राजस्थान में पंचायत चुनाव फिर अटके! प्रधान-सरपंच की लॉटरी से 2 दिन पहले आया बड़ा आदेश
राजस्थान में पंचायत चुनाव फिर अटके! प्रधान-सरपंच की लॉटरी से 2 दिन पहले आया बड़ा आदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश के बाद उन लोगों की उम्मीदों पर फिर पानी फिर गया है…

सौजन्य से:- Hindustan
राजस्थान में पंचायत चुनाव फिर अटके! प्रधान-सरपंच की लॉटरी से 2 दिन पहले आया बड़ा आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश के बाद उन लोगों की उम्मीदों पर फिर पानी फिर गया है, जो लंबे समय से पंचायत चुनाव में अपनी सीट के आरक्षण की तस्वीर साफ होने का इंतजार कर रहे थे।
राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे लोगों के लिए फिर इंतजार बढ़ गया है। जिला परिषद सदस्य, प्रधान, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच और पंच के आरक्षण की लॉटरी एक बार फिर टाल दी गई है। खास बात यह है कि यह फैसला लॉटरी निकलने से महज दो दिन पहले लिया गया। 17 और 18 सितंबर को होने वाली लॉटरी के लिए तैयारियां चल रही थीं, लेकिन अब फिलहाल पूरा कार्यक्रम रोक दिया गया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश के बाद उन लोगों की उम्मीदों पर फिर पानी फिर गया है, जो लंबे समय से पंचायत चुनाव में अपनी सीट के आरक्षण की तस्वीर साफ होने का इंतजार कर रहे थे। अब उन्हें नई तारीख का इंतजार करना होगा।
दो दिन पहले क्यों रोक दी गई लॉटरी?
लॉटरी स्थगित करने के पीछे विभाग ने जिला कलेक्टरों की मांग को वजह बताया है। अलग-अलग जिलों के कलेक्टरों ने सरकार को बताया था कि 17 और 18 सितंबर को ही नगर निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है।
ऐसे में एक ही समय पर नगर निकाय चुनाव और पंचायतों की आरक्षण लॉटरी की जिम्मेदारी संभालना प्रशासन के लिए मुश्किल हो सकता है। पंचायतों की लॉटरी भी जिला कलेक्टर की मौजूदगी में कराई जानी है। लिहाजा दोनों महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रियाओं के एक साथ होने से प्रशासनिक स्तर पर परेशानी की आशंका जताई गई।
अब पंचायत चुनाव का क्या होगा?
फिलहाल सरकार ने लॉटरी को स्थगित करने का फैसला किया है। इसका मतलब यह है कि अभी यह साफ नहीं हो पाएगा कि कौन सा पंचायत क्षेत्र किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा और कहां से कौन चुनाव लड़ सकेगा।
निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी कराने पर विचार किया जाएगा। इसके बाद विभाग नई तारीखों का ऐलान करेगा। यानी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों को फिलहाल अपनी रणनीति के साथ-साथ आरक्षण की नई तारीख का भी इंतजार करना पड़ेगा।
दूसरी बार टली लॉटरी, बढ़ती जा रही बेचैनी
पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी का टलना कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी सरकार ने इसे स्थगित किया था। 16 अगस्त को पंचायत चुनाव की लॉटरी स्थगित की गई थी। उस समय 18 अगस्त को सरपंच और वार्ड पंच के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली जानी थी।
यानी करीब एक महीने के अंतराल में पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया को दूसरी बार झटका लगा है। पहली बार स्थगन के बाद जब 17 और 18 सितंबर की तारीख सामने आई तो संभावित उम्मीदवारों ने फिर से तैयारियां शुरू कर दी थीं। लेकिन अब दो दिन पहले ही कार्यक्रम स्थगित होने से चुनावी गणित लगाने वालों की बेचैनी बढ़ गई है।
किसकी उम्मीद पर टिका है पूरा खेल?
पंचायत चुनाव में आरक्षण की लॉटरी को बेहद अहम माना जाता है। लॉटरी के बाद ही कई संभावित उम्मीदवारों को यह पता चलेगा कि वे अपने पसंदीदा क्षेत्र से चुनाव लड़ पाएंगे या नहीं। किसी सीट के महिला, एससी, एसटी, ओबीसी या सामान्य वर्ग में जाने से कई दावेदारों की पूरी चुनावी रणनीति बदल सकती है।
इसी वजह से गांवों में संभावित उम्मीदवार लंबे समय से आरक्षण की स्थिति का इंतजार कर रहे हैं। कई जगह दावेदारों ने लोगों से संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया है, लेकिन सीट का आरक्षण तय नहीं होने के कारण अंतिम रणनीति बनाने में पेंच फंसा हुआ है।
निकाय चुनाव खत्म होंगे, तब खुलेगा पंचायत चुनाव का पत्ता
फिलहाल सरकार का फोकस नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी कराने पर है। निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव कार्यक्रम के बाद पंचायतों की आरक्षण लॉटरी के लिए नई तारीख तय की जाएगी।
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