अजमेर निकाय चुनाव: आरक्षण ने बदला सियासी गणित, 4.33 लाख वोटर तय करेंगे 80 वार्डों की बाजी
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सौजन्य से:- Amar Ujala
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अजमेर निकाय चुनाव: आरक्षण ने बदला सियासी गणित, 4.33 लाख वोटर तय करेंगे 80 वार्डों की बाजी
Thu, 20 Aug 2026 07:47 AM IST
अजमेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: अजमेर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 07:47 AM IST
सार
Rajasthan News: अजमेर नगर निगम चुनाव में 80 वार्डों के 4.33 लाख से अधिक मतदाता पार्षद चुनेंगे। मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होने से भाजपा और कांग्रेस के सियासी समीकरण बदल गए हैं। आरक्षण और नए परिसीमन ने कई दिग्गजों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है, जबकि नए इलाके चुनाव में गेम चेंजर बन सकते हैं।
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विस्तार
निकाय चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही अजमेर की सियासत में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। 11 सितंबर को अजमेर नगर निगम में मतदान और 14 सितंबर को नतीजे आएंगे। इसके बाद 21 सितंबर को मेयर और 22 सितंबर को डिप्टी मेयर का चुनाव होगा। यानी जनता पहले पार्षद चुनेगी और फिर यही पार्षद तय करेंगे कि अजमेर की मेयर की कुर्सी किसके पास जाएगी। इस बार मेयर पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित होने से चुनाव की पूरी पटकथा बदल गई है।
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80 वार्ड, 4.33 लाख वोटर और मेयर की कुर्सी पर नजर
अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में फिलहाल 4,33,638 मतदाता हैं। इनमें 2,15,387 पुरुष, 2,18,236 महिलाएं और 15 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। मतदाताओं के लिहाज से वार्ड नंबर 3 सबसे बड़ा चुनावी मैदान है। यहां 10,448 वोटर हैं। वहीं वार्ड नंबर 12 सबसे छोटा है, जहां सिर्फ 2,654 मतदाता हैं। यानी एक वार्ड में वोटरों की संख्या दूसरे वार्ड के मुकाबले करीब चार गुना तक है।
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आरक्षण की लॉटरी ने कई दिग्गजों को किया ‘आउट ऑफ वार्ड’
इस बार असली ट्विस्ट आरक्षण की लॉटरी ने दिया है। कई नेताओं ने जिस वार्ड में वर्षों से राजनीतिक जमीन तैयार की, वही वार्ड आरक्षित होते ही उनके सामने नया मैदान तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई। भाजपा शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी वार्ड 71 से पार्षद हैं, लेकिन अब उनका वार्ड ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है। भाजपा के ज्ञान सारस्वत का वार्ड 4 भी ओबीसी महिला हो गया। पूर्व डिप्टी मेयर नीरज जैन के वार्ड 66 पर ओबीसी आरक्षण लगा है।
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कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह रलावता के भाई एवं पूर्व डिप्टी कमिश्नर गजेंद्र सिंह रलावता का वार्ड 72 भी ओबीसी महिला के खाते में चला गया। कांग्रेस की तीन बार की पार्षद रश्मि हिंगोरानी के वार्ड 26 पर एससी ओपन आरक्षण आ गया। यानी जिन नेताओं ने अपने वार्ड में पकड़ बनाई थी, उन्हें अब नए वार्ड में जाकर फिर से राजनीतिक जमीन तैयार करनी पड़ेगी।
आरक्षण ने किसी की जमीन खिसकाई तो किसी की राह आसान की
आरक्षण ने कुछ नेताओं को राहत भी दी है। पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत का वार्ड 2 और सुरेंद्र सिंह शेखावत का वार्ड 56 अनारक्षित है। ऐसे में दोनों के लिए पुराना चुनावी मैदान खुला है। वर्तमान मेयर ब्रजलता हाड़ा और नगर परिषद प्रतिपक्ष नेता द्रोपदी कोली भी पुराने वार्ड से चुनाव लड़ सकती हैं।
दूसरी तरफ विधायक अनिता भदेल के निवास वाला वार्ड एससी ओपन है, जबकि अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी का वार्ड नंबर 4 ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हो चुका है।
भाजपा-कांग्रेस में दावेदारों की लंबी कतार
अजमेर की अगली मेयर महिला होंगी। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों में महिला चेहरों को लेकर लॉबिंग तेज होना तय है। मौजूदा बोर्ड में मेयर सहित 34 महिला पार्षद थीं। इस बार मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होने के कारण दोनों दल अधिक से अधिक मजबूत महिला चेहरों को मैदान में उतारने की रणनीति बना सकते हैं। लेकिन असली खेल सिर्फ मेयर के चेहरे का नहीं होगा। पहले 80 वार्डों में बहुमत हासिल करना होगा। जिस पार्टी के पास ज्यादा पार्षद होंगे, मेयर चुनाव में उसका पलड़ा भारी रहेगा।
35 साल से भाजपा का दबदबा
अजमेर की निकाय राजनीति में पिछले करीब 35 वर्षों में भाजपा का दबदबा रहा है। इस दौरान छह बार भाजपा और एक बार कांग्रेस का मुखिया बना। वर्ष 2010 में कांग्रेस का मुखिया बना था, लेकिन बोर्ड में भाजपा की तुलना में कांग्रेस पार्षदों की संख्या कम रही थी। अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस बार भाजपा के इस पुराने किले में सेंध लगा पाएगी या भाजपा एक बार फिर बोर्ड पर कब्जा जमाएगी?
नए इलाके बनेंगे चुनाव के ‘गेम चेंजर’
नए परिसीमन के बाद बोराज, काजीपुरा और हाथीखेड़ा सहित आसपास की दर्जनों कॉलोनियां नगर निगम का हिस्सा बन चुकी हैं। यहां के लोग पहली बार पंचायती राज व्यवस्था की जगह नगर निगम चुनाव में अपने पार्षद को वोट देंगे। यानी इन नए इलाकों में किस पार्टी की पकड़ बनती है, यह भी चुनावी गणित में बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है।
यह भी पढ़ें: उदयपुर नगर निगम चुनाव: 21 सितंबर को महापौर का चुनाव, 22 को उपमहापौर के लिए मतदान; जानें नतीजे कब आएंगे
9 सितंबर से शुरू होगी जिले की चुनावी पारी
अजमेर जिले में चुनाव दो चरणों में होंगे। 9 सितंबर को केकड़ी, पीसांगन, सावर, सरवाड़, टांटोटी और नसीराबाद, जबकि 11 सितंबर को अजमेर, किशनगढ़ और पुष्कर में मतदान होगा। 14 सितंबर को सभी के नतीजे सामने आएंगे। इसके बाद 21 सितंबर को मेयर/अध्यक्ष और 22 सितंबर को उप महापौर/उपाध्यक्ष के चुनाव होंगे।
अब नजर टिकटों पर है। आरक्षण ने पुराने समीकरण हिला दिए हैं, नए परिसीमन ने नए वोटर जोड़ दिए हैं और मेयर की कुर्सी महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में अजमेर नगर निगम का चुनाव इस बार ‘पार्षद बनाम पार्षद’ से आगे बढ़कर सीधे मेयर की कुर्सी की जंग बनने वाला है।
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