राजस्थान के 3 हजार मदरसों पर हाईकोर्ट की नजर, सरकार से मांगी रिपोर्ट
राजस्थान के 3 हजार मदरसों पर हाईकोर्ट की नजर, सरकार से मांगी रिपोर्ट राजस्थान हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार से प्रदेश में संचालित 3 हजार मदरसों की रिपोर्ट मांगी है. इसका उद्देश्य मदरसों की शिक्षा मे…

सौजन्य से:- ABP News
राजस्थान के 3 हजार मदरसों पर हाईकोर्ट की नजर, सरकार से मांगी रिपोर्ट
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार से प्रदेश में संचालित 3 हजार मदरसों की रिपोर्ट मांगी है. इसका उद्देश्य मदरसों की शिक्षा में सुधार पर विचार करना है.
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में संचालित 3 हजार मदरसों को लेकर सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. ये मामला प्रतिपाल सिंह व अन्य की ओर से दायर याचिका से संबंधित है. इसके जरिए कोर्ट का ध्यान राज्य के मदरसों में प्रभावी नियंत्रण, कानूनी नियमों और पर्यवेक्षण के अभाव की ओर आकर्षित किया गया है.
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मोती सिंह ने तर्क दिया कि वर्तमान में लागू 'राजस्थान मदरसा बोर्ड अधिनियम, 2020' में मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और उनके उचित प्रबंधन के लिए पर्याप्त और प्रभावी प्रावधानों की कमी है. उन्होंने मांग की कि योग्य शिक्षकों के माध्यम से शिक्षा के स्तर में सुधार और पारदर्शी प्रबंधन के लिए कानून में आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए.
जयपुर के वर्ल्ड हेरिटेज दर्जे पर मंडरा रहा खतरा, हाईकोर्ट ने जताई चिंता
याचिकाकर्ता ने क्या सुझाव दिए?
मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और गुणात्मक सुधार के लिए याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए हैं.
संबद्धता और पंजीकरण की जांच: इसमें आरबीएसई और सीबीएसई से संबद्ध माध्यमिक/उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा देने वाले मदरसों की अलग सूची बनाने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है. इसके साथ ही मानकों पर खरे न उतरने वाले मदरसों के पंजीकरण की समीक्षा करने का सुझाव भी दिया गया है.
अनुदान एवं सहायता पर रोक: जो संस्थाएं स्कूल के रूप में पंजीकृत हैं, उन्हें मदरसा बोर्ड द्वारा मिलने वाली वित्तीय सहायता या अनुदान बंद किया जाए.
एकीकृत पाठ्यक्रम और परीक्षाएं: प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर के मदरसों के लिए शिक्षा विभाग द्वारा एक निश्चित पाठ्यक्रम तैयार किया जाए और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के तहत समान परीक्षा आयोजित की जाए.
डिजिटल पोर्टल और ट्रैकिंग: मदरसा छात्रों का विवरण जुटाने के लिए एक विशेष पोर्टल बनाया जाए तथा प्रत्येक बच्चे को पहचान हेतु विशिष्ट पहचान संख्या (यूनिक स्टूडेंट आईडी) जारी किया जाए.
अयोग्य शिक्षकों पर कार्रवाई: बिना शैक्षणिक योग्यता (डिग्री या डिप्लोमा) वाले संविदा या पैरा-टीचर्स को दिए जाने वाले मानदेय पर रोक लगाई जाए और धार्मिक शिक्षा देने वाले धर्मगुरुओं (मौलवी, मुफ्ती आदि) को सरकारी कोष से वेतन भुगतान न किया जाए.
गैर-मुस्लिम बच्चों के प्रवेश पर रोक: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सिफारिशों का पालन करते हुए गैर-मुस्लिम बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने वाले मदरसों से निकालकर सामान्य विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2009 के तहत प्रवेश दिलाया जाए.
अनियमितता एवं भूमि आवंटन की जांच: जो मदरसा संस्थाएं मानकों को पूरा नहीं करती हैं, उनका पंजीकरण रद्द किया जाए और आवंटित भूमि को संबंधित जिला कलेक्टर को वापस सौंपी जाए.
कोर्ट ने सरकार से मांगी रिपोर्ट
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाइकोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.एल. भाटी को निर्देश दिया कि वो राजस्थान में मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण और संचालन के संबंध में राज्य सरकार की ओर से उठाए जाने वाले प्रभावी कदमों का विवरण देते हुए एक विस्तृत हलफनामा पेश करें. कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों पर भी विचार करने के निर्देश दिए हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को तय की गई
भीलवाड़ा में चरखा लेकर धरने पर कांग्रेस नेता, सिंबल विवाद पर विरोध तेज
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

राजस्थान युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद का परिणाम जारी: 6 लाख से ज्यादा वोट लेकर अभिषेक चौधरी सबसे आगे

ACTION PLAN : सीएम भजनलाल शर्मा आज करेंगे नवनिर्वाचित निकाय प्रमुखों से संवाद, तय होगा 100 दिन का रोडमैप

From the edge of extinction, two captive-bred Great Indian Bustards released into wild in Rajasthan


