होमसेहतराजस्थान में सिजेरियन आपरेशन के बाद प्रसूताओं की मौत: नई गाइडलाइंड का उद्देश्य
सेहत

राजस्थान में सिजेरियन आपरेशन के बाद प्रसूताओं की मौत: नई गाइडलाइंड का उद्देश्य

राजस्थान सरकार ने 23 प्रसूताओं की मौत के बाद नई गाइडलाइन जारी की है। जिसमें ऑक्सीटोसिन और डिनोप्रोस्टोन जेल की बिक्री पर रोक लगाने के साथ बिना चिकित्सक की पर्ची के एमटीपी किट की बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है।

Jagran के अनुसार20 जुलाई 2026 को 04:01 pm बजे
राजस्थान में सिजेरियन आपरेशन के बाद प्रसूताओं की मौत: नई गाइडलाइंड का उद्देश्य

सौजन्य से:- Jagran

राजस्थान में 23 प्रसूताओं की मौत के बाद ऑक्सीटोसिन की बिक्री पर रोक, नई गाइडलाइन जारी

राजस्थान सरकार ने 23 प्रसूताओं की मौत के बाद मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन और डिनोप्रोस्टोन जेल के ...और पढ़ें

HighLights

- 23 प्रसूताओं की मौत के बाद नई गाइडलाइन जारी।

- ऑक्सीटोसिन और डिनोप्रोस्टोन जेल की बिक्री पर रोक।

- अस्पतालों में उपकरणों के स्टरलाइजेशन पर विशेष ध्यान।

जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन आपरेशन के बाद प्रसूताओं की मौत और किडनी खराब होने के मामलों के बाद राज्य सरकार ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन और डिनोप्रोस्टोन जेल के उपयोग व बिक्री पर रोक लगाने के साथ बिना चिकित्सक की पर्ची के मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) किट की बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है।

बता दें कि राज्य के अलग -अलग जिलों में सिजेरियन आपरेशन के बाद 23 प्रसूताओं की मौत किडनी खराब होने से हो चुकी है। कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत और छह महिलाओं की किडनी खराब होने की जांच में सामने आया कि प्रसव के दौरान रक्तस्राव रोकने के लिए लगाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के कुछ बैचों में दवा के स्थान पर पानी भरा था।

तीन प्रयोगशालाओं की जांच में ऑक्सीटोसिन के बैच गुणवत्ताहीन पाए गए, जिससे रक्तस्राव नहीं रुका और अधिक खून बहने से मौतें हुईं। वहीं कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा और जोधपुर में हुई जांच में डिनोप्रोस्टोन जेल ( प्रसव पीड़ा शुरू करने में मदद करता है) में सक्रिय दवा की मात्रा तय मानक से कम पाई गई।

सरकार ने जांच समितियों की सिफारिश पर बिना डाक्टर की पर्ची एमटीपी किट बेचने पर भी रोक लगा दी है। रिपोर्ट में कहा गया कि कई महिलाएं स्वयं किट का उपयोग कर गंभीर रक्तस्राव और एनीमिया की शिकार हो जाती हैं। चिकित्सा विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने सोमवार को गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करने को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

खबरें और भी

साफ- सफाई पर दिया जाएगा ध्यान

सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम में प्रसव के काम आने वाले उपकरणों का स्टरलाइजेशन ( चिकित्सा उपकरणों से संक्रमण को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विधि )किया जाएगा । प्रसव में काम आने वाले उपकरणों को मशीनों द्वारा संक्रमण मुक्त किया जाएगा। एक बार उपयोग होने के बाद उपकरणों को 10 घंटे तक घोल में डूबो कर स्टरलाइज किया जाएगा। प्रत्येक प्रसव के बाद लेबर टेबल, बेड रोल और अन्य सामानों को हाइड्रोजन पेरोक्साइड केमिकल से साफ करना होगा।

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें