राजस्थान के 2 टीचर को नेशनल अवॉर्ड: स्टूडेंट्स संग 12 खगोलीय पिंड खोजे, QR-कोड स्कैन करते ही मिलती पेड़ की जानकारी; कोविड में गूगल मीट पर पढ़ाया - Bhawani Mandi News
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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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राजस्थान के 2 टीचर को नेशनल अवॉर्ड:स्टूडेंट्स संग 12 खगोलीय पिंड खोजे, QR-कोड स्कैन करते ही मिलती पेड़ की जानकारी; कोविड में गूगल मीट पर पढ़ाया
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शिक्षक दिवस पर राजस्थान के दो शिक्षकों को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड से सम्मानित करेंगी। इनमें झालावाड़ के पचपहाड़ की महात्मा गांधी सरकारी स्कूल के जीव विज्ञान के टीचर दिव्येंदु सेन और जयपुर के चाकसू के टूमली का बास स्कूल की गणित-व
दिव्येंदु ने बच्चों को एस्ट्रोनॉमी से रिलेटेड सॉफ्टवेयर चलाना सिखाया। उन्होंने बच्चों के साथ मिलकर 12 नए क्षुद्र ग्रहों (खगोलीय पिंड) की खोज की। यही नहीं, दिव्येंदु ने दो साल पहले 'ट्री टॉक' की शुरुआत की थी। स्कूल परिसर में 500 पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाए।
QR कोड स्कैन करने पर उस पेड़ का वैज्ञानिक नाम, औषधीय महत्व और पारिस्थितिक उपयोग के बारे में जानकारी सुनाई देती है। दिव्येंदु ने बताया- इसमें कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों, कलेक्टर अजय सिंह राठौर, एसडीएम, शिक्षा अधिकारियों और स्कूल स्टाफ ने हाड़ौती व मालवी बोलियों में आवाज दी है।
वहीं, डॉ. वर्तिका गुलाटी ने बच्चों को पढ़ाने के लिए नए तरीके अपनाए। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान बच्चों को गूगल मीट पर पढ़ाया। गूगल फॉर्म का उपयोग करके लगातार उनका आकलन और मूल्यांकन किया।
नामांकन बढ़ाने के लिए आया नवाचार का आइडिया
टीचर दिव्येंदु सेन ने कहा- मुझे बहुत खुशी हो रही है। यह एक सपने जैसा है। यह अवॉर्ड मैं स्टूडेंट्स को समर्पित करना चाहता हूं। नवाचार का आइडिया मुझे पुरानी पोस्टिंग झालावाड़ के उन्हेल में आया था।
वहां नामांकन बहुत कम था। टॉपर स्टूडेंट शहर में पढ़ने जाते थे। तभी मैंने ठान लिया था कि स्टूडेंट्स पढ़ने के लिए गांव छोड़कर नहीं जाएं।
इसी बीच मुझे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का जिला अकादमिक समन्वयक बनाया गया। तब से हम स्टूडेंट्स को नेशनल लेवल तक भेज रहे हैं।
पिपलोदी स्कूल हादसे में मारे गए 7 बच्चों पर क्षुद्र ग्रह का नाम होगा
दिव्येंदु सेन ने कहा- डीएसटी से ही मुझे इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलैबोरेशन के एस्टेरॉयड सर्च कैंपेन की जानकारी मिली। मैंने स्टूडेंट्स को उसमें पार्टिसिपेट करवाया। उनको ट्रेनिंग दी।
संबंधित सॉफ्टवेयर को चलाना सिखाया। इसका परिणाम था कि हमने 12 नए क्षुद्र ग्रहों की खोज की है। इनमें से 4 ने सूर्य की एक बार परिक्रमा कर ली है। नियम के अनुसार खोज करने वालों यानी हमें अब इनको नाम देना है।
मैंने और मेरे स्टूडेंट्स ने एक क्षुद्र ग्रह का नाम 'प्रमिश्का' रखने का निर्णय लिया है। झालावाड़ के मनोहरथाना के पिपलोदी गांव में स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। ये नाम उन्हीं सात बच्चों के नाम के पहले अक्षर से बना है। आगामी दिनों में यह नाम अप्रूव होने के बाद बच्चों के नाम अंतरिक्ष में हमेशा के लिए अमर हो जाएंगे। ये उन स्टूडेंट्स के लिए हमारी श्रद्धांजलि होगी।
स्टेट लेवल पर हो चुके सम्मानित
दिव्येंदु सेन ने कहा- 2021 में मुझे राज्यस्तरीय पुरस्कार मिल चुका है। गूगल फॉर एजुकेशन की तरफ से आयोजित गूगल सर्टिफाइड एजुकेटर लेवल वन की परीक्षा मैंने पहले ही प्रयास में पास की है। इसके लिए मुझे गूगल की तरफ से ग्लोबल सर्टिफिकेट भी मिला है।
इसके अलावा हाड़ौती गौरव शिक्षक पुरस्कार, रिलायंस फाउंडेशन का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार और पर्यावरण पद्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
डॉ. वर्तिका ने टीचिंग में अपनाए नए तरीके
टूमली का बास स्कूल की प्रधानाध्यापक आशा सिकरवार ने बताया- डॉ. वर्तिका गुलाटी 25 जुलाई 2016 से इस स्कूल में कार्यरत हैं। उनकी बतौर टीचर पहली पोस्टिंग 15 सितंबर 2012 को हुई थी।
डॉ. गुलाटी ने बच्चों को पढ़ाने के लिए कई नए तरीके अपनाए और विशेष कार्य किए हैं। उन्होंने CWSN (चिल्ड्रन विद स्पेशल नीड्स) के लिए ऑडियो बुक, कॉमिक बुक, वीडियो कंटेंट, दीक्षा, पीएम ई-विद्या, चैनल सामग्री, एबीएल किट, प्ले-वे विधि, विज्ञान मेला, मैथ्स लैब, यूट्यूब, पॉडकास्ट और रेडियो (आकाशवाणी) जैसे माध्यमों में अहम भूमिका निभाई है।
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