:- Hindustan
राजस्थान में पंचायत चुनावों की घोषणा कल, 2 महीने रहेगी आचार संहिता; तबादलों पर लगेगी रोक
पंचायत चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक फैसलों पर भी असर पड़ेगा। आचार संहिता लागू होने के साथ तबादलों पर पाबंदी लग जाएगी। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार और प्रशासन को निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार काम करना होगा।
राजस्थान में पंचायत चुनावों को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होने वाला है। राज्य निर्वाचन आयोग 3 अक्टूबर को पंचायतीराज चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा करेगा। आयोग ने शनिवार दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। चुनाव कार्यक्रम सामने आते ही ग्रामीण राजस्थान में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो जाएंगी और आचार संहिता लागू हो जाएगी।
माना जा रहा है कि इस बार पंचायतीराज चुनाव चार चरणों में कराए जा सकते हैं। चुनाव की तारीखों के साथ ही नामांकन, मतदान और मतगणना की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट होगी। आचार संहिता करीब दो महीने तक लागू रहने की संभावना है।
चुनाव की घोषणा के साथ ही तबादलों पर रोक
पंचायत चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक फैसलों पर भी असर पड़ेगा। आचार संहिता लागू होने के साथ तबादलों पर पाबंदी लग जाएगी। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार और प्रशासन को निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार काम करना होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में नई योजनाओं की घोषणा, उद्घाटन और राजनीतिक गतिविधियों पर भी आचार संहिता का असर दिखाई देगा। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद प्रदेश की सियासत का फोकस पूरी तरह गांवों की ओर हो जाएगा।
बैलेट से सरपंच और वार्ड पंच, EVM से होंगे बाकी चुनाव
पंचायतीराज चुनाव में अलग-अलग पदों के लिए मतदान की व्यवस्था भी अलग रहेगी। सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे, जबकि पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव EVM से कराए जाएंगे।
इन चुनावों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। इसके चलते बड़ी संख्या में महिलाएं पहली बार पंचायतीराज संस्थाओं में निर्वाचित होकर जिम्मेदारी संभालेंगी।
1.69 लाख से ज्यादा नए जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे
इस चुनावी प्रक्रिया के जरिए प्रदेश में करीब 1.69 लाख नए पंचायतीराज जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। इनमें 1403 जिला परिषद सदस्य और 8245 पंचायत समिति सदस्य शामिल हैं।
जिला परिषद सदस्य मिलकर 41 जिला प्रमुख, जबकि पंचायत समिति सदस्य 457 प्रधान चुनेंगे। इसके अलावा प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच, उपसरपंच और 1,30,584 वार्ड पंचों के चुनाव होंगे।
यानी पंचायत चुनावों का असर सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इनके बाद गांव से लेकर जिला स्तर तक पंचायतीराज संस्थाओं का नया नेतृत्व सामने आएगा।
41 में से 20 जिलों में महिला जिला प्रमुख
महिला आरक्षण के चलते इस बार जिला स्तर पर भी महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी। 41 जिला प्रमुखों में से 20 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
खास बात यह है कि बीकानेर संभाग के सभी जिलों में महिला जिला प्रमुख होंगी। इससे संभाग के जिला परिषद चुनावों में महिला उम्मीदवारों और उनके राजनीतिक समीकरणों पर विशेष नजर रहेगी।
7200 महिलाएं बनेंगी सरपंच
ग्राम पंचायत स्तर पर भी महिला प्रतिनिधित्व बड़े पैमाने पर होगा। 14,403 ग्राम पंचायतों में करीब 7200 महिला सरपंच चुनी जाएंगी। वहीं 1,30,584 वार्ड पंच पदों में से करीब 65 हजार पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
सरपंच पदों में 3058 पद ST, 2493 SC और 1961 OBC वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।
वार्ड पंचों के 1,30,584 पदों में से 21,962 SC, 19,117 ST और करीब 15 हजार पद OBC वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
चार जिलों में सभी सरपंच पद ST के लिए आरक्षित
पंचायत चुनाव में सबसे बड़ा आरक्षण समीकरण बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में देखने को मिलेगा। इन चार जिलों में सरपंच के सभी 1253 पद ST वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।
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